लता मंगेशकर जिसे स्वर कोकिला के तौर पर भी जाना जाता है, उन्होंने महज 5 साल की उम्र से ही संगीत का रियाज करना शुरू कर दिया था. उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे गीत गाए जो आज भी हमारे दिलों में बसते हैं. आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरमयी आवाज आज भी अमर है. हम आज आपको लता मंगेशकर के 68 साल पुराने एक ऐसे गाने के बारे में बताएंगे जो असम संस्कृति से जुड़ा हुआ था. इस गाने के बोल, संगीत और फिल्मांकन ने इस गाने को लोगों के बीच लोकप्रिय कर दिया था. कॉलेज और स्कूलो में लड़किया इस गाने पर खूब नाचती थी.
68 साल पुराना देसी गाना
बॉलीवुड की कई फिल्मों मे ऐसे गाने बने है जिनमें देसी संगीत और भाषा का इस्तेमाल किया गया था. इस लिस्ट में लता मंगेशकर का भी एक गाना शामिल है, जो असमी लोक गीत से जुड़ाव रखता है. ये गाना है साल 1958 में आई फिल्म मधुमती का गाना, जिसमें दिलीप कुमार और वैजयंती माला ने अभिनय किया था. गाने के बोल थे- चढ़ गयो पापी बिछुआ.
इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी सुरमयी आवाज से सजाया था. इस गाने में वैजयंती माला और दिलीप कुमार एक मेले में जाते हैं जहां पर इस गाने को फिल्माया जाता है. बिहू संगीत से प्रेरित इस गाने पर लड़कियां खूब नाचती थीं. गाने के बोल, संगीत और इसमें असमी लोक संगीत की झलक साफ दिखती है. लता मंगेशकर द्वारा गाए गए लोक गीतों में ये गाना टॉप लिस्ट में शामिल है. गाने के बोल-
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ओ बिछुआ हाय रे
पीपल छैयाँ बैठी पल-भर
हो भर के गगरिया हाय रे
हाय रे हाय रे हाय रे
होये होये होये
दैय्या रे, दैय्या रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
दैय्या रे, दैय्या रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
हाय हाय रे मर गयी
कोई उतारो बिछुआ