Silver Crosses 3.40 Lakh: बाजार में चांदी की कमी दूर करने की तैयारी, दिल्‍ली से पायलट प्रोजेक्‍ट की शुरुआत, ये है पूरा प्‍लान

चांदी की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें बढ़कर 3.40 लाख प्रति किलो के पार कर गई हैं. MMTC-PAMP कंपनी ने चांदी की कमी दूर करने के लिए पायलट आधार पर रीसाइक्लिंग शुरू करने का निर्णय लिया है. पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली से शुरू होगा.

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Silver Shortage: बाजार में चांदी की कमी कैसे दूर होगी?

देश-दुनिया में चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है. अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चांदी ने 100 डॉलर/औंस का स्‍तर पार कर लिया है, जबकि देश में चांदी की कीमतें 3,40,000 रुपये/किलो के पार पहुंच गई है. इसके पीछे बड़ी वजह चांदी की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति है. जिस तेजी से चांदी की मांग बढ़ती जा रही है, खनन उस अनुपात में नहीं हो रहा है. ऐसे में चांदी की कमी को दूर करने के लिए मेटल रिफाइनर कंपनी MMTC-PAMP ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है. इसमें भारतीय परिवारों के पास मौजूद ढाई लाख टन से ज्‍यादा चांदी की बड़ी भूमिका रहनेवाली है. कंपनी ने सरकार से भी इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है. 

क्‍या है चांदी की कमी दूर करने का मास्‍टर प्‍लान? 

कंपनी अपने मौजूदा स्टोरों पर अगले 3 से चार महीनों में पायलट आधार पर चांदी का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) शुरू करने जा रही है. कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्‍टर समित गुहा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन खनन उत्पादन में उतनी तेजी नहीं दिख रही. ऐसे में आने वाले समय में आपूर्ति पक्ष पर दबाव बढ़ सकता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए कंपनी चांदी रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में उतर रही है.

समित गुहा के मुताबिक, अगर चांदी की मांग इसी तरह बनी रही, तो आपूर्ति में गंभीर बाधाएं आ सकती हैं. ऐसे में रीसाइक्लिंग की गई चांदी इस कमी को काफी हद तक पूरा कर सकती है.  उन्होंने यह भी बताया कि अब चांदी की रीसाइक्लिंग का अर्थशास्त्र पहले के मुकाबले ज्यादा अनुकूल हो गया है, जिससे यह पहल व्यावहारिक और लाभकारी बनती है.

केंद्र सरकार से भी किया आग्रह 

कंपनी ने केंद्र सरकार से भी चांदी रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने की अपील की है. अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन सोना और उससे लगभग दस गुना ज्यादा चांदी मौजूद है, जो रीसाइक्लिंग के जरिए दोबारा बाजार में लाई जा सकती है.

कैसे होगी चांदी की रीसाइक्लिंग? 

फिलहाल एमएमटीसी-पीएएमपी के पास सोने की रीसाइक्लिंग के लिए 20 स्टोर हैं. इन्हीं स्टोरों को चांदी मैनेज करने लायक बनाया जाएगा. इसके लिए कुछ उपकरणों को अपग्रेड किया जाएगा और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. कंपनी अगले पांच साल में अपने स्टोरों की संख्या भी दोगुनी करने की योजना पर काम कर रही है. 

दिल्‍ली से होगी पायलट प्रोजेक्‍ट की शुरुआत 

पायलट परियोजना की शुरुआत दिल्ली से होगी. सफल रहने पर इसे देश के अन्य हिस्सों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. चांदी के बाजार में स्थिरता लाने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है. MMTC-PAMP मुख्य रूप से एक रिफाइनर के रूप में डोरे रूप में सोने का आयात करती है, और ऐतिहासिक रूप से सोने-चांदी का आयात 1:1 के अनुपात में होता रहा है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 40 टन सोना और 50 टन चांदी का आयात किया.

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गुहा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान, आयात कुल 36 टन सोना और 60 टन चांदी रहा, जो चांदी की भारी मांग को दर्शाता है. एमएमटीसी-पीएएमपी भारत की एकमात्र ऐसी रिफाइनरी का संचालन करती है जिसे सोने और चांदी दोनों के लिए डिलीवरी स्‍टेंडर्ड्स की मान्‍यता है.  

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