अब कपड़े धोना भी हुआ महंगा, Surf Excel और Wheel के दाम बढ़े, जानें अब कितने में मिलेगा 1 किलो का पैकेट

आपको बता दें कि डिटर्जेंट का कारोबार HUL के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. कंपनी की कुल कमाई का 25 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले इसी कैटेगरी से आता है, जो सालाना लगभग 16,000 करोड़ रुपये बैठता है.

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जानकारों का मानना है कि डिटर्जेंट कैटेगरी में पिछले कई महीनों से कीमतें स्थिर थीं, लेकिन अब कंपनी ने अपना मुनाफा सुधारने के लिए यह कदम उठाया है.
नई दिल्ली:

नए साल 2026 की शुरुआत आम आदमी के लिए थोड़ी महंगी साबित हो रही है. रसोई के सामान के बाद अब आपके घर का लॉन्ड्री बजट भी बढ़ने वाला है. देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने दो सबसे मशहूर डिटर्जेंट ब्रांड्स, सर्फ एक्सेल (Surf Excel) और व्हील (Wheel) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. जनवरी 2026 से लागू हुए इन नए दामों के बाद अब आपको कपड़े धोने के पाउडर के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. कंपनी ने यह फैसला मुनाफे को संतुलित करने और बाजार की स्थितियों को देखते हुए लिया है.

जानिए अब कितने में मिलेगा 1 किलो का पैकेट 

अगर हम कीमतों में हुई बढ़ोतरी की बात करें, तो सर्फ एक्सेल और व्हील दोनों के दाम में 3 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है. इस बदलाव के बाद सर्फ एक्सेल की कीमत करीब 2 प्रतिशत बढ़ गई है, जिससे अब यह 152 रुपये के बजाय 155 रुपये प्रति किलो मिलेगा. वहीं, सस्ते डिटर्जेंट सेगमेंट में आने वाले व्हील (Wheel) के दाम में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. 

अब व्हील का एक किलो का पैकेट 73 रुपये के बजाय 76 रुपये में मिलेगा. जानकारों का कहना है कि डिटर्जेंट उन चुनिंदा सामानों में से है जिन्हें पिछले दिनों जीएसटी (GST) कटौती का फायदा नहीं मिला था, इसलिए कंपनियों ने अब इसके दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है.

डिटर्जेंट के दाम बढ़ने की असली वजह क्या है?

 बाजार के जानकारों का मानना है कि डिटर्जेंट कैटेगरी में पिछले कई महीनों से कीमतें स्थिर थीं, लेकिन अब कंपनी ने अपना मुनाफा (Margin) सुधारने के लिए यह कदम उठाया है. हालांकि कच्चे तेल और पाम ऑयल जैसी चीजों के दाम फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन इस सेक्टर में मुकाबला थोड़ा कम हुआ है, जिससे बड़ी कंपनियों को कीमतें बढ़ाने का मौका मिल गया है. आपको बता दें कि डिटर्जेंट का कारोबार HUL के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. कंपनी की कुल कमाई का 25 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले इसी कैटेगरी से आता है, जो सालाना लगभग 16,000 करोड़ रुपये बैठता है.

 साबुन और शैंपू की कीमतों में राहत

एक तरफ जहां कपड़े धोना महंगा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ नहाने के साबुन और शैंपू की कीमतों में कटौती की गई है. कंपनी ने लक्स (Lux Rose & Vitamin E) साबुन की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की कमी की है. इसी तरह डेटॉल (Dettol Original) साबुन बनाने वाली कंपनी रेकिट ने भी अपने दाम 8 प्रतिशत तक घटाए हैं. 

शैंपू की बात करें तो क्लीनिक प्लस (Clinic Plus) के दामों में 13 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है. बाजार में बढ़ते मुकाबले को देखते हुए कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए इन जरूरी चीजों के दाम कम कर रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनका इस्तेमाल करें.

कहीं राहत तो कहीं और भी ज्यादा महंगाई 

कीमतों का यह खेल सिर्फ डिटर्जेंट और साबुन तक सीमित नहीं है. हॉर्लिक्स चॉकलेट ड्रिंक के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि इसके दाम 7 प्रतिशत तक कम कर दिए गए हैं. लेकिन अगर आप स्किन केयर प्रोडक्ट्स या लोशन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको बड़ा झटका लग सकता है. कंपनी ने डव (Dove) बॉडी लोशन की कीमतों में 31 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी है. 

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प्रीमियम प्रोडक्ट्स होने की वजह से कंपनी को लगता है कि इनके दाम बढ़ाने से डिमांड पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. कंपनी ने बाजार को देखते हुए कहीं दाम घटाए हैं तो कहीं बढ़ाए हैं ताकि ग्राहकों की जेब और कंपनी के मुनाफे के बीच तालमेल बना रहे.

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