Budget 2026: बजट की वो मांगें, जिससे भारत बनेगा 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब'

Budget 2026: ग्लोबल सप्लाई चेन में ईरान-अमेरिका तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच, भारतीय उद्यमियों का मानना है कि सरकार को छोटे उद्योगों के लिए रोजगार आधारित PLI स्कीम लानी चाहिए.

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Budget 2026: बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. इस बजट से देश के MSME सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं. इसके लिए एनडीटीवी की टीम गाजियाबाद के बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया में पहुंची, जहां मेट्रो के हाई-टेक फेयर कलेक्शन गेट बनाने वाली कंपनी ओरियनप्रो तोशी ऑटोमैटिक सिस्टम्स के उद्यमियों ने अपनी मांगें रखीं.

औद्योगिक क्षेत्र मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रबंध निदेशक संजीव सचदेव ने बताया कि अगर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है, तो सरकार को इज ऑफ डूइंग मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे.

सचदेव ने सीधे तौर पर चीन से तुलना करते हुए दो बड़ी चुनौतियों की ओर इशारा किया, पहला चीन में उद्यमियों को महज 3% पर कर्ज मिलता है, जबकि भारत में यह दर 8.5% से 9% के बीच है. MSMEs की मांग है कि उन्हें लंबी अवधि के लिए कम ब्याज दर पर कॉलेटरल फ्री लोन दिया जाए. दूसरा, चीन में एक नई फैक्ट्री एक साल में शुरू हो जाती है, जबकि भारत में क्लीयरेंस और सरकारी प्रक्रियाओं के कारण 3 साल लग जाते हैं. इस क्लीयरेंस व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए.

अर्थव्यवस्था की रीढ़ है MSME सेक्टर

देश की प्रगति में इस सेक्टर की भूमिका को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है,

  • GDP में योगदान: लगभग 30%
  • निर्यात में हिस्सेदारी: 2024-25 में बढ़कर 45.79% तक पहुँची.
  • करीब 5.93 करोड़ पंजीकृत यूनिट्स 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही हैं.
  • उद्यमियों का कहना है कि 2020-21 में MSME निर्यात जो ₹3.95 लाख करोड़ था, वह अब बढ़कर ₹12.39 लाख करोड़ हो गया है. इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए अब रोजगार आधारित PLI स्कीम की सख्त जरूरत है.

उद्यमी चाहते हैं रोजगार वाली PLI स्कीम

ग्लोबल सप्लाई चेन में ईरान-अमेरिका तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच, भारतीय उद्यमियों का मानना है कि सरकार को छोटे उद्योगों के लिए रोजगार आधारित PLI स्कीम लानी चाहिए. इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे.

बजट 2026 से उम्मीदें 

  • फैक्ट्री लगाने से लेकर चलाने तक की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए.
  • TDS, TCS और GST के जटिल नियमों को सरल बनाया जाए ताकि उद्यमी पेपरवर्क के बजाय प्रोडक्शन पर ध्यान दें.
  • बड़े वेंडर्स MSMEs का भुगतान समय पर करें, इसके लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए.
  • ग्लोबल मार्केट में मुकाबला करने के लिए ब्याज दरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बराबर लाया जाए.
  • ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय MSMEs को सुरक्षित करने के लिए विशेष प्रावधान हों.
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