'ICU के बाहर पिता को लेकर खड़ा था, अस्‍पताल ने इलाज से मना कर दिया', हेल्‍थ इंश्‍योरेंस लेते समय आप न कर देना गलती! 9 चेक प्‍वाइंट

Health Insurance Plans: क्या आपका हेल्थ इंश्योरेंस अस्पताल में काम आएगा? कैशलेस सुविधा से लेकर क्लेम रिजेक्शन तक, बीमा लेने से पहले इन 9 बातों का ध्यान रखें ताकि मुसीबत में कंपनी आपके साथ खड़ी रहे.

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Health Insurance Plan Check Points: हॉस्पिटल नेटवर्क, पॉलिसी वर्डिंग... स्‍वास्‍थ्‍य बीमा लेते समय इन 9 बातों रखें ध्‍यान, नहीं तो महंगा पड़ेगा!

Check Before Health Insurance Policy: हमारा जानकारी में एक शख्‍स अपने पिता के इलाज के लिए एक NCR के ही एक बड़े अस्‍पताल में गया. अस्‍पताल कर्मी को हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी का कागज दिखाया. दोनों बात करते हुए ICU के पास पहुंच चुके थे. अचानक उसने पॉलिसी में दिक्‍कत होने की बात कहते हुए इलाज से मना कर दिया. इसके पीछे कारण कई हो सकते हैं, लेकिन जरा सोचिए कि पॉलिसी लेते समय हम अपनी तरफ से क्‍यों गलती करें. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और बीमारियों के बढ़ते खर्च के बीच एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होना अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है. लेकिन अक्सर लोग विज्ञापन देखकर या कम प्रीमियम के चक्कर में कोई भी पॉलिसी ले लेते हैं और असली मुसीबत तब आती है जब अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है.

सोचिए कि किसी को अस्‍पताल के बिस्तर पर लेटे हुए पता चले कि जिस कंपनी से उसने पॉलिसी ली है, वो कैशलेस इलाज नहीं दे रही या फिर उसके क्लेम को रिजेक्ट कर दिया जाए! ऐसे में होने वाला मानसिक और आर्थिक तनाव कितना असहनीय हो सकता है! 

तो क्‍यों न हेल्‍थ पॉलिसी ख चुनते ही सारे संदेह क्लियर कर लिए जाएं! अगर आप भी अपने और अपने परिवार के लिए एक भरोसेमंद हेल्थ इंश्योरेंस चुनना चाहते हैं, तो इन 9 व्यावहारिक 'चेक पॉइंट्स' पर जरूर गौर करें.

1). अस्पताल का नेटवर्क

केवल संख्या न देखें, गुणवत्ता देखें. अक्सर कंपनियां दावा करती हैं कि उनके पास 10,000 से ज्यादा अस्पतालों का नेटवर्क है. लेकिन आपके लिए जरूरी यह है कि क्या आपके शहर के सबसे अच्छे अस्पताल और आपके घर के पास वाले हॉस्पिटल उस लिस्ट में शामिल हैं?

जरूरी सलाह: पॉलिसी लेने से पहले उस कंपनी की 'नेटवर्क हॉस्पिटल लिस्ट' निकालें. देखें कि क्या वे अस्पताल वहां हैं जहां आप अक्सर इलाज के लिए जाते हैं.

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2). कैशलेस सुविधा की पारदर्शिता 

कैशलेस (बिना पैसे दिए इलाज) का मतलब यह नहीं है कि आपको एक रुपया भी नहीं देना होगा. एक पारदर्शी कंपनी हमेशा यह साफ करेगी कि 

  • 'प्री-ऑथराइजेशन' (इलाज से पहले की मंजूरी) की प्रक्रिया क्या है?
  • इमरजेंसी में कैशलेस कैसे मिलेगा?
  • कौन से खर्चे (जैसे ग्लव्स, फाइल चार्ज आदि) आपको अपनी जेब से देने होंगे?

अगर ये बातें साफ नहीं हैं, तो अस्पताल में आपसे बहस हो सकती है.

