इनकम टैक्स भरने के बाद हर किसी को अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन इस साल लाखों लोग ऐसे हैं जिनका रिफंड महीनों बीत जाने के बाद भी बैंक खाते में नहीं पहुंचा है. अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. राज्यसभा में सरकार ने खुद यह माना है कि करीब 24.6 लाख टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) पिछले 90 दिनों से भी ज्यादा समय से प्रोसेसिंग में अटके हुए हैं. इनमें बड़ी संख्या उन बुजुर्गों या सीनियर सिटीजंस की भी है, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत है.
सरकार ने संसद में इस देरी की जो वजह बताई है, वह हर टैक्सपेयर को समझ लेनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो.
सरकार ने साफ किया है कि यह देरी किसी आम टैक्सपेयर को परेशान करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे विभाग का एक खास अभियान है. इसे 'नज' (NUDGE) कैंपेन कहा जा रहा है, जिसमें नई टेक्नोलॉजी और डेटा की मदद से टैक्स चोरी रोकने की कोशिश की जा रही है. इस सिस्टम के जरिए उन लोगों को मैसेज भेजे गए जिनके डेटा में विभाग को कुछ गड़बड़ी नजर आई.
सरकार के मुताबिक, जिन लोगों ने अपनी विदेश की कमाई या वहां की प्रॉपर्टी के बारे में सही जानकारी नहीं दी, उनके रिफंड रोक दिए गए हैं. इसके अलावा, अगर किसी ने दान (80G), चुनावी चंदा (80GGC) या पढ़ाई के लोन (80E) पर मिलने वाली छूट का गलत दावा किया है, तो उनका रिफंड भी प्रोसेसिंग में फंस गया है.
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग 'सक्षम' (SAKSHAM) नाम का एक खास सिस्टम इस्तेमाल कर रहा है. यह सिस्टम अलग-अलग जगहों से आपकी कमाई और खर्च का डेटा इकट्ठा करता है और फिर उसकी बारीकी से जांच करता है. अगर सिस्टम को लगता है कि आपने रिटर्न भरते समय कोई जानकारी छिपाई है या ज्यादा रिफंड पाने के लिए गलत दावे किए हैं, तो आपको 'रिवाइज रिटर्न' यानी सुधार करने का मौका दिया जाता है.
इस सिस्टम का असर भी दिखने लगा है क्योंकि पिछले दो सालों में करीब 1.11 करोड़ लोगों ने अपनी गलती सुधारते हुए दोबारा रिटर्न भरा है, जिससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स मिला है.
कई टैक्सपेयर्स को पिछले साल दिसंबर में मैसेज मिले थे कि वे 3-4 दिनों के भीतर अपना रिटर्न सुधार लें. संसद में जब यह सवाल उठा कि क्या कम समय देकर लोगों को डराया जा रहा है, तो सरकार ने कहा कि यह सिर्फ एक सलाह थी ताकि लोग खुद अपनी गलतियों को सुधार सकें. सरकार का मकसद लोगों को कानूनी पचड़ों में फंसाने के बजाय उन्हें सही जानकारी देने के लिए प्रेरित करना है.
हालांकि, रिफंड का इंतजार कर रहे सीनियर सिटीजंस के लिए कोई अच्छी खबर नहीं है. सरकार ने साफ कर दिया है कि बुजुर्गों के रुके हुए रिफंड को जल्दी निपटाने के लिए फिलहाल कोई अलग से योजना नहीं बनाई गई है, उन्हें भी सामान्य प्रक्रिया से ही गुजरना होगा.
तो अगर आपका रिफंड भी अटका हुआ है, तो एक बार अपना ईमेल और इनकम टैक्स पोर्टल पर आए मैसेज जरूर चेक करें. हो सकता है कि विभाग ने आपसे किसी जानकारी को दोबारा भरने या सुधारने के लिए कहा हो. जब तक आप विभाग की शंकाओं को दूर नहीं करेंगे या गलत जानकारी को सही नहीं करेंगे, तब तक आपका रिफंड प्रोसेसिंग में ही अटका रह सकता है. आज के दौर में टैक्स विभाग के पास आपके हर लेन-देन की जानकारी है, इसलिए सही जानकारी देना ही रिफंड पाने का सबसे तेज और आसान तरीका है.














