बिहार में 3 आईपीएस अधिकारियों के तबादलों से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया. आदेश सीतामढ़ी, बेगूसराय और सारण के पुलिस अधीक्षकों (SP) के ट्रांसफर से जुड़ा था. लेकिन जब हकीकत सामने आई तो महकमे में भी हड़कंप मच गया. पड़ताल में सामने आया कि गृह विभाग के नाम से जारी यह आदेश ही फर्जी है. मामले की जानकारी मिलते ही गृह विभाग ने इसे गंभीरता से लिया. पटना साइबर थाना ने मामला दर्ज करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है. आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है. साथ ही उसके मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है.
कई अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच
इस आदेश को बेहद ही शातिर से तैयार किया गया था, जिसके चलते यह सामान्य आदेश की तरह ही लग रहा था. देखते ही देखते आदेश सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया था. विभाग ने बताया कि फर्जी अधिसूचना तैयार करने वालों के साथ ही सोशल मीडिया पर शेयर करने वाले लोगों की भी गिरफ्तारी होगी. साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार व्यक्ति बिहार पुलिस से जुड़ा हुआ है. आशंका है कि इस मामले में कई अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है.
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब गृह विभाग के दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिजनों को बीमा चेक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था. तभी पुलिस अधिकारियों को वायरल ऑर्डर की जानकारी मिली. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया. माना जा रहा है कि शुक्रवार को इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है.
आरोपी के नेटवर्क की भी जांच जारी
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इसके पीछे उसकी क्या मंशा थी और क्या इस मामले में कोई बड़ा साइबर नेटवर्क या गिरोह सक्रिय है. शुरुआती तौर पर आशंका है कि आरोपी का किसी साइबर फ्रॉड गिरोह से संबंध हो सकता है. साइबर थाना प्रभारी और डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा.
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