50 रुपये के नोटों की सप्‍लाई घटी! क्‍या तभी हो रही छुट्टे की दिक्‍कत? जानिए ₹10-20 के नोट बढ़े या कम हुए

RBI के 4 साल के आंकड़े इस बात की तस्‍दीक करते हैं कि साल-दर-साल जहां ₹10 के नोटों की सप्लाई तेजी से बढ़ी है, वहीं ₹50 के नोटों की सप्लाई इस साल अब तक कम रही है. बाकी का पेच अंदर समझ लीजिए.

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10, 20, 50 Rupee Note Crisis: 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये के नोट क्‍या बाजार से कम हो गए हैं? सरकार ने दी पूरी जानकारी

दिल्‍ली के मयूर विहार फेज-3 में रवि और उसके पिताजी पर्च्‍यून की दुकान पर कुछ छोटा-मोटा सामान लेने जाते हैं, सामान का बिल होता है, 720 रुपये का. राहुल या पिताजी के पास 500-500 रुपये के ही नोट हैं, कारण कि एटीएम से वही नोट निकले हैं. ऐसे में जब राहुल 500 के 2 नोट यानी 1,000 रुपये दुकानदार की ओर बढ़ाते हैं, तो दुकानदार उनसे तपाक से पूछ बैठता है- 20 रुपये खुल्‍ले हैं क्‍या? ताकि वो 100 और 200 रुपये के 1-1 नोट लौटा सके. पिता और राहुल ना में जवाब देते हैं तो वो बोलता है कि उसके पास 70 रुपये लौटाने के लिए 50 रुपये, 20 रुपये और 10 रुपये के नोट नही हैं. नोएडा सेक्‍टर 22 में राजीव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

हो सकता है कि आपने भी इस तरह की समस्‍या का सामना किया हो. खास तौर पर तब, जब किसी कारणवश यूपीआई ऐप काम नहीं कर रहा हो. तो क्‍या मार्केट से 10, 20 और 50 रुपये के नोट गायब हो गए हैं?

संसद में भी उठा सवाल?

देश के कई हिस्सों में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं. बैंकों में ये नोट आसानी से नहीं मिलते और एटीएम से भी छोटे नोट नहीं निकलते, ऐसी बात राज्यसभा में उठाई गई. सांसद बाबूभाई देसाई ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार को इस कमी की जानकारी है? क्या इसका असर छोटे व्यापारियों, ग्रामीण इलाकों और कमजोर तबकों पर पड़ा है? इस पर सरकार ने जो जवाब दिया, वो हमें, आपको और हर किसी को जानना चाहिए.

10 रुपये के नोट खूब छपे हैं, लेकिन 50 रुपये के नोटों की सप्‍लाई में गिरावट आई है.

सरकार ने बताया- कितने नोट छापे गए?

राज्यसभा में उठे सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि छोटे मूल्य के नोटों की छपाई और सप्लाई का आकलन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) लगातार करता है और जरूरत के मुताबिक नोट जारी किए जाते हैं. सरकार ने पिछले चार वित्त वर्षों के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि कितने नोट छापे गए. ₹10 के नोटों की सप्लाई में इस साल बड़ा उछाल दिख रहा है. 

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₹10 के नोट

  • साल 2022-23: 60.00 करोड़ नोट
  • साल 2023-24: 80.00 करोड़ नोट
  • 2024-25: 180.00 करोड़ नोट
  • 2025-26: 439.40 करोड़ नोट

₹20 के नोट

  • 2022-23: 199.99 करोड़ नोट
  • 2023-24: 200.00 करोड़ नोट
  • 2024-25: 150.00 करोड़ नोट
  • 2025-26*: 193.70 करोड़ नोट

₹50 के नोट

  • 2022-23: 200.00 करोड़ नोट
  • 2023-24: 250.00 करोड़ नोट
  • 2024-25: 300.00 करोड़ नोट
  • 2025-26*: 130.30 करोड़ नोट
साल-दर-साल जहां ₹10 के नोटों की सप्लाई तेजी से बढ़ी है, वहीं ₹50 के नोटों की सप्लाई इस साल अब तक कम रही है. हालांकि 2025-26 के आंकड़े 26 फरवरी 2026 तक के हैं. यानी वित्त वर्ष पूरा होते-होते करीब 2 महीने के आंकड़े जुड़ेंगे. 

एटीएम से निकलेंगे छोटे नोट?

RBI के मुताबिक, परंपरागत रूप से ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट एटीएम से नहीं निकाले जाते रहे हैं. हालांकि अब छोटे मूल्य के नोटों के लिए 'स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसर' के जरिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि धीरे-धीरे इस प्रोजेक्‍ट का विस्‍तार भी किया जा सकता है. यानी गांव-शहरों में जगह-जगह छोटे नोट वाले खास एटीएम नजर आ सकते हैं. 

जब कांग्रेस ने लिखा वित्त मंत्री को पत्र

कांग्रेस ने एक बार इस संबंध में वित्त मंत्री को पत्र लिखा था. करीब डेढ़ साल पहले सितंबर 2024 में लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस ओर ध्‍यान खींचना चाहा था.  टैगोर ने वित्त मंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा था, 'कई रिपोर्टों से पता चला है कि केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने छोटे नोटों की छापना बंद कर दिया है. इसके पीछे का कारण यूपीआई और कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है.'

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फिर छुट्टे की दिक्कत क्यों?

एटीएम से छोटे नोट नहीं निकलते हैं. बैंकों में सीमित उपलब्धता रहती है और सिक्कों पर ज्यादा निर्भरता बढ़ी है. कहा जा रहा है कि ऐसे में छोटे व्यापारियों, ग्रामीण इलाकों और रोजाना कैश लेन-देन करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.

आंकड़े बताते हैं कि छोटे नोटों की सप्लाई हो रही है, खासकर 10 रुपये के नोट बड़ी मात्रा में जारी किए गए हैं. लेकिन एटीएम से उपलब्धता सीमित होने और 50 रुपये के नोटों की अपेक्षाकृत कम सप्लाई की वजह से लोगों को 'छुट्टे की दिक्कत' महसूस हो रही होगी.

सरकार का कहना है कि छोटे वैल्‍यू के कैश की मांग, नोट और सिक्कों, दोनों के जरिए पूरी की जाती है. साथ ही डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी बढ़ा है.

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