दुनियाभर के बाजारों के लिए सोमवार की सुबह एक बुरी खबर लेकर आई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता (US-Iran Peace Talks) फेल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी (Blockade) करने का आदेश दे दिया है, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार निकल गई हैं. आज 13 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8% तक का तूफानी उछाल देखा गया.
100 डॉलर के पार पहुंचा तेल, बाजार में मचा हड़कंप
सोमवार को ट्रेडिंग शुरू होते ही अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 8% उछलकर 104.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 7% की बढ़त के साथ 102 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. आपको बता दें कि युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर थीं, जो इस तनाव के बीच अब एक बार फिर तेजी से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं.
क्या आज, 13 अप्रैल को महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
भारत में 13 अप्रैल को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे आम आदमी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है. कच्चे तेल की कीमतों में आए तूफानी उछाल और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी के बावजूद, भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू दरों को स्थिर रखा है. दिल्ली में आज पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर बिक रहा है. वहीं, मुंबई में पेट्रोल के लिए ₹103.50 और डीजल के लिए ₹90.01 प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं. कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो सिटी में भी पुराने रेट ही लागू हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
क्यों फेल हुई अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता?
इस्लामाबाद में अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर के बीच लंबी बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका. पाकिस्तान की मध्यस्थता में जो दो हफ्ते का सीजफायर हुआ था, वह भी कमजोर पड़ता नजर आ रहा है. इजरायल के लेबनान पर हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने की वजह से दोनों पक्षों ने बातचीत को लेकर निराशा जताई है. इसी के बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए नाकाबंदी का फैसला लिया.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी का असर
अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि सोमवार से ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी शुरू हो जाएगी. यह नाकाबंदी उन जहाजों पर लागू होगी जो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं. हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत होगी. बता दें कि दुनिया का 20% यानी पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया में सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है.
शेयर बाजार पर पड़ा बुरा असर
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस झटके का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा. सोमवार सुबह दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 2% तक गिर गया, वहीं जापान के निक्केई (Nikkei) में भी गिरावट दर्ज की गई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बाजार में तेल की कमी ऐसे ही बढ़ी, तो इसका दर्द दुनिया के हर उस इंसान को झेलना पड़ेगा जो तेल की कीमतों से जुड़ा हुआ है.














