IEA ने खोल दिया 40 करोड़ बैरल का 'इमरजेंसी' तेल भंडार, फिर भी क्रूड ऑयल $100 के पार, आखिर क्यों नहीं थम रही कच्चे तेल में लगी आग

Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उबाल आया है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के 13वें दिन हालात और भी बिगड़ गए हैं, जिसका सीधा असर तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है.

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Oil Reserve News: बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने की खबरों के बाद भी दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि ईरान के साथ चल रहा युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.
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  • ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है.
  • IEA ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए अपने इमरजेंसी स्टॉक से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया है.
  • स्ट्रैट ऑफ होर्मुज और बसरा पोर्ट के पास ईरानी हमलों से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन के लिए खतरा पैदा हुआ है.
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नई दिल्ली:

दुनियाभर में कच्चे तेल (Crude Oil Price) की कीमतों को लेकर घमासान मचा हुआ है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने बाजार में खलबली मचा दी है. तेल की कीमतों को कम करने के लिए अमेरिका और अन्य देशों ने अपने इमरजेंसी स्टॉक से लाखों बैरल तेल निकालने का फैसला किया है, लेकिन इसके बावजूद कच्चे तेल के दाम थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. 

ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Price) गुरुवार सुबह $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया. आपको बता दें कि कुछ ही दिन पहले यह $120 के करीब भी पहुंच गया था.सप्लाई रुकने के डर से गुरुवार को तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी देखी गई है. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क (WTI) भी उछलकर $95 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है

इमरजेंसी में रखा तेल भी नहीं रोक पा रहा 'आग'

तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के इमरजेंसी स्टॉक से 400 मिलियन (40 करोड़) बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है. इसमें से अकेले अमेरिका 172 मिलियन बैरल तेल अगले हफ्ते से जारी करना शुरू करेगा. जापान और जर्मनी भी अपना स्टॉक खोल रहे हैं. 

लेकिन जानकारों का कहना है कि यह कोशिश धधकती आग में बगीचे वाले पाइप से पानी डालने जैसी है, क्योंकि युद्ध का खतरा इससे कहीं बड़ा है.

क्यों फिर से महंगा हुआ कच्चा तेल?

बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने की खबरों के बाद भी दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि ईरान के साथ चल रहा युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.तेल की कीमतों में इस अचानक तेजी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और इराक के बसरा पोर्ट के पास कमर्शियल जहाजों पर हुए ईरानी हमले हैं. दुबई के तट के पास भी एक कंटेनर शिप पर हमला हुआ है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन खतरे में पड़ गई है.'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) लगभग बंद हो गया है. दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है.

ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के आर्थिक केंद्रों और बैंकों को निशाना बनाएगा, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है.खाड़ी देशों (Gulf countries) से होने वाली तेल सप्लाई पर ईरान के बढ़ते दबाव ने दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल बना दिया है, जिससे कीमतें काबू से बाहर होती दिख रही हैं.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स ?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल के लिए अब $90 से $100 प्रति बैरल का रेट एक  न्यू नॉर्मल (New Normal) बन गया है. भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कह रहे हों कि उन्होंने युद्ध जीत लिया है और ईरान अब खत्म होने की कगार पर है, लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं. इजरायली सेना का कहना है कि उनके पास अभी भी हमलों के लिए बहुत सारे टारगेट बाकी हैं, यानी यह संकट अभी लंबा खिंच सकता है.

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