Explainer: क्‍या होता है STT, जिसमें बढ़ोतरी से लुढ़का बाजार! 3 एक्‍सपर्ट से समझिए क्‍यों जरूरी था ये इंजेक्‍शन

STT Explained: शेयर मार्केट एक्‍सपर्ट्स भी इसे डेरिवेटिव्स में सट्टेबाजी के कारोबार को सीमित करने के प्रयास के रूप में देखते हैं.   मार्केट एक्‍सपर्ट शंकर शर्मा ने कहा कि डेरिवेटिव्स पर एसटीटी में बढ़ोतरी के चलते उन्‍हें यह बजट एक मुख्य कारण से पसंद आया.

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STT on F&O Trading Explained: एसटीटी के बारे में जानिए सबकुछ

शेयर बाजार को इस बार का बजट नहीं भाया. बजट डे के उतार-चढ़ाव वाले सेशन में शेयर मार्केट ने भारी बिकवाली का सामना किया. मार्केट क्‍लोज होने तक सेंसेक्स 1,843.43 अंक की भारी गिरावट के साथ 80,722.94 के लेवल तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 593.45 अंक टूटकर 24,825 के स्तर तक चला गया. मार्केट में गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह STT में बढ़ोतरी का ऐलान रही. फ्यूचर एंड ऑप्‍शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों को इससे झटका लगा. STT में भारी बढ़ोतरी ने शेयर बाजार को रुला दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऐलान के बाद कुल मार्केट कैप से करीब 10 लाख करोड़ गायब हो गए. हालांकि इसके पीछे और भी वजहें रहीं. 

STT क्‍या होता है, किनके लिए लागू होता है, इसका मार्केट पर क्‍या असर होता है और सरकार ने ये फैसला क्‍यों लिया... इन सबके बारे में हम समझेंगे एक्‍सपर्ट्स से. 

सबसे पहले जानिए ये STT होता क्या है

STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स. ये फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) की हर खरीद-बिक्री पर लगने वाला ट्रांजेक्शन टैक्स होता. यह सीधे ब्रोकरेज कॉस्ट बढ़ाता है, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी और रिटेल ट्रेडर्स के लिए. पहले यह रेवेन्यू जुटाने का कम-फ्रिक्शन तरीका था, लेकिन अब डबल टैक्सेशन (STT + कैपिटल गेंस टैक्स) का विषय बन गया है. सरकार का मानना है और सेबी की ऐसी रिपोर्ट भी है कि F&O में ट्रेडिंग करनेवाले 10 में से 9 लोग पैसा गंवाते हैं. ऐसे में सरकार ये मानकर चल रही है कि ये फैसला जरूरी था. 

बजट में कितना बढ़ाया गया STT?

केंद्रीय बजट 2026-27 में वायदा पर एसटीटी (STT) को वर्तमान 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव है. ऑप्शंस प्रीमियम और ​ऑप्शंस एक्सरसाइज पर एसटीटी को भी वर्तमान 0.1% और 0.125% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव है.

  • फ्यूचर्स पर STT: 0.02% से 0.05% (150% बढ़ोतरी)
  • ऑप्शंस प्रीमियम पर: 0.1% से 0.15%
  • ​ऑप्शंस एक्सरसाइज पर: 0.125% से 0.15%

मार्केट पर क्‍यों पड़ा बुरा असर?

ये स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को कंट्रोल करने का सरकारी प्रयास बताया गया, लेकिन ट्रेडर्स ने इसे ट्रेडिंग किलर करार दिया है. इससे मार्केट में तत्काल गिरावट देखी गई. ऐलान के बाद सेंसेक्स 3000 पॉइंट्स तक गिरा (इंट्राडे लो 79,899), ब्रोकरेज स्टॉक्स 18% धड़ाम. एंजेल वन, ग्रो जैसी कंपनियों के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट देखी गई. 

