राणाबाली में दिखेगा भारत का सबसे मुश्किल दौर, जब अकाल की वजह से गई थी 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान

राणाबाली की कहानी को लेकर अगर आप भी सोच में हैं तो बता दें कि ये कई साल पुरानी एक कहानी लेकर आ रही है. उस समय की जब ऐसा अकाल पड़ा था जब 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी.

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कौनसी कहानी लेकर आ रही है राणाबाली?
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नई दिल्ली:

विजय देवरकोंडा की फिल्म राणाबाली, जिसे माइथ्री मूवी मेकर्स बना रहे हैं, 2026 की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक होने वाली है. यह फिल्म एक हिस्टोरिकल ड्रामा है, जो भारत के इतिहास की उन सच्ची घटनाओं और अनसुनी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाएगी, जिनके बारे में बहुत कम बात की गई है. इसमें इतिहास के उन अध्यायों को दिखाया जाएगा जिन्हें लोग भूल चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के साथ विजय देवरकोंडा एक ऐसे पावरफुल किरदार में नजर आएंगे, जो एक गुमनाम इंसान की कहानी से प्रेरित है और जिसे पहचान मिलना वाकई जरूरी है.

फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद से ही इसे लेकर एक्साइटमेंट काफी बढ़ गई है. विजुअल्स को देखकर लग रहा है कि फिल्म की कहानी गुलाम भारत के दौर की है, जो काफी दमदार और इमोशनल होने वाली है. मेकर्स का मकसद सिर्फ मनोरंजन करना ही नहीं, बल्कि इतिहास की उन सच्चाइयों को सामने लाना है जिनसे बहुत से लोग आज भी अनजान हैं.

भीषण अकाल की कहानी लेकर आएगी राणाबाली

दिलचस्प बात यह है कि रणबाली का बैकड्रॉप भारतीय इतिहास के सबसे खतरनाक अध्यायों में से एक से जुड़ा है. यह कहानी उस भीषण अकाल की याद दिलाती है जिसमें 1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों की जान चली गई थी. यह फिल्म ब्रिटिश राज की उन क्रूर नीतियों को भी उजागर करती है, जिन्होंने भारत से लगभग 45 ट्रिलियन डॉलर्स की लूट की थी. सालों से इतिहासकार इन आंकड़ों पर बहस करते रहे हैं, लेकिन औपनिवेशिक नीतियों के उस विनाशकारी असर को कभी नकारा नहीं जा सकता.

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भारतीय इतिहास का सबसे काला दौर 1876 से 1878 के बीच का वह भीषण अकाल था. रायलसीमा में, जो अब आंध्र प्रदेश का हिस्सा है, बार-बार पड़ने वाले सूखे ने किसानों को पहले ही तोड़ दिया था. जब 1876 में मानसून नहीं आया, तो भुखमरी तेजी से फैल गई, लेकिन इसके बावजूद अनाज का एक्सपोर्ट (निर्यात) जारी रहा. इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी सर रिचर्ड टेम्पल ने खर्च कम करने के लिए सख्त पाबंदियां लगा दीं और अकाल शिविरों में राशन तक घटा दिया. अकेले रायलसीमा में लगभग सात लाख लोगों की जान चली गई, जबकि पूरे भारत में करोड़ों लोग मारे गए.

11 सितंबर को आएगी राणाबाली

यह त्रासदी सिर्फ एक कुदरती आपदा नहीं थी, बल्कि साम्राज्य के नाम पर बनाई गई नीतियों का नतीजा थी. और यही वो दुनिया है जिसमें राणाबाली की कहानी बुनी गई है. विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना स्टारर यह फिल्म उन छोटे-बड़े विद्रोहों को दिखाती है जो अकाल से जूझ रहे रायलसीमा में शुरू हुए थे. इन आंदोलनों में मजबूर लोगों ने जमा किया हुआ अनाज छीना, भारी टैक्स देने से इनकार किया और अपनी जान बचाने के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन ब्रिटिश रिकॉर्ड्स में उन्हें सिर्फ 'अपराधी' करार दिया गया. भले ही सरकारी दस्तावेजों में इनके नाम शायद ही कहीं मिलें, लेकिन रायलसीमा की लोककथाओं में अकाल और नाइंसाफी के खिलाफ खड़े हुए इन विद्रोहियों की यादें आज भी जिंदा हैं.

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राहुल सांकृत्यान के डायरेक्शन में बनी और टी-सीरीज के साथ मिलकर माइथ्री मूवी मेकर्स के वाई. रवि शंकर और नवीन यरनेनी द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म राणाबाली में रश्मिका मंदाना फीमेल लीड के तौर पर नजर आएंगी. रश्मिका और विजय देवरकोंडा की यह जोड़ी एक बार फिर साथ आ रही है, जो पर्दे पर काफी दमदार साबित होने वाली है. फिल्म में कई बड़े कलाकार शामिल हैं, जिनमें इंटरनेशनल एक्टर अर्नोल्ड वोस्लू का नाम भी जुड़ा है, जो इसे ग्लोबल लेवल पर और भी खास बनाता है. रणबाली 11 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है.

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