हिंदी सिनेमा में हर इमोशन के लिए आपको गाने मिल जाएंगे. आप प्यार मे हैं तो उसके लिए अलग गाना, दिल टूटा है तो अलग, इसी तरह हर इमोशन के लिए आपको बॉलीवुड मे गानों की लंबी लिस्ट मिल जाएगी. अगर आपको अपने मन की बात किसी को बतानी है तो आप उसे गाना डेडिकेट कर सकते हैं. जिससे सामने वाला आपके इमोशन्स को समझ पाएगा. मां-बाप से लेकर के भाई-बहनों के रिश्तों के लेकर भी लंबे गाने आपको मिल जाएंगे. आज हम आपको एक ऐसे ही विदाई गीत के बारे में बताएंगे जो 1989 में आया था, लेकिन आज भी हर विदाई में ये गाना बजा ही दिया जाता है.
जब बेटी की शादी के बाद विदाई होती है तो ये पल बहुत ही इमोशनल होता है. जिसमें आंसू खुद ब खुद निकल आते हैं. बेटी अपने पिता का घर छोड़कर अपने पति के घर जाती है.
कौन सा है गाना जो आज भी हर विदाई में बजता है
साल 1989 में आई फिल्म 'दाता' का फेमस गाना 'बाबुल का वो घर बहना' गाना इतना फेमस हुआ कि, तब से लेकर 37 सालों बाद भी ये आपको हर विदाई के वीडियो में सुनने को मिल जाएगा. ये बहुत ही लोकप्रिय विदाई गीत बन गया. इस गाने में पद्मिनी कोल्हापुरी और मिथुन चक्रवर्ती नजर आए हैं. इस गाने के बोल असद भोपाली ने लिखे थे, जिसे कल्याणजी-आनंद ने संगीत दिया. अल्का याग्निक और किशोर कुमार ने अपनी आवाज से इसे ऐसा सजाया कि सालों बाद भी ये गाना अपनी पहचान बनाए हुए है.
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37 सालों बाद भी हर विदाई में बजता है
1989 में आई फिल्म दाता का गाना 'बाबुल का ये घर बहना' को रिलीज हुए 37 साल हो गए हैं. लेकिन इस विदाई गीत ने अपनी ऐसी धाक जमाई की इतने साल बाद भी ये गाना विदाई गीतों में सबसे ज्यादा पसंद करने वाले गानों में से एक बना हुआ है. इसें एक भाई अपनी बहन को विदा करते हुए दुआएं देता है और समझाता है कि पिता का घर उसके लिए कुछ दिन का ही ठिकाना होता है.