एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो...यूपी सिर्फ विकास नहीं कर रहा, वो त्रासदियों को जवाब दे रहा है!

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प्रो. दीप्ति तनेजा

राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रबल हो तो राज्य को नक्शे की सीमाओं से निकलकर विचार बनते देर नहीं लगती, जैसा कि आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है. यह राज्य आज जीवंत, स्पंदित और संकल्पशील दिखाई देता है तो इसलिए कि यहां हर मोड़ पर नवाचार और निश्चय की छाप दिखती है. यह परिवर्तन दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का वह सशक्त परिणाम है, जो आने वाली पीढ़ियों की मजबूत आधारशिला बनेगा. जेवर की धरती पर उठता हुआ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक्सप्रेस-वे का फैलता हुआ जाल, लखनऊ और कानपुर की धमनियों में दौड़ती मेट्रो ये केवल स्टील और कंक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं. ये उस सामूहिक आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं, जो करोड़ों लोगों के भीतर दशकों से दबी पड़ी थी और जो आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच की वजह से अपने साकार रूप में आकर विकसित उत्तर प्रदेश की सशक्त बुनियाद बनने जा रही हैं.

उत्तर प्रदेश वह राज्य है जिसकी मिट्टी ने गंगा-यमुना की सभ्यता को सींचा, जिसके आंगन में बुद्ध की करुणा और कबीर की फक्कड़ी एक साथ पली, जिसके खेतों से उठे किसानों ने स्वाधीनता संग्राम की लौ को जलाए रखा. लेकिन स्वतंत्रता के बाद के दशकों में यही राज्य एक विरोधाभास का प्रतीक बन गया. विशाल जनशक्ति और अपार संसाधनों के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ा, राजनीतिक उठापटक में उलझा और पलायन की पीड़ा को चुपचाप सहता रहा. लेकिन पिछले नौ वर्षों में इसी राज्य ने अपने परिदृश्य को बदला है. अपने प्रति देश-दुनिया में गहरे तक धंसी भ्रांतियों से मुक्ति पाई और इसीलिए इस परिवर्तन को समझना, परखना और उससे सवाल करना, तीनों एक साथ जरूरी हैं.


राजनीतिक इच्छाशक्ति ने बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश... यह नाम सुनते ही कुछ वर्ष पहले तक जो तस्वीर मन में उभरती थी, वह अव्यवस्था, पलायन, जातीय समीकरणों की राजनीति और विकास की अनंत प्रतीक्षा की थी. लेकिन आज जब इस राज्य की चर्चा होती है, तो बात जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की होती है. गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वेज की होती है. लखनऊ और कानपुर मेट्रो की होती है. यह परिवर्तन महज एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता है, जो जमीन पर दिख रही है, जो आंकड़ों में प्रकट हो रही है और जो उस आम नागरिक की आंखों में पूरी होती उम्मीदों के रूप में देखी जा सकती है. यह परिवर्तन एक रात में नहीं हुआ. इसकी जड़ें उस राजनीतिक इच्छाशक्ति में हैं, जो केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्रियान्वयन तक भी पहुंची. आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं. उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 2017 में 13.30 लाख करोड़ था जो आज 36 लाख करोड़ के करीब है. राज्य ने अपने आप को देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है और वर्ष 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है. यह कोई हवाई महत्वाकांक्षा नहीं, यह उस बुनियाद पर टिकी योजना है जो जेवर से लेकर पूर्वांचल तक बिछाई जा रही है.

एक्सप्रेस-वे पर अवसरों की रफ्तार

जब किसी राज्य में एक्सप्रेस-वे का जाल बिछता है, तो यह केवल सड़कें नहीं बनतीं, उन सड़कों पर अवसरों की आवाजाही होती है. आज देश के एक्सप्रेस-वे का 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने जा रहा है. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 341 किलोमीटर की लंबाई लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ती है, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे 296 किलोमीटर में फैला है, और गंगा एक्सप्रेस-वे, जो 594 किलोमीटर लंबा होगा, देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बनने की ओर अग्रसर है. जब एयरपोर्ट का निर्माण होता है, तो केवल रनवे नहीं बनता, एक क्षेत्र की आकांक्षाएं उड़ान भरती हैं. जेवर हवाई अड्डा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा, लगभग 29,560 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा है. पूर्णतः निर्मित होने पर यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा और प्रतिवर्ष सात करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा. यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं है. यह इस बात का प्रतीक है कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तत्पर है.

आर्थिक शक्ति में बदलती विशाल जनसंख्या

किसी भी राज्य की विकास यात्रा को समझने के लिए केवल परियोजनाओं की गणना पर्याप्त नहीं होती. यह समझना भी जरूरी है कि इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक संदर्भ क्या है. उत्तर प्रदेश, जो देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां 25 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति को अब धीरे-धीरे आर्थिक शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. देश-विदेश के निवेशक इसे अब सुरक्षित गंतव्य मानते हैं तो उन्हें यहां की कनेक्टिविटी भी आकर्षित करती है. उद्योगों का बढ़ना रोजगार का सबसे बड़ा आधार है. जब राज्य का युवा पलायन करने के बजाय अपने जिले में ही उद्योग और रोजगार की संभावना देखने लगे, तो यह सबसे बड़ा परिवर्तन है. डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाएं सिर्फ औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि उस पलायन की त्रासदी का उत्तर है जो दशकों से प्रदेश को खोखला कर रही थी. मेट्रो और एमआरटीएस की बात करें तो यह केवल शहरी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि एक मानसिकता का परिवर्तन है. मेट्रो और एमआरटीएस केवल यातायात के साधन नहीं, ये उस आधुनिक उत्तर प्रदेश की रीढ़ हैं जो अपने नागरिक को यह अहसास दिलाना चाहता है कि वह किसी महानगर से कम नहीं. किसी शहर में मेट्रो दौड़ती है, तो केवल यातायात की समस्या हल नहीं होती, उस शहर के नागरिक का आत्मसम्मान भी बदलता है.

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साहस की परीक्षा दे रहा उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश का यह दौर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां संभावनाएं असीमित हैं और जिम्मेदारियां भी उतनी ही विशाल. इतिहास उन्हीं क्षणों को याद रखता है जब कोई समाज अपनी नियति को स्वयं गढ़ने का साहस करता है. उत्तर प्रदेश आज उसी साहस की परीक्षा दे रहा है. वह केवल वर्तमान को नहीं बदल रहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए नींव रच रहा है. यह भारत के उस केंद्र का जागरण है जिसे सदा से शक्ति का स्रोत माना गया है. अब बड़ी चुनौती यह सिलसिला बनाए रखने की है क्योंकि अनवरत प्रक्रिया ही विकास की मूल इकाई है.