नक्सलवादियों के सफाए के बाद अब सरकार देश के अंदरूनी दुश्मन नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कितनी तैयार है? नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को तबाह करने की साजिश भी है. पंजाब के डेरा बस्सी, मोहाली और चंडीगढ़ में समाजसेवकों, शिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों से हालिया बातचीत में एक बात साफ हुई कि सीमावर्ती राज्यों में नशे का जाल तेजी से फैल रहा है. हालात बेहद चिंताजनक हैं. पहले लगता था कि हालत सिर्फ पंजाब में ही खराब हैं. लेकिन ताजा जानकारी के मुताबिक, नशे के कारोबार ने बहुत सारे राज्यों में स्थिति बेहद नाजुक बना दी है.
सुखद ये है कि नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार के बाद अब केंद्र सरकार देश के अंदरूनी दुश्मन- नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. यह समस्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक है. युवा पीढ़ी को व्यवस्थित रूप से तबाह करने वाली एक बड़ी साजिश भी है. मोदी सरकार का रुख इस मसले पर बिल्कुल साफ है. वह कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है. सरकार नशे के सौदागरों से निर्णायक लड़ाई लड़ने के मूड में है.
नशे के सौदागरों पर सीधा हमला
नक्सलवाद को नियंत्रित करने के बाद मोदी सरकार ने नशे के माफिया के खिलाफ अभियान को नई गति दी है. गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडीकेट पर सीधा प्रहार करने की रणनीति तैयार की जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल पर कई राज्यों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू की गई है. सभी एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए नारको समन्वय केंद्र का गठन किया गया है. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो पूरे देश में ड्रग्स से संबंधित मामलों की निगरानी और कार्रवाई का प्रमुख केंद्र बनी हुई है.
सरकार ने विदेशी ड्रग तस्करों को भारत लाकर सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक प्रत्यर्पण व्यवस्था शुरू कर दी है. सीमाओं पर बाड़बंदी को मजबूत किया जा रहा है, अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी (ड्रोन, सैटेलाइट और AI-बेस्ड सिस्टम) बढ़ाई जा रही है. इन कदमों से तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिल रही है.
कहां कहां से भारत आता है ड्रग
भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी मुख्य रूप से दो अंतरराष्ट्रीय रूट्स से हो रही है, जो युवा शक्ति को नष्ट करने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा बन चुके हैं. पहला गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) से सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे मेथामफेटामाइन) की भारी आपूर्ति हो रही है. दूसरा गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान) से अफीम, हेरोइन और अन्य ओपिओइड्स की तस्करी बढ़ी है.
ये दोनों गलियारे न सिर्फ भारत की सीमाओं को भेद रहे हैं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ मिलकर युवाओं को नशे की लत में धकेलने का काम कर रहे हैं. नशे का यह काला कारोबार देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ अपराध, हिंसा और सामाजिक विघटन को भी बढ़ावा दे रहा है.
कैंब्रिज प्रिज्म्स जर्नल में प्रकाशित 2024 के एक सर्वे ने युवाओं की स्थिति की भयावह तस्वीर पेश की है. देश के 15 राज्यों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले 1,630 युवाओं पर किए गए अध्ययन में सामने आया--
- 26.4 फीसदी युवा तंबाकू का सेवन कर रहे हैं.
- 26.1 फीसदी शराब पीते हैं.
- -9.5 फीसदी गांजा (कैनाबिस) का इस्तेमाल करते पाए गए.
- 22.2 फीसदी युवा एक से अधिक नशीले पदार्थों के आदी हैं.
- 29.5 फीसदी युवा सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं.
ये आंकड़े चिंताजनक हैं.ये आंकड़े युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति, सामाजिक परिवेश की गिरावट और भविष्य की कमजोरी को उजागर करते हैं.
पंजाब से केरल-हिमाचल तक फैलता जहर
पंजाब की भयावह स्थिति तो पूरे देश को मालूम है, जहां नशे ने पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया है. लेकिन अब यह जहर तेजी से अन्य राज्यों में भी फैल रहा है, खासकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में. हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन में भारी वृद्धि हुई है. हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इस मुद्दे पर कई बार चेतावनी दी थी. जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हिमाचल प्रदेश अगले पांच सालों में 'उड़ता पंजाब' बन सकता है. उन्होंने राज्य में डी-एडिक्शन सेंटर्स की कमी की ओर इशारा करते हुए युवाओं को बचाने के लिए पुनर्वास केंद्रों की जरूरत बताई थी. इसके साथ ही उन्होंने पंचायतों, अभिभावकों और युवाओं से अपील की थी कि वे इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाएं.वहीं तटीय राज्य केरल में पिछले चार सालों में एनडीपीएस एक्ट में दर्ज मामलों में 130 फीसदी की भारी बढ़ोतरी देखी गई है. (37,228 से बढ़कर 87,101). राज्य का लंबा समुद्री तट तस्करों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन गया है.
क्या 2047 तक नशामुक्त हो पाएगा भारत
नशा मुक्त भारत का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं है. जब नक्सलवाद जैसी जटिल समस्या पर काबू पाया जा सकता है, तो नशे के इस माफिया को भी कुचला जा सकता है. केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, राज्यों का पूर्ण सहयोग और जनता की जागरूकता से 2047 तक भारत को नशा मुक्त किया जा सकता है. गृह मंत्री अमित शाह का साफ संदेश है 'न तो एक ग्राम नशीला पदार्थ भारत में घुसने दिया जाएगा और न ही भारतीय भूमि को किसी अन्य देश के लिए ट्रांजिट रूट बनने दिया जाएगा'. सख्त कार्रवाई, बिना किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप और देश के सामूहिक प्रयास से इस जंग को जीता जा सकता है.
(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अलग-अलग विषयों पर लेख लिखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)