Photo Credit: NDTV

3. 'पॉलिसी वर्डिंग' यानी नियम और शर्तें

ज्यादातर लोग पॉलिसी का मुख्य दस्तावेज नहीं पढ़ते. अगर पॉलिसी की भाषा बहुत ज्यादा तकनीकी या उलझाने वाली है, तो सावधान हो जाएं. एक भरोसेमंद कंपनी अपनी शर्तों को बहुत ही सरल भाषा में लिखती है ताकि एक आम आदमी समझ सके कि उसे क्या मिल रहा है और क्या नहीं.

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4. कस्टमर सपोर्ट: मुसीबत में कौन साथ देगा?

बीमा की जरूरत तब पड़ती है जब घर में कोई बीमार हो. ऐसे समय में अगर कंपनी का फोन न लगे या सही जानकारी न मिले, तो पॉलिसी बेकार है.

क्या चेक करें:

  • कंपनी का कस्टमर केयर नंबर कितनी जल्दी मिलता है?
  • क्या उनके पास दावा निपटान (Claim Assistance) के लिए कोई विशेष टीम है?
  • शिकायत दर्ज कराने का तरीका आसान है या नहीं?

5. क्लेम प्रक्रिया कितनी खुली (Transparent) है?

क्लेम रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण डॉक्यूमेंट्स की कमी होती है. कंपनी को यह साफ बताना चाहिए कि क्लेम के लिए कौन-कौन से कागज चाहिए, पैसे कितने दिनों में वापस मिलेंगे (Reimbursement) और अगर क्लेम रिजेक्ट होता है, तो उसका ठोस कारण क्या होगा. छिपाव रखने वाली कंपनियों से दूर रहें.

6. पॉलिसी रिनुअल (नवीनीकरण) की शर्तें

हेल्थ इंश्योरेंस लंबे समय का साथ है. आपको यह देखना चाहिए कि क्या कंपनी बुढ़ापे तक पॉलिसी रिन्यू करने की सुविधा दे रही है? क्या उम्र बढ़ने पर प्रीमियम बहुत ज्यादा तो नहीं बढ़ जाएगा? रिन्यूअल के समय क्या पुराने लाभ बरकरार रहेंगे?

7. 'क्या कवर नहीं है' (Exclusions) पर ज्यादा ध्यान दें

हम अक्सर यह देखते हैं कि पॉलिसी में क्या-क्या मिलेगा, लेकिन यह देखना भूल जाते हैं कि क्या नहीं मिलेगा. ध्यान दें:

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  • कुछ बीमारियां शुरू के 2-4 साल कवर नहीं होतीं (Waiting Period).
  • कुछ कॉस्मेटिक सर्जरी या बाहर से खरीदी गई दवाइयां कवर नहीं होतीं.

इन 'बाउंड्रीज' को पहले ही समझ लेना समझदारी है.

8. कंपनी की बातचीत का तरीका (Communication Style)

एक अच्छी कंपनी आपको पॉलिसी 'बेचने' की कोशिश नहीं करेगी, बल्कि आपको 'शिक्षित' (Inform) करेगी. अगर कंपनी के ब्रोशर या वेबसाइट पर केवल बड़े-बड़े वादे हैं और जोखिमों की जानकारी नहीं है, तो वह भरोसेमंद नहीं है. संतुलित जानकारी देने वाली कंपनी ही लंबी रेस का घोड़ा होती है.

9. आधुनिक तकनीक और डिजिटल पहुंच

आज के दौर में अगर कोई कंपनी अभी भी केवल कागजी कार्यवाही पर टिकी है, तो वह पीछे है. देखें कि क्या कंपनी का कोई मोबाइल ऐप है जिससे आप क्लेम ट्रैक कर सकें, पास के अस्पताल खोज सकें या डॉक्टर से ऑनलाइन बात कर सकें? डिजिटल सुविधा आपका कीमती समय बचाती है.

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आपका फैसला, आपकी सुरक्षा

हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक निवेश नहीं, बल्कि संकट के समय का सुरक्षा कवच है. प्रीमियम की तुलना करने के साथ-साथ इन व्यावहारिक पहलुओं को परखना आपको भविष्य के बड़े झटकों से बचा सकता है. याद रखें, सबसे अच्छी पॉलिसी वो नहीं है जिसका प्रीमियम सबसे कम है, बल्कि वो है जो क्लेम के समय सबसे मजबूती से आपके साथ खड़ी हो.

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