Economic Survey 2026: वित्त वर्ष 2027 में भी काबू में रहेगी महंगाई, खाने-पीने की चीजों से लेकर सोने-चांदी तक, जानें क्या कहती है रिपोर्ट

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष (FY27) में महंगाई दर सरकार और आरबीआई (RBI) के काबू में ही रहेगी. सरकार को भरोसा है कि महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास बनी रहेगी.

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Economic Survey 2026: सर्वेक्षण में बताया गया कि महंगाई बढ़ने का एक और बड़ा कारण सोने और चांदी की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है
नई दिल्ली:

भारत में खुदरा महंगाई दर में वित्त वर्ष 27 में वित्त वर्ष 26 के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, लेकिन यह काबू में रहेगी. यह जानकारी गुरुवार, 29 जनवरी  को सरकार की ओर से जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में दी गई. सर्वेक्षण में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई में तेज नरमी देखने को मिली है और आने वाले समय में इसके आरबीआई की ओर से महंगाई के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य 4 प्रतिशत (+2-2) के बीच में रहने की उम्मीद है.

सर्वेक्षण में कहा गया कि दिसंबर 2025 में आरबीआई ने वित्त वर्ष 26 के लिए महंगाई 2 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 26 में महंगाई दर के 2.8 प्रतिशत रहने की संभावना जाताई है. इसकी वजह देश में खाद्य उत्पादों की कीमतें नरम रहना है.

आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 27 में वित्त वर्ष 26 के मुकाबले महंगाई बढ़ने के कई कारकों का जिक्र किया गया है.

महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि प्रमुख मेटल जैसे कॉपर, एल्युमिनियम और लोहे की कीमत बढ़ने के साथ वित्त वर्ष 27 में महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है. दरअसल, देश में डेटा सेंटर बनने, इंफ्रास्ट्रक्चर के काम और क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ते कदमों की वजह से इन मेटल्स की मांग बहुत ज्यादा है, जबकि सप्लाई कम है. ऐसे में मेटल की कीमत बढ़ने के कारण मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और पूंजीगत वस्तुओं की इनपुट लागत में इजाफा होगा.

सर्वेक्षण में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण महंगाई का आधार असामान्य रूप से कम रहा. इन कम महंगाई दरों ने वार्षिक मुद्रास्फीति के आंकड़ों को काफी हद तक दबा दिया. वित्त वर्ष 2027 में जैसे-जैसे ये अनुकूल आधार प्रभाव कम होते जाएंगे, वैसे-वैसे नए मूल्य दबावों के बिना भी महंगाई में वृद्धि होने की उम्मीद है. सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि यह सांख्यिकीय प्रभाव अकेले ही आगामी वित्त वर्ष में उच्च महंगाई के आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

क्यों इस साल के मुकाबले ज्यादा दिखेगी महंगाई? 

वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर में गिरावट लाने में खाद्य महंगाई ने अहम भूमिका निभाई.वित्त वर्ष 2026 में खाने-पीने की चीजें बहुत सस्ती थीं, जिसकी वजह से महंगाई का आंकड़ा काफी नीचे रहा. सर्वेक्षण के अनुसार, इसका कारण सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश, जलाशयों में पानी का बेहतर स्तर और प्रमुख फसलों की अच्छी पैदावार थी. 

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हालांकि, इसमें यह चेतावनी भी दी गई है कि खाद्य कीमतों में और गिरावट की संभावना सीमित है. अब अगले साल (FY27) में अगर कीमतें बहुत ज्यादा नहीं भी बढ़ती हैं, तो भी पिछले साल के मुकाबले तुलना करने पर महंगाई दर ज्यादा ही दिखाई देगी.

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन और बफर स्टॉक नीतियां जारी रहेंगी, लेकिन वित्त वर्ष 2027 में खाद्य महंगाई वित्त वर्ष 2026 की तुलना में अधिक रहने की संभावना है. 

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सोना-चांदी और डॉलर का असर 

सर्वेक्षण में बताया गया कि महंगाई बढ़ने का एक और बड़ा कारण सोने और चांदी की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है. इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत भी चिंता बढ़ा रही है. जब रुपया कमजोर होता है, तो बाहर से सामान मंगाना या आयात करना महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर देश के भीतर चीजों के दाम पर पड़ता है. इन सब वजहों से वित्त वर्ष 2027 में महंगाई वित्त वर्ष 2026 की तुलना में थोड़ी ज्यादा रहने की संभावना है.

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष (FY27) में महंगाई दर सरकार और आरबीआई (RBI) के काबू में ही रहेगी. सरकार को भरोसा है कि महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास बनी रहेगी.

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