भोपाल के कलियासोत डैम में अब क्यों नहीं आते हैं प्रवासी पक्षी, कौन बिगाड़ रहा है उसका इको सिस्टम

विज्ञापन
आशीष कोलारकर

भोपाल को झीलों का शहर कहा जाता है, और इन्हीं में से एक खूबसूरत धरोहर है कलियासोत डैम.कहा जाता है कि राजा भोज ने जब भोपाल के आसपास झीलें और जलाशय बनवाए, तो एक गोंड आदिवासी कालिया गोंड ने उन्हें बेतवा नदी में पानी लाने के लिए उपयुक्त स्थान ढूंढने में मदद की थी. इसी कालिया की याद में इस डैम का नाम कालियासोत पड़ा. जिसे लोग अब कलियासोत डैम के नाम से भी बुलाते हैं. यह डैम सदियों से भोपाल और रायसेन जिले को खेती के लिए पानी का प्रमुख  स्रोत रहा है.

कालियासोत डैम भोपाल शहर के बाहरी इलाके में स्थित है. यह चूना भट्टी गांव के पास कलियासोत नदी पर बना हुआ है, जो बेतवा नदी की एक सहायक नदी है. यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करते हैं.

कालियासोत डैम का इको सिस्टम

कालियासोत डैम का पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) बहुत समृद्ध है. यहां हरे-भरे शैवाल, आक, सतावर, गोखरू, मरोड़ फली और लाइकेन जैसी वनस्पतियां पाई जाती हैं.पक्षियों की दुनिया तो और भी रंगीन है. यहां भारतीय रोलर, ग्रे फ्रैंकोलिन, घरेलू गौरैया, छोटी नीली किंगफिशर, बगुला, भारतीय रॉबिन, जलकाग और घरेलू कौआ जैसे कई पक्षी देखे जा सकते हैं. सर्दियों में प्रवासी पक्षी भी यहां आते थे, लेकिन अब प्रदूषण के कारण उनकी संख्या कम हो गई है.

कालियासोत डैम से सूर्योदय का नजारा.
Photo Credit:  Mahesh Joshi

 कालियासोत डैम के मगरमच्छ

वन विभाग और शोधकर्ताओं द्वारा किए गए हाल के अवलोकनों में कालियासोत डैम के किनारों और शांत जल वाले हिस्सों में मगरमच्छों के रहने के संकेत मिले हैं. स्थानीय लोगों और मछुआरों ने भी कभी-कभी पानी में मगरमच्छों की उपस्थिति की पुष्टि की है. ये मगरमच्छ ज्यादातर छिपने वाले और शांत रहने वाले होते हैं और आमतौर पर मनुष्यों से दूर रहते हैं.

कालियासोत डैम के पास स्थित विश्वनाथ मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. यह मंदिर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को आध्यात्मिक शांति से जोड़ता है और स्थानीय लोगों एवं पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है. विश्वनाथ मंदिर कलियासोत डैम के शांत जल और हरे-भरे परिवेश के बीच बना हुआ है. जब आप मंदिर के प्रांगण में खड़े होते हैं, तो सामने डैम के विस्तृत जलराशि का नजारा, पृष्ठभूमि में हरियाली और आसमान में उड़ते पक्षियों का कलरव एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है. मंदिर की पवित्रता और प्रकृति की सुंदरता का यह संगम मन को अवर्णनीय शांति से भर देता है.

कलियासोत पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा

दुर्भाग्य से, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और मानवीय गतिविधियों के कारण कालियासोत का पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है.इसके प्रमुख कारण हैं-

Advertisement
  • कचरा फेंकना: प्लास्टिक, पॉलीथीन, पूजा सामग्री  और अन्य कचरे का जलाशय में फेंका जाना
  • जल प्रदूषण: नालों का गंदा पानी और मूर्ति विसर्जन से पानी दूषित हो रहा है
  • अतिक्रमण और अवैध निर्माण
  • मछलियों का अत्यधिक शिकार

इन सबके कारण डैम के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है. इस वजह से पक्षी और अन्य जीव-जन्तु यहां पर कम दिखाई देने लगे हैं. प्रकृति हमारी धरोहर है, इसे बचाना हम सब की जिम्मेदारी है. हम ये छोटे-छोटे कदम उठाकर कालियासोत को फिर से हरा-भरा बना सकते हैं-

  • कचरा कूड़ेदान में ही डालें.
  • प्लास्टिक के उपयोग से बचें.
  • मूर्ति विसर्जन के वैकल्पिक तरीके अपनाएं.
  • लोगों को जागरूक करें और साफ-सफाई अभियानों में भाग लें.

ये भी पढ़ें: 8-10 KM लंबा जाम, कार-सड़कों पर कट रही रात... मनाली जाने से पहले पर्यटकों की परेशानियां पढ़ लीजिए

Advertisement
Topics mentioned in this article