Web3: क्या सातोशी नाकामोटो के बिना बंदूक वाले क्रांतिकारी बना पाएंगे बराबरी वाली दुनिया

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शुभ्रांशु चौधरी

एक लोकतांत्रिक मीडिया कार्यकर्ता के रूप में मुझे हमेशा 'डेमोक्रेटिक फाइनेंस' यानी लोकतांत्रिक वित्त के प्रयोगों में रुचि रही है. इसकी शुरुआत 2009 में रहस्यमयी तकनीकी विशेषज्ञ सातोशी नाकामोटो ने की थी. उन्होंने ब्लॉकचेन तकनीक बनाई थी, ऐसा कहा जाता है. लेकिन आज तक उनकी असली पहचान किसी को नहीं पता.

ब्लॉकचेन/वेब3 का वादा था कि यह एक ज्यादा बराबरी वाली दुनिया बनाएगा, जहां पैसों का लेन-देन बिना किसी केंद्रीय बैंक के, सीधे लोगों के बीच हो सके. यह इतना बड़ा और क्रांतिकारी विचार था कि डर था कि कहीं मौजूदा व्यवस्था के फायदे उठाने वाले लोग इस विचार से जुड़े लोगों को नुकसान न पहुंचाएं. सातोशी नाकामोटो जैसे लोग आज भी गुमनाम हैं. 

क्या ब्लॉकचेन से फ्राड होता है

इथेरियम फाउंडेशन के DevConnect सम्मेलन में भाग लेने के लिए जब मुझे स्कॉलर के रूप में बुलावा मिला तो मैंने तुरंत हामी भर दी. इथेरियम, ब्लॉकचेन पर बना एक प्लेटफॉर्म है. इसका उद्देश्य वित्त से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों में भी इस तकनीक का उपयोग करना है.

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना रुख बदला है. इससे यह विषय और भी चर्चा में आ गया है. अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने ब्लॉकचेन को 'हवा-हवाई' कहा था, लेकिन अब वे अमेरिका को 'दुनिया की क्रिप्टो राजधानी' बनाना चाहते हैं.

ट्रंप परिवार की कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल क्रिप्टो क्षेत्र में काम करती है. पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के संपर्क में है, जो पाकिस्तान को एशिया की क्रिप्टो राजधानी बनाना चाहता है. अमेरिका-पाकिस्तान के हालिया करीबी रिश्तों को इससे जोड़कर भी देखा जा रहा है.

मेरे एक मित्र वेब3 के जानकार हैं. वो इसमें निवेश भी कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ''इस सम्मेलन में 90 फीसदी लोग ठग ही मिलेंगे.'' भारतीय मीडिया में भी मैंने अब तक क्रिप्टो से जुड़ी ज्यादातर खबरें घोटालों की ही पढ़ी थीं. 

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सम्मेलन के लिए अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स को इसलिए चुना गया था क्योंकि वहां 20 फीसदी से ज्यादा लोग क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं. अर्जेंटीना की मुद्रा पेसो की हालत खराब है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसका मूल्य बहुत कम है.

'चे ग्वेरा' के देश में क्रिप्टो करेंसी

हवाई अड्डे से निकलते ही मैंने माराडोना और मेसी के पोस्टर देखने की उम्मीद की थी, लेकिन वहां साथ में क्रिप्टो के पोस्टर भी दिखाई दिए. फ़ुटबाल के अलावा अर्जेंटीना को अंतरराष्ट्रीय क्रांति के पोस्टर बॉय 'चे ग्वेरा' के देश के रूप में भी जाना जाता है. स्कॉलर्स हॉस्टल में पहले मेरी मुलाकात अमेरिका के लीहाई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैंक कॉर्थ से हुई.वो अपने छात्रों को ब्लॉकचेन पढ़ाते हैं. उन्होंने कहा,''अब सवाल यह नहीं है कि क्रिप्टो अमेरिका में मुख्यधारा बनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि कब बनेगा. इसका असर आपके जैसे देशों पर भी पड़ेगा.'' सम्मेलन स्थल पर जबरदस्त ऊर्जा थी. मुझे लगा कि यहां मौजूद 90 फीसदी लोग ठग नहीं हो सकते हैं.

