दीवाली के बाद आती है छठ, जो सिर्फ एक त्योहार नहीं है बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक पर्व है. जिसकी तैयारी कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती है. हर जगह पर छठी मैया के गीत बजते हैं. बाजारों में रौनके लगती हैं. आज हम छठी माता के एक ऐसे ही गीत की बात करेंगे, जिसके बोल आपको इमोशनल कर देते हैं. गाने के बोल हैं, 'पहिले-पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर, करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार' इस गाने को शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज से सजाया. इस गाने के बोल ऐसे हैं कि पहली बार व्रत करने वाली महिला छठी मैया से अपनी गलतियों के लिए माफी मांग रही है. इसके आगे वो अपने बच्चों की खुशहाली, पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती है. नारियल, केला और सजे हुए घाट का जिक्र करते हुए यह गीत छठ पूजा की तैयारियों और परंपराओं को भी बयां करता है. यही वजह है कि शादी के बाद पहली बार छठ करने वाली महिलाओं के लिए इसके बोल खास मायने रखते हैं.
10 साल बाद शारदा सिन्हा ने रिलीज किए थे छठ के नए गीत
शारदा सिन्हा का ये गाना साल 2016 में आया था, उन्होंने करीब एक दशक के बाद छठ के दो नए गाने रिलीज किए थे. इनमें 'पहिले पहिल छठी मईया' और 'सुपवो ना मिले माई' शामिल थे. गाने को वीडियो के तौर पर रिलीज किया गया था, जिसे रिलीज करने में 20 दिन लगे थे. 'पहिले पहिल छठी मईया' करीब 6 मिनट 57 सेकंड का गाना है. इसे स्वर शारदा, चंपारण टॉकीज और नियो बिहार के बैनर तले तैयार किया गया था. इस वीडियो को अब तक यूट्यूब पर लगभग 8 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.
गाने में नजर आए थे ये कलाकार, नितिन नीर चंद्रा ने किया निर्देशन
छठ के इस गीत में एक्टर अभिनेता क्रांति प्रकाश झा और क्रिस्टीन जेडेक नजर आए थे. इसका डायरेक्शन नितिन नीर चंद्रा ने किया था. शारदा सिन्हा ने इस गीत के जरिए नई पीढ़ी को छठ की परंपरा से जोड़ने की कोशिश की थी. वीडियो में एक कपल को दिखाया जाता है जो विदेश में रहती है और छठ पर घर नहीं जा सकते हैं. घर पर छठ की पूजा कोई नहीं कर रहा होता है, ऐसे में वो अपनी बहू से इस व्रत को करने के लिए भी नहीं कह सकती हैं. और मन मार के छठ नहीं सेलीब्रेट करते हैं. ऐसे में उनकी बहू पहली बार छठ का व्रत रखती है और पहली बार व्रत में किसी तरह की गलती होने की माफी मांगती है.
शारदा सिन्हा एक ऐसी गायिका हैं, जिन्होंने अपनी आवाज में एक से बढ़कर एक लोकगीत दिए हैं. उनकी आवाज का जादू ऐसा है कि उनके निधन के बाद भी छठ के मौके पर उनकी आवाज घर-घर में सुनाई देती है.
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