इमरान खान के नाम पर आई चिट्ठी और टी20 वर्ल्डकप विवाद

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हिमांशु जोशी

भारत पाकिस्तान मुकाबलों के बीच क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पहचान और अहम का मुद्दा बन गया है. हाथ न मिलाने की घटनाएं, खिलाड़ियों पर ऑनलाइन हमले और स्थापित कमेंटेटर्स की बढ़ती चिंता यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या क्रिकेट अपनी पुरानी खेल भावना से दूर जा रहा है. दूसरी ओर इमरान खान के लिए पूर्व कप्तानों की अपील ने यह भी दिखाया है कि सरहदों से परे क्रिकेट अब भी इंसानियत की डोर से जुड़ा है.

टीम स्तर पर हैंडशेक विवाद और बदलती परंपराएं

हालिया टी20 वर्ल्ड कप 2026 में कोलंबो में खेले गए भारत-पाकिस्तान मुकाबले के दौरान पारंपरिक हैंडशेक को लेकर फिर चर्चा तेज हुई. भारतीय टीम ने टॉस और मैच से जुड़े औपचारिक पलों में हाथ मिलाने की परंपरा को सीमित रखा, जिसे कई रिपोर्ट्स में टीम की नीति बताया गया. इससे पहले एशिया कप 2025 में भी कुछ मुकाबलों के बाद पारंपरिक हैंडशेक न होने की बात सामने आई थी. क्रिकेट में मैच के बाद हाथ मिलाना लंबे समय से सम्मान का सूचक माना जाता रहा है, इसलिए इन घटनाओं ने खेल भावना पर नई बहस छेड़ दी है.

ऑनलाइन माहौल और खिलाड़ियों पर बढ़ता दबाव

सोशल मीडिया के दौर में खिलाड़ियों की हर छोटी हरकत अब बड़े विमर्श का हिस्सा बन जाती है. भारत पाकिस्तान मैच हों या अन्य टीमों के मुकाबले, इनके दौरान खिलाड़ियों को ऑनलाइन ट्रोलिंग और तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे खेल का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण दिखने लगता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने प्रतिस्पर्धा को भावनात्मक और राजनीतिक रंग देने में बड़ी भूमिका निभाई है. 2023 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने के बाद मिशेल मार्श को कप पर पैर रखने की वजह से जिस तरह ट्रॉल किया गया, वह वाकई चौंकाने था.

कमेंट्री और विश्लेषण में बदलते संकेत

क्रिकेट विश्लेषकों और पूर्व खिलाड़ियों ने कई मौकों पर यह चिंता जताई है कि भारत पाकिस्तान मुकाबलों को युद्ध जैसी भाषा में पेश किया जाना खेल के मूल आनंद को प्रभावित करता है.
 हर्षा भोगले ने अपने यूट्यूब चैनल पर भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुझे नहीं पता कि यह बात कहना सही है या नहीं, लेकिन सच यह है कि इस बार भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर मैं उतना उत्साहित नहीं हूं. आप कह सकते हैं कि ‘सच में?' क्योंकि हमने ऐसे कई मैच देखे हैं, जहां दिल में एक अजीब सा एहसास होता था कि आगे क्या होने वाला है. उम्मीदें ऊपर जाती थीं, फिर गिरती थीं, कभी खुशी होती थी तो कभी निराशा. हर गेंद के साथ भावनाओं का रोलर-कोस्टर चलता था, आप सीट के किनारे बैठे रहते थे और फिर नतीजा स्वीकार कर आगे बढ़ जाते थे. आसान नहीं था, लेकिन खेल आगे बढ़ता रहता था.
लेकिन इस बार मुझे डर है कि हमारा प्यारा खेल बड़े आर्थिक और राजनीतिक हितों का बंधक बनता जा रहा है. इसे राजनीतिक खेल के लिए एक तीर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. 

इमरान खान के लिए पूर्व कप्तानों की अपील, सरहद पार खेल भावना

दूसरी ओर क्रिकेट ने एक अलग तस्वीर भी दिखाई दी है. इमरान खान की सेहत और जेल में हालात को लेकर दुनिया भर के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखकर बेहतर इलाज और मानवीय व्यवहार की मांग की. इस सूची में भारत के सुनील गावस्कर और कपिल देव समेत कई देशों के पूर्व कप्तान शामिल हैं. यह अपील खेल भावना और इंसानियत के आधार पर उठाया गया कदम है, जिसने यह संकेत दिया है कि मैदान की प्रतिद्वंद्विता के बावजूद खिलाड़ियों के बीच मानवीय जुड़ाव अब भी मौजूद है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उससे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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