भारतीय सिनेमा की सबसे पसंदीदा और सदाबहार फिल्मों में से एक 'लगान' सचमुच हमारे दिलों में एक खास जगह रखती है. आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म में एक दमदार कहानी, बेहतरीन कलाकारों की फौज और कमाल का संगीत है. इस फिल्म की हर एक बात ने सालों से दर्शकों पर एक गहरी छाप छोड़ी है. जहां यह फिल्म अपने आप में एक मिसाल है, वहीं अब यह अपनी 25वीं सालगिरह के मौके पर 12, 13 और 14 जून को सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है. पुरानी यादों को ताजा करने वाले इस अनुभव के बीच, फिल्म का एक बेहद खूबसूरत ट्रेलर रिलीज किया गया है, जिसने इस ऐतिहासिक कहानी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने का उत्साह बढ़ा दिया है.
रिलीज किया गया लगान का ट्रेलर
'लगान' का यह ट्रेलर सच में वक्त में पीछे ले जाने वाले एक सफर की तरह है, जो हमें इस आइकॉनिक फिल्म से जुड़ी 25 साल पुरानी यादों में ले जाता है. पुरानी यादों और कभी न भूलने वाले पलों से भरा यह ट्रेलर बेहतरीन स्टोरीटेलिंग, ग्रामीण भारत, आजादी से पहले के दौर, ब्रिटिश राज और उन भावनाओं को खूबसूरती से समेटे हुए है जिन्होंने इस फिल्म को इतना खास बनाया था. यह देशभक्ति और जीत के गौरव के साथ-साथ प्यार, भाईचारे, प्रेरणा और कामयाबी के उन पलों को फिर से दिखाता है, जिसे रोंगटे खड़े कर देने वाले बैकग्राउंड म्यूजिक और सुरीले गानों ने और भी बेहतरीन बना दिया है. जहाँ इस ट्रेलर ने एक्साइटमेंट को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, वहीं 12, 13 और 14 जून को बड़े पर्दे पर इस मास्टरपीस को फिर से देखना दर्शकों के लिए एक बेहद शानदार अनुभव होगा.
साल 2001 में रिलीज हुई थी आमिर-ग्रेसी की लगान
साल 2001 में रिलीज हुई 'लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया' का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था. मुख्य भूमिका में आमिर खान स्टारर इस फिल्म में ग्रेसी सिंह, ब्रिटिश कलाकार रेचल शेली और पॉल ब्लैकथॉर्न, सुहासिनी मुले, कुलभूषण खरबंदा, राजेंद्र गुप्ता, रघुबीर यादव, राजेश विवेक, श्रीवल्लभ व्यास, राज जुत्शी, प्रदीप रावत, अखिलेन्द्र मिश्रा, दयाशंकर पांडेय, यशपाल शर्मा, अमीन हाजी, आदित्य लाखिया, जावेद खान और ए.के. हंगल जैसे कई कलाकार शामिल हैं. फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया था, जिसमें 'घनन घनन', 'मितवा', 'राधा कैसे ना जले', 'ओ रे छोरी' जैसे आइकॉनिक गाने शामिल हैं.
मध्य भारत के एक गांव के लोगों के इर्द-गिर्द घूमती कहानी
भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के उत्तर-विक्टोरियन काल के दौरान साल 1893 में सेट यह कहानी मध्य भारत के एक गांव के लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारी टैक्स और कई सालों के सूखे की मार झेल रहे होते हैं. तभी ब्रिटिश भारतीय सेना का एक घमंडी अधिकारी उन्हें टैक्स माफी की शर्त पर क्रिकेट मैच खेलने की चुनौती देता है. गांव वालों के सामने एक ऐसा खेल सीखने और उसमें जीत हासिल करने का बेहद कठिन काम होता है जिससे वे पूरी तरह अनजान थे.
जहां 'लगान' की कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में स्क्रीनिंग हुई और इसने ढेरों अवॉर्ड्स जीते, वहीं यह ऑस्कर (Academy Award for Best Foreign Language Film) के लिए नॉमिनेट होने वाली तीसरी और अब तक की आखिरी भारतीय फिल्म है. 49वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस फिल्म ने 'बेस्ट पॉपुलर फिल्म' समेत कुल आठ नेशनल अवॉर्ड्स अपने नाम किए थे.
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