ईरान युद्ध की आग में कच्चे तेल की कीमतों में विस्फोट! ₹70 से ₹112 पहुंचा ब्रेंट क्रूड, 60% से ज्यादा महंगा, गोल्डमैन सैश ने की ये बड़ी भविष्यवाणी

आज यानी सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखी गई.एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध और लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की ये बढ़ती कीमतें पूरी दुनिया में महंगाई का नया रिकॉर्ड बना सकती हैं.

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Crude Oil Price Today: पिछले केवल 30 दिनों के भीतर ही कच्चे तेल के दाम लगभग 56% बढ़ गए हैं.

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब दुनिया की जेब पर भारी पड़ने लगा है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है. आज यानी सोमवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है. 

ईरान युद्ध के बाद 60% उछला कच्चा तेल

जब से मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू हुआ है, कच्चे तेल की कीमतों में 60 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. जो ब्रेंट क्रूड पहले करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर मिल रहा था, वह सोमवार को उछलकर 112 डॉलर के करीब पहुंच गया. भारतीय बाजार (MCX) पर भी इसका असर दिख रहा है, जहां कच्चे तेल की कीमत 3% बढ़कर 9,310 रुपये प्रति बैरल हो गई है. पिछले 30 दिनों में ही तेल के दाम 56% बढ़ चुके हैं.

ट्रंप का अल्टीमेटम और 'होर्मुज' का खतरा

इस संकट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वो चेतावनी है, जिसकी समयसीमा आज ,सोमवार को खत्म हो रही है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खोलने को कहा था, वरना उसके पावर प्लांट्स तबाह करने की धमकी दी थी. जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर हमले की बात कही है. बता दें कि 'होर्मुज' दुनिया का वो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से पूरी दुनिया को तेल की सप्लाई होती है.

गोल्डमैन सैश की भविष्यवाणी, 2026 तक महंगा रहेगा तेल

दुनिया के दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) ने कच्चे तेल की कीमतों के अनुमान में 10% की बढ़ोतरी कर दी है. बैंक का मानना है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत दाम 85 डॉलर प्रति बैरल रहेगा, जो पहले 77 डॉलर रहने का अनुमान था. मार्च और अप्रैल के महीनों में तो इसकी औसत कीमत 110 डॉलर तक जा सकती है.

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सप्लाई चैन में बड़ी रुकावट की आशंका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा तो होर्मुज के रास्ते होने वाली तेल की सप्लाई अपनी क्षमता के सिर्फ 5 प्रतिशत तक सिमट सकती है. इसे दोबारा सामान्य होने में कम से कम एक महीना लगेगा. अनुमान है कि इस युद्ध की वजह से बाजार को 80 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल का नुकसान हो सकता है. फिलहाल एशिया में तेल की कमी महसूस की जा रही है, हालांकि अमेरिका और यूरोप ने अपना स्टॉक बढ़ाकर स्थिति संभालने की कोशिश की है.

दुनिया पर मंडराया ऊर्जा संकट

मिडिल ईस्ट में तेल उत्पादन का नुकसान वर्तमान में 1.1 करोड़ बैरल प्रति दिन से बढ़कर 1.7 करोड़ बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है. गोल्डमैन सैश के एनालिस्ट्स का कहना है कि यह स्थिति नीति निर्माताओं को ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की कमजोरियों पर दोबारा सोचने को मजबूर कर देगी. अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है.

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