बिहार विधान परिषद में मंगलवार के दिन भारी हंगामा हुआ. मंत्री अशोक चौधरी और राजद के MLC सुनील सिंह के बीच सदन में तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद राजद सदस्य वेल में पहुंच गए. विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राबड़ी देवी पर की गई टिप्पणी का विरोध कर रहा था और कानून‑व्यवस्था पर CM से इस्तीफा मांग रहा था. स्थिति बिगड़ने पर सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मार्शल बुलाकर उन्हें बाहर करवाया. हंगामे के बाद दोनों नेताओं ने एक‑दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए और भाषा की मर्यादा भी टूटती नजर आई.
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा—सुनील सिंह ‘लफंगा', लड़ना है तो सड़क पर आ जाएं
हंगामे के बाद मंत्री अशोक चौधरी ने सुनील सिंह पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘लफंगा' कहा. उन्होंने कहा कि मैं लफंगों से डरने वाला नहीं हूं. सुनील सिंह का व्यवहार अमर्यादित है, वे अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, उंगली दिखा रहे थे. हमने उन्हें बिस्कोमान में हराया था. वे वहां कब्जा कर बैठे थे, इसलिए उन्हें मुझसे दिक्कत है. अगर लड़ना है तो सड़क पर आएं, मैं तैयार हूं. उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हो रहा कि दलित मुखर हो रहा है. बिहार का दलित उन्हें सबक सिखाएगा.
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MLC सुनील सिंह का पलटवार, मंत्री ने फाइल फेंककर मारी
राजद MLC सुनील सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री अशोक चौधरी ने उन्हें फाइल फेंककर मारी और सदन के भीतर अभद्र भाषा का प्रयोग किया.उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी के अपमान पर हम चर्चा की मांग कर रहे थे, जिसे अस्वीकार कर दिया गया. मंत्री ने हमें और राबड़ी देवी को गाली दी, यह असहनीय है. सरकारी मंत्री का व्यवहार ‘टपोरी' से कम नहीं था. वे संख्या बल के दम पर हमें दबाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि वे पहले वेल में आए और फिर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़े. हम अपनी जगह से हिले भी नहीं. सदन नहीं चलने देना चाहते, इसलिए झूठे आरोप लगा रहे हैं.
लगातार दूसरे दिन सदन में हंगामा
यह हंगामा मंगलवार तक सीमित नहीं रहा.सोमवार को भी सदन में बड़ा बवाल हुआ था, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को “लड़की” कह दिया था. विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया, और सीएम का माइक तक बंद कर दिया गया. मामला मंगलवार को और ज्यादा गर्म हो गया, और माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान बुधवार को भी सदन में हंगामा जारी रह सकता है.














