भारत की समुद्री सुरक्षा में ऐतिहासिक कदम, अदाणी पोर्ट्स ने बनाया देश का पहला 'पोर्ट ऑफ रिफ्यूज'

पोर्ट ऑफ रिफ्यूज पर जहाजों को जरूरत पड़ने पर मदद दी जाएगी. जैसे कि जहाज को बचाना, डूबे हुए जहाज को हटाना, आग बुझाना, समुद्री प्रदूषण रोकना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद करना. अदाणी पोर्ट्स ने फाइलिंग में बताया कि इसके लिए विशेष उपकरण और प्रशिक्षित टीमें मौजूद रहेंगी.

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भारत के समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. देश की सबसे बड़ी निजी बंदरगाह ऑपरेटर, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने भारत का पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (Port of Refuge) संचालित करने का ऐलान किया है. अदाणी पोर्ट्स ने इस अहम सर्विस के लिए SMIT Salvage और मैरीटाइम इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर (MERC) के साथ एक एमओयू साइन किया है. कंपनी ने इसकी जानकारी शुक्रवार को एक्सचेंज फाइलिंग में दी. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा. पोर्ट ऑफ रिफ्यूज समुद्र में चलने वाले जहाजों की सुरक्षा बढ़ाएगा, पर्यावरण की रक्षा में मदद करेगा और वैश्विक शिपिंग मार्गों में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा.

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पोर्ट ऑफ रिफ्यूज क्या होता है?

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज वो बंदरगाह, सुरक्षित जगह या पोर्ट होता है जहां कोई भी जहाज मुसीबत या खतरे में होने पर रुक सकता है. यहां वो अपने नुकसान की मरम्मत कर सकता है, माल को सुरक्षित कर सकता है और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. यानी ये जहाज के लिए एक तरह का इमरजेंसी पिटस्टॉप होता है, जिससे वो फिर से अपनी यात्रा जारी रख सके.
Port of Refuge जहाज़ को उन हालात से निपटने में मदद करता है जो उसकी सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हैं.

जहाज की संरचना में नुकसान होना, आग लग जाना, माल (cargo) का हिल जाना या गड़बड़ हो जाना, इन समस्याओं को समय पर संभालकर बड़े नुकसान या जहाज के पूरी तरह डूबने जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है. ज्यादातर बड़े समुद्री देशों में पोर्ट ऑफ रिफ्यूज की व्यवस्था पहले से है. लेकिन भारत में इसे अब तक औपचारिक रूप से स्थापित नहीं किया गया था. ऐसे में अदाणी पोर्ट्स की ये पहल भारत की 11 हजार किलोमीटर की तटरेखा और देश की इमरजेंसी समुद्री सेवाओं को और मज़बूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

ये बंदरगाह कहां मौजूद है?

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, अदाणी पोर्ट्स, जो भारत के कुल समुद्री कार्गो का लगभग 27% संभालता है, दो जगहों को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (PoR) के रूप में चुने हैं. पश्चिमी तट पर दिघी पोर्ट, ये अरबी सागर से आने-जाने वाले जहाजों और खाड़ी की ओर जाने वाले मार्गों के लिए मददगार रहेगा. इसके अलावा पूर्वी तट पर गोपालपुर पोर्ट पोर्ट ऑफ रिफ्यूज के तौर पर काम करेगा. ये बंगाल की खाड़ी से आने-जाने वाले जहाजों और मलक्का जलडमरूमध्‍य की ओर जाने वाले जहाजों को सपोर्ट करेगा, जो दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री रास्तों में से एक है और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक अहम मार्ग है.

इन दोनों पोर्ट ऑफ रिफ्यूज पर जहाजों को जरूरत पड़ने पर मदद दी जाएगी. जैसे कि जहाज को बचाना, डूबे हुए जहाज को हटाना, आग बुझाना, समुद्री प्रदूषण रोकना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद करना. अदाणी पोर्ट्स ने फाइलिंग में बताया कि इसके लिए विशेष उपकरण और प्रशिक्षित टीमें मौजूद रहेंगी.

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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