आवारा कुत्तों ने 13 साल के मासूम की नोंच-नोंचकर ले ली जान, चेहरा पहचानना मुश्किल, आक्रोशित लोगों ने किया प्रदर्शन

समस्‍तीपुर जिले के बड़गांव में एक बच्‍चे पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया और गर्दन से लेकर पूरे मुंह को नोचकर खा गए. जब तक लोग उसे देखते तब तक उसकी मौत हो गई थी. 

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बच्‍चे की मौत के बाद लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
समस्‍तीपुर:

देश में आवारा कुत्तों के काटने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं. बावजूद इसके इनसे निपटने के लिए कोई गंभीर प्रयास नजर नहीं आते हैं. बिहार के समस्‍तीपुर जिले के हसनपुर थाना इलाके के बड़गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें आवारा कुत्तों के काटने से एक बच्‍चे की मौत हो गई. आवारा कुत्तों ने बच्‍चे को इस कदर काट खाया कि उसके चेहरे को पहचानना तक मुश्किल हो गया. इसके बाद स्‍थानीय लोगों ने शव को मुख्‍य सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया. 

जानकारी के अनुसार, बड़गांव निवासी संतोष पासवान का 13 साल का बेटा सत्यम कुमार गांव में डिहवार स्थान जा रहा था. डिहवार स्थान में गांव के ही लोग पूजा करने जा रहे. उन्‍हीं के साथ सत्‍यम कुमार भी जा रहा था. रास्ते में अकेला देखकर कुत्तों के झुंड ने बच्चे पर हमला कर दिया और गर्दन से लेकर पूरे मुंह को नोचकर खा गए. जब तक लोग उसे देखते तब तक उसकी मौत हो गई थी. 

सड़क जाम कर लोगों ने किया प्रदर्शन

बच्चे की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने शव को हसनपुर-बिथान मुख्य पथ पर रखकर सड़क को जाम कर दिया. लोगों का आरोप था कि पुलिस सूचना देने के दो घंटे के बाद घटनास्थल पर पहुंची.  इस  दौरान आक्रोशित ग्रामीण पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की. आक्रोशित लोग मृत बच्चे के परिजनों को मुआवजे की मांग कर रहे थे. 

पहले भी आ चुका है ऐसा ही मामला 

यह कोई पहला मामला नहीं है. करीब महीने भर पहले भी एक बच्ची को आवारा कुत्तों ने बुरी तरह नोचकर जख्मी कर दिया था. उस समय भी 15-20 कुत्तों के झुंड ने बच्ची पर हमला किया था.  इलाज के लिए ले जाते वक्‍त बच्‍ची की रास्‍ते में मौत हो गई थी. 

बच्‍चों को बाहर भेजने से डर रहे लोग 

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को शिकायत दी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. घटना के दो दिन बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर कुत्तों को पकड़ने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. बड़गांव टोले के लोग अब डर और गुस्से में हैं. बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी लोग डरने लगे हैं. प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करे जिससे फिर कोई मासूम इस तरह की दर्दनाक मौत का शिकार न हो. 

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