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अमिताभ बच्चन ने अपनाई ये तरकीब और खा गए राजेश खन्ना का स्टारडम, प्रेम चोपड़ा का खुलासा काका खामोश, अकेले और परेशान रहने लगे थे

प्रेम चोपड़ा ने बताया कैसे राजेश खन्ना की खामोशी में उनका दर्द छिपा था और कैसे अमिताभ बच्चन ने बदलते वक्त के साथ खुद को ढालकर इंडस्ट्री में अपनी पकड़ मजबूत की.

अमिताभ बच्चन ने अपनाई ये तरकीब और खा गए राजेश खन्ना का स्टारडम, प्रेम चोपड़ा का खुलासा काका खामोश, अकेले और परेशान रहने लगे थे
जब अमिताभ के आने से राजेश खन्ना की चमक पड़ी फीकी!

बॉलीवुड में नंबर वन बनना मुश्किल है, लेकिन उस कुर्सी पर टिके रहना उससे भी बड़ा चैलेंज. 70 के दशक में यही खेल सबसे दिलचस्प मोड़ पर था. एक तरफ राजेश खन्ना जैसा सुपरस्टार, जिनके नाम पर भीड़ पागल हो जाती थी, दूसरी तरफ एक नया चेहरा तेजी से उभर रहा था, अमिताभ बच्चन. ये बदलाव अचानक नहीं था, लेकिन जिस तरह से हुआ, उसने इंडस्ट्री के सबसे बड़े नाम को भी असहज कर दिया. अब इसी दौर को लेकर दिग्गज एक्टर और बॉलीवुड के जाने माने विलेन प्रेम चोपड़ा एक ऐसा खुलासा किया है, जो सुपरस्टारडम की चकाचौंध के पीछे छिपे उस सन्नाटे को भी उजागर कर देता है, जिसके बारे में अक्सर कोई बात नहीं करता. उन्होंने बताया कि कैसे बदलते वक्त ने इंडस्ट्री में टॉप पर बैठे बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को झकझोर कर रख दिया था.

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जब ‘काका' की चमक धीमी पड़ने लगी

राजेश खन्ना बॉलीवुड में काका के निक नेम से मशहूर थे. उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री में एक जुमला बड़ा मशहूर था कि- ‘ऊपर आका और नीचे काका'.  प्रेम चोपड़ा ने याद किया कि राजेश खन्ना का दौर ऐसा था जब लड़कियां उनके पीछे पागल थीं. कहते हैं कि उनकी कार लिपस्टिक के निशानों से भर जाती थीं. लेकिन फिर समय के साथ काका की चमक फीकी पड़ने लगी और एक नया चेहरा तेजी से उभरा, ये चेहरा अमिताभ बच्चन का था. हालांकि राजेश खन्ना ने कभी खुलकर अपनी परेशानी जाहिर नहीं की, लेकिन उनके आसपास के लोग उनकी खामोशी में छिपा दर्द साफ महसूस कर सकते थे.

प्रेम चोपड़ा के मुताबिक, राजेश खन्ना ने कभी खुले तौर पर अपनी मुश्किलों की बात नहीं की. जब उनका करियर धीरे-धीरे नीचे आने लगा, तो उन्होंने चुप रहना ही बेहतर समझा. लेकिन जो लोग उनके करीब थे, वो आसानी से समझ सकते थे कि वो अंदर से काफी परेशान थे. उनकी खामोशी ही सब कुछ बयां कर रही थी.

स्टारडम से निराशा तक का सफर

प्रेम चोपड़ा ने उस दौर को एक कड़वी सच्चाई की तरह बयान किया. उन्होंने कहा कि जब तालियों की गूंज धीरे-धीरे खामोशी में बदलती है, तो सबसे ज्यादा असर दिल और दिमाग पर पड़ता है. राजेश खन्ना, जिन्हें कभी फैंस ने सिर आंखों पर बैठाया था, वही इस बदलाव से गहराई तक प्रभावित हुए. वो पहले से ज्यादा खामोश, अकेले और परेशान रहने लगे थे. हालांकि, इंडस्ट्री में ये एक आम पैटर्न है कि जब करियर अचानक ढलान पर आता है, तो कुछ कलाकार खुद को संभाल नहीं पाते और गलत आदतों की ओर बढ़ जाते हैं. राजेश खन्ना ने भी इस हालत में शराब में सहारा ढूंढना शुरू कर दिया जो धीरे-धीरे उनकी परेशानियों को कम करने के बजाय और बढ़ाता चला गया.

अमिताभ बच्चन ने कैसे बदला खेल

इसी बातचीत में प्रेम चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन की तारीफ करते हुए बताया कि उनका सफर दूसरों से अलग रहा. उन्होंने वक्त के साथ खुद को बदलना सीखा. जब उन्हें लगा कि अब वो फिल्म को अकेले कंधे पर नहीं उठा सकते, तो उन्होंने किरदारों का सिलेक्शन बदल दिया. प्रेम चोपड़ा के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने अपनी ताकत और कमजोरियों को समझा और उसी के हिसाब से काम करना शुरू किया. उन्होंने मजबूत और असरदार भूमिकाएं चुनीं और उसी में खुद को ढाल लिया. यही वजह है कि वो बदलते दौर में भी टिके हुए हैं. कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं होगा कि बॉलीवुड में तालियां सबको मिलती हैं, लेकिन लंबे समय तक वही गूंजती हैं जो वक्त के साथ चलना जानते हैं.

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