वित्त सचिव ने बताया- क्‍यों जरूरी था ये फैसला?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट टीम में शामिल राजस्व सचिव के मुताबिक, फ्यूचर एंड ऑप्‍शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में STT बढ़ाने का मकसद सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को कम करना है. उनका कहना है कि सरकार सिस्‍टमेटिक रिस्‍क यानी प्रणालीगत जोखिम को अच्छे से मैनेज करना चाहती है. शेयर मार्केट एक्‍सपर्ट्स भी इसे डेरिवेटिव्स में सट्टेबाजी के कारोबार को सीमित करने के प्रयास के रूप में देखते हैं.   

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डेरिवेटिव एक जहर, युवाओं के हित में फैसला: शंकर शर्मा

मार्केट एक्‍सपर्ट शंकर शर्मा ने कहा कि उन्होंने बजट का स्वागत मुख्य रूप से इसलिए किया क्योंकि सरकार ने डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ा दिया है, एक ऐसा कदम जिसके बारे में उनका कहना है कि इससे खुदरा व्यापारियों के बीच फ्यूचर्स और ऑप्शंस की गतिविधि पर अंकुश लग सकता है. बजट के बाद सोशल मीडिया पोस्‍ट में उन्‍होंने कहा, 'मुझे यह बजट एक मुख्य कारण से पसंद आया: डेरिवेटिव्स पर एसटीटी में बढ़ोतरी.' उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग ने युवा प्रतिभागियों को नुकसान पहुंचाया है और इसका असर कई वर्षों तक रहेगा. 

शर्मा ने एसटीटी में वृद्धि को बाजारों के लिए बजट का मुख्य परिणाम बताया और इसे डेरिवेटिव्स में सट्टेबाजी के कारोबार को सीमित करने के प्रयास के रूप में देखा. उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव सेगमेंट ने युवा प्रतिभागियों को आकर्षित किया है और इसे हानिकारक बताया. उन्होंने कहा, 'डेरिवेटिव एक जहर है, जो कोकीन की तरह हमारे युवाओं की जड़ों को खोखला कर रहा है. इस फैसले का लॉन्‍ग टर्म प्रभाव दिखेगा. 

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BSE के CMD ने भी बताया इसे सकारात्‍मक फैसला 

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के एमडी और सीईओ सुंदरारमन राममूर्ति ने कहा कि सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बदलाव से निवेशक शेयर बाजार में लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. उन्‍होंने कहा कि यह केंद्रीय बजट भारत को भविष्य के निवेश गंतव्य के रूप में तैयार करता है. इससे पूंजीगत बाजार अधिक गहरे, ज्यादा संतुलित होंगे और यह देश की लंबी अवधि की आर्थिक प्राथमिकता के अनुरूप है. 

हालांकि दूसरी ओर एनविजन कैपिटल के संस्थापक नीलेश शाह ने कहा कि सिक्‍योरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स बढ़ाने के फैसले से निकट भविष्य में बाजार की भावना कमजोर होने की संभावना है, हालांकि सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर निरंतर जोर देने से मध्यम से लंबी अवधि में मजबूत सकारात्मक परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. उन्‍होंने कहा, 'एसटीटी पर बढ़ोतरी से निकट भविष्य में बाजार की भावना पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा. शाह ने एनडीटीवी प्रॉफिट स्टूडियो में बजट के बाद आयोजित पैनल चर्चा में कहा कि ट्रेडिंग वॉल्यूम को लेकर भी चिंताएं उभर सकती हैं क्योंकि स्वस्थ बाजार कामकाज के लिए लिक्विडिटी महत्वपूर्ण बनी हुई है.

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बोनस जानकारी: शेयर बायबैक पर क्‍या है ऐलान?

बता दें कि सरकार ने बायबैक में शेयर सरेंडर करने पर सभी प्रकार के शेयरधारकों को होने वाले फायदे को कैपिटन गेन में लाने का प्रस्ताव रखा है. इससे अब बायबैक से होने वाली आय पर अधिक टैक्स लगेगा. बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने शेयर बायबैक पर लगने वाले टैक्स पर कहा कि नए संरचना के अंतर्गत कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर प्रभावी रूप से 22 प्रतिशत का टैक्स लगेगा और नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर बायबैक लेनदेन के लिए 30 प्रतिशत का टैक्स लगेगा. 

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