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वहां हो रही तकनीकी चर्चाएं मेरी समझ से बाहर थीं, लेकिन वेब डेवलपर्स का उत्साह साफ दिख रहा था. मैं इतना ही समझ पाया कि वे सभी सातोशी की तकनीक के ऊपर नए-नए उपकरण बनाने की बातें कर रहे हैं. 40 से ज्यादा देशों से 90 स्कॉलर आए थे.इनमें भारतीय सबसे ज्यादा थे. कई छात्र अपने पैसे से टिकट खरीदकर आए थे, उम्मीद में कि हैकाथॉन जीतकर खर्च निकाल लेंगे. भारतीय प्रतिभागियों ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा है कि देशों को क्रिप्टो से जुड़ने की तैयारी करनी होगी, चाहे वे इसे पसंद करें या नहीं.

सम्मेलन के लिए अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स को इसलिए चुना गया था क्योंकि वहां 20 फीसदी से ज्यादा लोग क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं.
Photo Credit: Ethereum Foundation

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जब मैंने कहा कि मैंने भारतीय अखबारों में सिर्फ क्रिप्टो घोटालों के बारे में पढ़ा है, तो उन्होंने जवाब दिया,''हर नई तकनीक में शुरू में गलत लोग आते हैं, लेकिन सरकार का थोड़ा सहयोग मिले तो हालात बदल सकते हैं.'' उन्होंने सुझाव दिया आप यहां ReGen स्टॉल भी देखिए.

मैंने DeFi (विकेंद्रीकृत वित्त) और TradFi (पारंपरिक वित्त) के बारे में सुना था, लेकिन ReFi (रीजनरेटिव फाइनेंस) नया था. साथ ही DeSci (विकेंद्रीकृत विज्ञान) के स्टॉल भी थे. 

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क्या ब्लॉकचेन को आसान बनाएगा AI

हिप्पी जैसे दिखने वाले हॉलैंड निवासी किट ब्लेक ने कहा,''जब अच्छे इरादों वाले लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं, तो मैं ध्यान देता हूं.'' क्रिप्टो सम्मेलन में इन नए तरह के 'हिप्पी' देखना दिलचस्प था. इनमें से कुछ चे ग्वेरा वाली टी शर्ट भी पहने हुए थे. वे जंगल बचाने, कॉफी सहकारी समितियों और विज्ञान के लिए विकेंद्रीकृत फंडिंग जैसे विषयों पर बात कर रहे थे. वे सीमाओं से मुक्त दुनिया और मुद्रा की कल्पना कर रहे हैं.बातें रोमांटिक लगीं, लेकिन सकारात्मक भी. कम से कम ये लोग सोच तो रहे हैं, ये अच्छा लगा.

अंत में मैंने AI और Web3 पर चर्चाएं सुनीं. कहा गया कि AI अभी केंद्रीकृत (Centralized) है, ब्लॉकचेन उसे विकेंद्रीकृत (Decentralized) बना सकता है और AI ब्लॉकचेन को आम लोगों के लिए आसान बना सकता है.

सम्मेलन में घोषणा हुई कि अगला DevConnect मुंबई में होगा. यह आश्चर्यजनक था, क्योंकि भारत में क्रिप्टो नियमन अभी स्पष्ट नहीं हैं. कहा गया कि जल्द ही भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा ब्लॉकचेन डेवलपर होंगे. मुझे लगा कि वे अभी भी सातोशी के मूल सपने से दूर हैं. सम्मेलन में 15 हजार लोग थे—कौन जाने सातोशी भी उनमें हों. यह जानकर अच्छा लगा कि एथेरियम फाउंडेशन अब भी एक गैर-लाभकारी संस्था (एनजीओ) है.

क्या बन सकती है बराबरी वाली दुनिया

मानव सभ्यता ने राजनीतिक लोकतंत्र हासिल किया है. डॉक्टर आंबेडकर ने कहा था कि राजनीतिक लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के अन्य क्षेत्र भी लोकतांत्रिक बनेंगे. लोकतांत्रिक मीडिया का काम अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन लोकतांत्रिक वित्त में जो ऊर्जा दिखी, वह उत्साहजनक थी. जैसे हम उम्मीद करते हैं कि AI मीडिया को लोकतांत्रिक बना सकता है, वैसे ही AI वेब3 को आम लोगों के लिए सरल बना सकता है.

इस सम्मेलन में जाकर मुझे लगा कि बराबरी की दुनिया बनाने का दावा करने वाली इन तकनीकों को नजरअंदाज करना गलत होगा. इन्हें व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशें होंगी, लेकिन ये लोग सच में 'बिना बंदूक वाले क्रांतिकारी', जैसे लगते हैं. इक्कीसवीं सदी के चे ग्वेरा?

डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. वो लोकतांत्रिक मीडिया के प्रयोग सीजीनेट स्वर और छत्तीसगढ़ में नई शांति प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं. इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है. 

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