कमाल की बात है! 5 करोड़ का निवेश और कमाई 35 करोड़! और अभी ज्यादा दिन भी नहीं हुए. और तो और 20 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला, ये कम बड़ी बात है क्या! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में जो जानकारी दी, उसे पढ़ते हुए आप भी एक बार को चौंक सकते हैं. दरअसल उन्होंने सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से शुरू हुए कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म 'भारत टैक्सी' (Bharat Taxi) के बारे में डिटेल में बताया. 5 फरवरी 2026 को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म की कमाई का फॉर्मूला भी बता दिया. हैरान होने की बात नहीं है, इस कहानी को आकार दिया है, 300 करोड़ के शेयर कैपिटल वाले 8 को-ऑपरेटिव सोसाइटीज ने. अब पूरी खबर पढ़ लीजिए विस्तार से.
5 करोड़ के मामूली निवेश से शुरू हुई कहानी
सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि 'भारत टैक्सी' प्लेटफॉर्म ने अब तक लगभग ₹5 करोड़ के मामूली निवेश के साथ ड्राइवरों के लिए ₹35 करोड़ से अधिक की आय पैदा की है. इस पहल ने अब तक करीब 20,000 ड्राइवरों और 200 सपोर्ट स्टाफ के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं. 300 करोड़ रुपये के अधिकृत शेयर कैपिटल के साथ, आठ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं ने मिलकर इसे तैयार किया है.
- भारत टैक्सी की शुरुआत: इसकी स्थापना यूं तो 6 जून, 2025 को हुई थी, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर 5 फरवरी, 2026 को लॉन्च किया गया था.
- कहां-कहां है सेवा: वर्तमान में यह सेवा दिल्ली-NCR (दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद) और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका जैसे शहरों में चालू है.
- अगली योजना: सरकार ने कहा है कि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका विस्तार चरणों में किया जाएगा.
ड्राइवरों का अपना प्लेटफॉर्म
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि भारत टैक्सी देश का पहला सहकारी (Cooperative) आधारित राइड-हैलिंग प्लेटफॉर्म है. यह ड्राइवरों को सशक्त बनाने और मोबिलिटी सेक्टर में समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस मॉडल में ड्राइवरों को 'सारथी' कहा जाता है और उन्हें ही स्वामित्व और निर्णय लेने के केंद्र में रखा गया है.
भारत टैक्सी यूं ही नहीं है खास
- नो कमीशन मॉडल: अन्य ऐप-आधारित कैब सेवाओं के उलट, भारत टैक्सी ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लेती है. यह एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करता है, जिससे ड्राइवर अपनी पूरी कमाई खुद रख सकते हैं.
- सस्ता सफर: यात्रियों से केवल दूरी और समय के आधार पर किराया लिया जाता है. इसमें कोई अतिरिक्त 'सुविधा शुल्क' (Convenience Fee) या 'सर्ज प्राइसिंग' (Surge Pricing) नहीं जोड़ी जाती.
- ड्राइवर भी पार्टनर: इस सहकारी समिति का सदस्य बनने के लिए ड्राइवरों को कम से कम एक शेयर खरीदना होता है, जिससे वे इसके हिस्सेदार बन जाते हैं और प्रबंधन के फैसलों में शामिल होते हैं.
गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस प्रोजेक्ट ने न केवल ड्राइवरों की आय बढ़ाई है, बल्कि उन्हें एग्रीगेटर-आधारित मॉडल (जैसे ओला-उबर) का एक स्थायी और सम्मानजनक विकल्प भी दिया है.














