जब 'टैगोर' के नाम पर फुटबॉल मैच हार गए दिलीप कुमार, बड़ा दिलचस्प है दो जिगरी दोस्तों का यह किस्सा!

'शोमैन' राज कपूर साहब और 'ट्रेजेडी किंग' दिलीप कुमार साहब दोनों अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनसे जुड़े रोचक किस्से हमें आज भी गुदुगदाते हैं. ऐसे ही कुछ किस्से दिवंगत ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा में दर्ज है, जिसका जिक्र हम अपनी इस स्टोरी में कर रहे हैं.

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ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार अनसुने किस्से
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Tragedy With Tragedy King: भारतीय सिनेमा के 'एक्टिंग के स्कूल' पुकारे जाने वाले दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़े कई किस्से मशहूर है, लेकिन शो मैन राज कपूर और ट्रेजेडी किंग दिलीप साहब के बीच के किस्से काफी रोचक हैं. यह किस्सा साल 1949 में रिलीज हुई फिल्म 'अंदाज' के दरम्यिान की है, जब ब्लॉक्टबस्टर फिल्म अंदाज में दो जिगरी दोस्त और एक्टर ने पहली बार स्क्रीन शेयर किया था. यह फिल्म उस समय की सबसे अधिक कमाई करने भारतीय फिल्म बनी थी.

महज 22 साल की उम्र में फिल्म 'ज्वार भाटा' से हिंदी सिनेमा में पर्दापण करने वाले लीजेंड्री एक्टर ने 27 की उम्र में ही स्टारडम पा लिया था, जब राज कपूर के साथ साल 1949 में रिलीज हुई उनकी फिल्म 'अंदाज' ब्लॉकबस्टर हिट रही थी. यह दिवंगत दिलीप साहब की चौथी फिल्म थी, जिसकी सफलता के बाद दोनों महान कलाकारों के बीच दोस्ती गहरी होती चली गई, जो फिल्म सेट और बाहर भी अपने चुटीले अंदाज के लिए मशहूर थी.

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मुंबई में चैरिटी मैच में हुई ट्रेजेडी किंग से साथ ट्रेजडी

किस्सा साल 1950 का है जब ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार और राज कपूर मुंबई में आयोजित एक चैरिटी मैच के लिए दो अलग-अलग टीमों के लिए फुटबॉल मैच खेल रहे थे और राज कपूर ने मैच में दिलीप कुमार को बड़े ही रोचक ढंग से हरा दिया. राज कपूर के मजाक का जब दिलीप साहब को पता चला तो वो भी अपनी हंसी रोक नहीं पाए. यह किस्सा दोनों कलाकारों की गहरी दोस्ती और मजाकिया अंदाज को दिखाती है.

शो मैन राज कपूर के बेटे दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने आत्मकथा में किया घटना का जिक्र
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ऋषि कपूर ने आत्मकथा में किया है किस्से का जिक्र

शो मैन राज कपूर के बेटे और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम-खुल्लाः ऋषि कपूर अनसेंसर्ड में इस किस्से का जिक्र किया है. 20 अप्रैल, 2020 में दुनिया को अलविदा कह चुके ऋषि कपूर की आत्मकथा में हुए जिक्र के मुताबिक 1950 के दशक में मुंबई में चैरिटी के लिए एक फिल्मी सितारों का फुटबॉल मैच रखा गया था. उनके पिता राज कपूर एक टीम के कप्तान थे और दिलीप कुमार दूसरी टीम के कप्तान थे. 

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दिलीप साहब की टीम मैच जीत रही थी और राज कपूर की टीम हारने की कगार पर थी.तभी हार को टालने के लिए राज कपूर को एक तरकीब सूझी. बीच मैच में दौड़ा लगाते हुए उनके पिता राज कपूर दिलीप कुमार तक पहुंचे फुसफुसाते बोले, 'यूसुफ, तुम्हें पता है? कवि रवींद्रनाथ टैगोर का निधन हो गया है!' यह सुनते ही दिलीप साहब बिल्कुल ठंडे पड़ गए.

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दिलीप साहब रविंद्रनाथ टैगोर के बहुत बड़े प्रशंसक थे

दिलीप साहब एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति के बहुत बड़े प्रशंसक थे. उनके निधन की बात सुनते ही वो गहरे सदमे आ गए और शोक में इतने डूब गए मैदान पर चल रहे फुटबॉल मैच को ही भूल गए. दिलीप साहब अपनी टीम के कप्तान थे और कप्तान के सुस्त होने से पूरी टीम ताश के पत्ते की तरह बिखर गई, जिसका फायदा उठाकर राज कपूर की टीम ने ताबड़तोड़ गोल दागे और चैरिटी मैच को जीत लिया.

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चैरिटी मैच जीतने के लिए दिलीप कुमार से झूठ बोला

मैच खत्म होने के बाद जब दिलीप साहब को राज कपूर के मजाक का पता चला, तो उन्होंने सिर पीट लिया. चैरिटी मैच साल 1950 में खेला जा रहा था, जबकि टैगोर का निधन साल 1941 में हो चुका था. राज कपूर ने मैच जीतने के लिए झूठ बोला था. राज कपूर के मजाकिया अंदाज से परिचित होने के बावजूद उनकी बातों में आने के लिए पहले दिलीप साहब अपने ऊपर खीजे और फिर राज कपूर को पकड़ने के लिए मैदान में दौड़ पड़े.

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राजकपूर और दिलीप कुमार के बीच हुआ एक और किस्सा भी बहुत मशहूर है. यह किस्सा फिल्म 'अंदाज' की शूटिंग के दौरान का है, जब राज कपूर ने बचपन के दोस्त दिलीप कुमार को एक सीन के दौरान बार-बार रीटेक लेने पर ताना मारा था. सीन में दिलीप साहब को हीरोइन को अंगूठी पहनानी थी, लेकिन वो नर्वस थे, जिससे उनके हाथ-पांप कांप रहे थे. 

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हीरोइन को अंगूठी पहनाते समय नर्वस हुए दिलीप साहब

फिल्म के एक सीन नमें अंगूठी पहनाने का सीन पर दिलीप साहब बार-बार रीटेक दे रहे थे. यह देख राज कपूर मजाक के मूड में आ गए और फिल्माए जा रहे सीन के बीच पहुंचे और दिलीप से बोले, 'युसुफ , इसे सिर्फ फिल्म की अंगूठी समझकर पहनाओ. अगर असली अंगूठी पहनाने की तमन्ना हो, तो वह बात अलग है.' राज कपूर की ये बात सुनकर दिलीप साहब झेंप गए और फिल्म सेट पर खड़े कैमरामैन से लेकर टेक्निशियन जोर-जोर से हंसने लगे.

एक तस्वीर में तीन लीजेंड देवानंद, राज कपूर और दिलीप कुमार के साथ
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फिल्म की हीरोइन के लिए उनके दिल में थी खास जगह

इस किस्से का दिलीप साहब की आत्मकथा 'दिलीप कुमारः द सब्सटेंस एंड दे शैडो के पेज नंबर 122-124 में बाकायदा जिक्र है. यही नहीं, इसका जिक्र वरिष्ठ पत्रकार बीके करणजिया की किताब 'बलंडर बस' में भी जिक्र किया गया है. आत्मकथा के मुताबिक दिलीप कुमार के दिल में फिल्म की हीरोइन के लिए एक खास जगह थी.

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Topics mentioned in this article
Dilip Kumar
Rabindranath Tagore
Raj Kapoor
Tragedy King