ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $83 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं.
हफ्ते के शुरुआती तीन दिनों में ही वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) में करीब 11% की भारी बढ़त दर्ज की गई और यह $76 प्रति बैरल की ओर बढ़ रहा है. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 2.43% की बढ़त के साथ $83.26 पर ट्रेड कर रहा था.
सप्लाई चेन टूटने से दुनिया भर में मची खलबली
क्रूड ऑयल की कीमतों में इस तेजी की बड़ी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद करना और सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं. युद्ध की वजह से सप्लाई रुकने के डर से तेल की कीमतों में आग लग गई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की चिंता सताने लगी है.निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है.फिलहाल युद्ध रुकने के आसार नहीं दिख रहे हैं.
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होने पर भारत का सालाना आयात बिल करीब 16,000 करोड़ रुपये बढ़ जाता है. भारत अपनी तेल सप्लाई का लगभग 50% हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से हॉर्मुज स्टेट के रास्ते ही मंगाता है, जहां अब युद्ध की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है.
क्या भारत के पास है पर्याप्त स्टॉक?
राहत की बात यह है कि भारत फिलहाल तेल और गैस के मामले में सुरक्षित स्थिति में है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास करीब 25 दिनों का रिजर्व स्टॉक मौजूद है. इसमें वह तेल भी शामिल है जो फिलहाल जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है.
पिछले कुछ सालों में भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय रूस, अफ्रीका और अमेरिका से भी तेल खरीदना शुरू कर दिया है.














