80 और 90 के दशक में पूर्णिया जिला के रुपौली प्रखंड का यह इलाका नक्सलियों की सक्रियता और आपराधिक गिरोहों की टकराव की वजह से सुर्खियों में रहा करता था. उस वक्त शाम की दस्तक के साथ ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते थे और अघोषित कर्फ्यू का नजारा दिखता था. तीन दशक बाद टीका पट्टी थाना क्षेत्र के चकला मोड़ बहियार इलाके में एक बार फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. फर्क केवल इतना है कि उस वक्त नक्सलियों या अपराधियों की वजह से ऐसा था. लेकिन अब यह एक तेंदुए की वजह से है, जो रिहायशी इलाके में घुस आया है. पहले एक तेंदुए को ग्रामीणों द्वारा मारा जा चुका है. लेकिन अब एक पंजे के निशान ने लोगों की आखों की नींद उड़ा दी है.
दहशत का असर सबसे ज्यादा कृषि कार्य पर पड़ रहा है जो ठप्प पड़ा है. किसान खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं. कुछ दिनों तक यह सिलसिला जा रहा तो किसानों को बड़े आर्थिक-संकट के दौर से गुजरना पड़ सकता है. स्थानीय लोगों में वन विभाग के प्रति इस बात को लेकर आक्रोश है. हालांकि, वन विभाग के रेंजर राम प्रवेश ठाकुर कहते हैं कि ' ग्रामीणों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं.तेंदुआ की खोज में ड्रोन एवं आधुनिक उपकरणों की मदद ली जा रही है. तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया गया है'.
27 मई को ग्रामीणों ने तेंदुए को मार डाला था
घटना से करीब एक सप्ताह पूर्व से टीका पट्टी थाना क्षेत्र के धूसर पंचायत के लोग तेंदुए के आतंक से परेशान थे. तेंदुए द्वारा गाय के बछड़े और बकरी को नुकसान पहुंचाया जा चुका था. स्थानीय लोगों ने जब चकला मोड़ बहियार के खेतों में तेंदुए को विचरण करते देखा तो किसानों और मजदूरों में भय व्याप्त हो गया. स्थानीय लोगों ने वन विभाग और स्थानीय पुलिस को इस बाबत सूचित किया लेकिन कुछ खास नतीजा नहीं निकला. इसी बीच 27 मई को तेंदुए का आमना-सामना ग्रामीणों से हो गया. उसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ ने तेंदुए को घेर कर मार डाला.
एक और तेंदुए के होने की चेतावनी
तेंदुए के मारे जाने के बाद भी स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई. घटना के दो दिन बाद चकला मोड़ बहियार के मक्का खेतों में तेंदुए के पंजे के ताजा निशान देखे गए. तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई. वन विभाग के अधिकारियों की टीम ने पहुंचकर पंजे के निशान की जांच कर रहा है. वन विभाग पता कर रही है कि यह निशान मारे गए तेंदुए की है या नए तेंदुए की. वहीं वन विभाग लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं. खेतों में अकेले जाने से बचने को कहा गया है. जबकि घर से बार निकले को लेकर भी सावधान रहने को कहा गया है. ऐसे लोगों को और ज्यादा दहशत फैल गई है.
लगभग एक हजार एकड़ में खेती प्रभावित
सीमांचल का पूर्णिया जिला बिहार का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक केंद्र है. इस इलाका में मक्का की व्यापक खेती होती है जो यहां का मुख्य नगदी फसल बन चुका है. चकला मोड़ बहियार लगभग एक हजार एकड़ में फैला हुआ है. इस क्षेत्र में अभी लगभग 150 एकड़ में मक्का की फसल खड़ी है, जबकि यह वक्त मक्का फसल तैयार करने का है. किसान अभी मक्का की तैयारी में रात-दिन जुटे हुए हैं. लेकिन मजदूर तेंदुए के भय की वजह से मक्का को काटने के लिए तैयार नहीं है. एक-दो सप्ताह तक यही स्थिति बनी रही तो मक्का की फसल खेत में ही बर्बाद हो सकती है. वहीं इस क्षेत्र में दूसरी नगदी फसल केला भी लगभग 500 एकड़ में लगी हुई है. जाहिर है कि जब मक्का फसल तैयार नहीं होंगे, केले का उत्पादन प्रभावित हो जाएगा और बांस की कटाई भी सम्भव नहीं हो सकेगी तो किसानों को आर्थिक संकट का सामना निश्चित तौर पर करना होगा.
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