मध्य-पूर्व एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध का सीधा असर अब दुनियाभर के देशों पर पड़ता दिख रहा है. फरवरी 2026 में जो कच्चा तेल औसतन $69.01 प्रति बैरल था, वह मार्च के शुरुआती 12 दिनों में ही औसतन $101.25 तक जा पहुंचा है. यानी महज कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में $32 प्रति बैरल से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पेट्रोलियम मंत्रालय के पीपीएसी (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 12 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत उछलकर $127.22 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
इन दिक्कतों के बावजूद भारत का प्लान 'बी' काम कर गया है. भारतीय लोगों को पेट्रोल-डीजल की दिक्कत नहीं हुई और न ही इसके रेट बढ़े, जबकि LPG और PNG के लिए भी अपेक्षाकृत कम परेशानी हुई.
भारत ने बदली रणनीति, सप्लाई सुरक्षित
तेल की कीमतों में इस 'आग' के बीच राहत की खबर यह है कि भारत सरकार ने तेल आयात के लिए अपना 'अल्टरनेटिव रूट' एक्टिवेट कर दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत की क्रूड सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है.
भारत ने अपनी निर्भरता को डायवर्सिफाई (विविध) कर लिया है. अब भारत की कुल तेल जरूरत का 70% हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) के बजाय अन्य समुद्री मार्गों से आ रहा है.
पहले यह केवल 55% था. भारत वर्तमान में 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से होने वाली सप्लाई में बाधा का असर कम हो गया है. भारत की प्रतिदिन की खपत 55 लाख बैरल है, जिसे वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए सफलतापूर्वक मैनेज किया जा रहा है.














