Tax on Gold: सोना खरीदने पर 3 से 6% टैक्‍स, बेचने पर ज्‍यादा! गिफ्ट और विरासत में मिले तो कितना देना होगा?

Taxation on Gold: वसीयत में मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं लगता. हालांकि, जब आप उस विरासत में मिले सोने को बेचेंगे, तो पुराने मालिक के खरीदने की तारीख से होल्डिंग पीरियड गिना जाएगा और मुनाफा होने पर टैक्स देना होगा.

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Tax On Gold, Comprehensive Guide: सोना-खरीदने बेचने और रखने पर कितना टैक्‍स देना होता है?

Gold Tax Rules: भारतीय घरों में किसी भी देश के गोल्‍ड रिजर्व से कहीं गुना ज्‍यादा सोना है. सोने के प्रति भारतीयों की दीवानगी, किसी भी देश के लोगों से कहीं गुना ज्‍यादा होगी. हमारे यहां सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि मुसीबत के समय का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है. यहां लोग न केवल शौक से, बल्कि छोटी-छोटी राशि को सोने मे निवेश के तौर पर लगाते हैं, जो बाद में बड़ी पूंजी बनता है. बहरहाल क्या आप जानते हैं कि सोने की शुद्धता के साथ-साथ उसकी टैक्सेशन (Taxation) को समझना भी उतना ही जरूरी है? चाहे आप फिजिकल सोना (Physical Gold) खरीद रहे हों या डिजिटल (Digital/SGB/ETF), सरकार हर कदम पर टैक्स के नियम तय करती है. जुलाई 2024 में ही इन नियमों में र्क महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.

1. सोना खरीदते समय लगने वाला टैक्स

सोना खरीदने के तरीके के आधार पर टैक्स की दरें अलग-अलग होती हैं. 

  • फिजिकल और डिजिटल गोल्ड: यदि आप सिक्का, गहने या डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो आपको 3% GST देना होगा.
  • मेकिंग चार्जेस: गहने बनवाने पर मेकिंग चार्जेस पर 5% GST अलग से लागू होता है.
  • इंपोर्टेड गोल्ड: विदेश से सोना लाने पर 6% कस्टम ड्यूटी लगती है.
  • SGB और Gold ETF: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड म्यूचुअल फंड खरीदते समय कोई GST नहीं देना पड़ता.

2. सोना बेचने पर टैक्स (कैपिटल गेन्स)

सोना बेचने पर होने वाले मुनाफे को 'कैपिटल गेन्स' कहा जाता है. 23 जुलाई 2024 के बाद लागू नए नियम इस प्रकार हैं:

  • होल्डिंग पीरियड: अब शॉर्ट टर्म (STCG) और लॉन्ग टर्म (LTCG) के बीच का अंतर 24 महीने (2 साल) तय किया गया है.
  • फिजिकल और डिजिटल गोल्ड: 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG (बिना इंडेक्सेशन के) और उससे कम समय में बेचने पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.
  • गोल्‍ड ETF और म्यूचुअल फंड: ETF के लिए होल्डिंग पीरियड 12 महीने है. 12 महीने के बाद 12.5% LTCG लगता है. म्यूचुअल फंड के मामले में 24 महीने बाद रिडीम करने पर 12.5% टैक्स देय है.

3. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और बजट 2026 के नए नियम

बजट 2026 से SGB के नियमों में बड़ा बदलाव आया है.

  • मैच्योरिटी पर टैक्स: अब केवल वही बॉन्ड टैक्स-फ्री (Tax-exempt) होंगे जिन्हें 'प्राइमरी इशू' (सीधे सरकार से) में खरीदा गया हो और मैच्योरिटी तक रखा गया हो.
  • सेकेंडरी मार्केट: अगर आपने किसी और से बॉन्ड खरीदे हैं या मैच्योरिटी से पहले बेच रहे हैं, तो होल्डिंग पीरियड के हिसाब से STCG या LTCG देना होगा.

4. विरासत और गिफ्ट में मिला सोना

  • विरासत (Inheritance): वसीयत में मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं लगता. हालांकि, जब आप उस विरासत में मिले सोने को बेचेंगे, तो पुराने मालिक के खरीदने की तारीख से होल्डिंग पीरियड गिना जाएगा और मुनाफा होने पर टैक्स देना होगा.
  • गिफ्ट (Gift): रिश्तेदारों से मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं है, लेकिन गैर-रिश्तेदारों से ₹50,000 से अधिक मूल्य का सोना मिलने पर वह 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत टैक्स के दायरे में आता है.
Smart Tips: आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत, यदि आप सोना बेचकर मिलने वाली पूरी रकम का उपयोग घर खरीदने के लिए करते हैं, तो आप LTCG टैक्स बचा सकते हैं.

अब SGB मैच्योरिटी का गणित भी समझ लीजिए 

जब आप SGB में निवेश करते हैं, तो यह 8 साल की अवधि के लिए होता है. इसके दो मुख्य फायदे होते हैं: सालाना ब्याज और सोने की बढ़ी हुई कीमत.

1. मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि

आठ साल पूरे होने पर, सरकार आपको पिछले 3 कार्य दिवसों के सोने के औसत भाव (999 शुद्धता) के आधार पर पैसा वापस करती है. यानी अगर आपने ₹5,000 प्रति ग्राम पर खरीदा था और 8 साल बाद भाव ₹10,000 है, तो आपको ₹10,000 के हिसाब से भुगतान मिलेगा.

2. टैक्स के नियम (सबसे महत्वपूर्ण बदलाव)

हालिया बजट के बाद SGB पर टैक्स को लेकर स्थिति अब काफी बदल गई है:

टैक्स-फ्री मैच्योरिटी (Exempt): अगर आपने बॉन्ड सीधे सरकार (RBI) से 'प्राइमरी इशू' के समय खरीदे हैं और पूरे 8 साल तक उसे अपने पास रखते हैं, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे (Capital Gains) पर आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा.
ब्याज पर टैक्स: SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज टैक्स-फ्री नहीं होता. यह आपकी 'अन्य स्रोतों से आय' में जुड़ता है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स लगता है.

अगर आप 8 साल से पहले पैसा निकालना चाहें?

SGB में 8 साल से पहले भी बाहर निकलने के दो रास्ते हैं, जहां टैक्स के नियम अलग हो जाते हैं:

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RBI विड्रॉल (5 साल बाद): सरकार आपको 5 साल पूरे होने के बाद बॉन्ड वापस करने का विकल्प देती है. अगर आप इस विकल्प के जरिए पैसा निकालते हैं, तो भी मैच्योरिटी की तरह ही कैपिटल गेन्स पर कोई टैक्स नहीं लगता.

शेयर बाजार में बिक्री (Secondary Market): यदि आप अपने बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर किसी और को बेचते हैं, तो नियम बदल जाते हैं:

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24 महीने से पहले बेचने पर: मुनाफा आपकी आय में जुड़ेगा और स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा (Short Term).

24 महीने के बाद बेचने पर: मुनाफे पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगेगा (बिना इंडेक्सेशन के).

टैक्‍स एक्‍सपर्ट CA अमित कुमार  के मुताबिक, अगर आपका उद्देश्य अधिकतम लाभ और जीरो टैक्स है, तो SGB को मैच्योरिटी (8 साल) तक रखना ही सबसे बेहतर विकल्प है. केवल वही बॉन्ड टैक्स-फ्री रहेंगे जिन्हें सीधे (सरकार से) खरीदा गया हो.

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