मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में अभिनेता से राजनेता बने विजय की फिल्म 'जन नायकन' को सेंसर सर्टिफिकेट देने के निर्देश वाले एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी. यह फैसला केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की अपील पर आया है, जो फिल्म की रिलीज को लेकर विवादों में घिरा हुआ है. कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन शामिल थे, ने यह अंतरिम राहत प्रदान की. अपील की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) ने सीबीएफसी की ओर से दलीलें पेश कीं. उन्होंने एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ मजबूत आधार बताते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड को फिल्म की सामग्री की जांच करने का पूरा अधिकार है और जल्दबाजी में सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश उचित नहीं है.
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बेंच ने इन तर्कों को सुनने के बाद आदेश पर रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की. इस दौरान दोनों पक्षों को अपनी दलीलें विस्तार से पेश करने का मौका मिलेगा. यह विकास विजय के प्रशंसकों के लिए एक झटका हो सकता है, जो लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे हैं. विजय, जो तमिल सिनेमा के सुपरस्टार हैं, अब राजनीति में भी सक्रिय हैं और उनकी फिल्में अक्सर सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होती हैं.
सीबीएफसी, जिसे आमतौर पर सेंसर बोर्ड कहा जाता है, फिल्मों को रिलीज से पहले प्रमाणित करता है ताकि वे सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त हों. बोर्ड कभी-कभी फिल्मों में कटौती या बदलाव सुझाता है अगर सामग्री में कोई आपत्तिजनक हिस्सा हो. इस मामले में, एकल न्यायाधीश ने पहले बोर्ड को सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया था, लेकिन अब हाई कोर्ट की बेंच ने इसे स्थगित कर दिया है.
यह फैसला फिल्म उद्योग में स्वतंत्रता और सेंसरशिप के बीच संतुलन पर बहस को फिर से छेड़ सकता है. कई फिल्मकार मानते हैं कि सेंसर बोर्ड के नियम कभी-कभी रचनात्मकता पर अंकुश लगाते हैं, जबकि बोर्ड का कहना है कि यह सार्वजनिक हित की रक्षा करता है. विजय की पिछली फिल्में जैसे 'मास्टर' और 'बीस्ट' ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था, और 'जन नायकन' से भी वैसी ही उम्मीदें हैं. लेकिन अब रिलीज की तारीख पर अनिश्चितता बनी हुई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि 21 जनवरी की सुनवाई निर्णायक होगी. अगर रोक बनी रही, तो फिल्म की टीम को और इंतजार करना पड़ सकता है. विजय के फैंस सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जता रहे हैं. यह मामला तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के बीच के रिश्ते को भी उजागर करता है, जहां विजय जैसे सितारे चुनावी मैदान में भी उतर चुके हैं. कुल मिलाकर, यह एक कानूनी लड़ाई है जो फिल्म की किस्मत तय करेगी.