मुस्लिम संगठनों ने किया नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बायकॉट, जानें RJD ने क्या कहा

जेडीयू के वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने के कारण मुस्लिम संगठनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बायकॉट किया है. मुस्लिम संगठनों के फैसले पर अब बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह बयान आया है. उन्होंने कहा, मैं मुस्लिम संगठनों को बधाई देता हूं, जिन्होंने 20 सालों में पहली बार सही निर्णय लिया.

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बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले बिहार में इफ्तार पार्टी का सिलसिला जारी है.
कैमूर:

मुस्लिम संगठनों की तरफ से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बायकॉट का आरजेडी ने स्वागत किया है. बिहार के पूर्व कृषि मंत्री और बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि मैं मुस्लिम संगठनों को बधाई देता हूं, जिन्होंने 20 सालों में पहली बार सही निर्णय लिया है. बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "पहली बार मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जो लोग भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं, उनके कार्यक्रमों में जाने का क्या औचित्य था? मैं मुस्लिम संगठनों को बधाई देता हूं, जिन्होंने 20 सालों में पहली बार सही निर्णय लिया.

उन्होंने आगे कहा कि अगर नीतीश कुमार के किसी भी कार्यक्रम का बायकॉट शुरू से किया होता तो किसी का मन नहीं बढ़ा होता. वे (जेडीयू) भाजपा के साथ भी रहेंगे और भाजपा के एजेंडे पर आगे भी बढ़ेंगे. तीन तलाक से लेकर 370 तक के एजेंडे और एनआरसी से लेकर सभी एजेंडों पर नीतीश कुमार भाजपा को सहयोग भी करेंगे. इसके बावजूद अगर मुस्लिम संगठन के लोग ईद और इफ्तार पार्टी में जाते तो यह दुखद था. ऐसे लोगों का पहले से बायकॉट होना चाहिए था. मैं बधाई देता हूं कि उनका निर्णय सही है."

उन्होंने राष्ट्रगान मामले पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, " भारत के संविधान में लिखा है कि राष्ट्रगान या राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना इस देश के सभी नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी है. ये कोई नैतिकता का सवाल नहीं है बल्कि ये कानूनी दायित्व है. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप राष्ट्रीय झंडे को फाड़कर या उखाड़कर फेंक देंगे तो इसको लेकर दंड का प्रावधान है, जिसके तहत तीन साल की सजा होगी. राष्ट्रीय प्रतीकों को अपमान नहीं किया जा सकता है. राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गान को सम्मान देना होगा, अगर कोई इसका विरोध करता है तो दंडित होना चाहिए. भले ही बिहार के मुख्यमंत्री ही नहीं देश के प्रधानमंत्री भी ऐसा करेंगे तो उनको भी दंड देना चाहिए."

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प्रशांत किशोर को भी घेरा

सांसद सुधाकर सिंह ने प्रशांत किशोर पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर कभी भाजपा के लिए प्रचार करते हैं तो कभी जदयू के लिए प्रचार करते हैं। राष्ट्रीय जनता दल तो ऐसे भाड़े वाले लोगों को पसंद ही नहीं करती है और हमें ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है. हमारी पार्टी किसानों, मजदूरों और गरीबों की पार्टी है. हमारे कार्यकर्ता ही पार्टी का प्रचार करते हैं. जबकि प्रशांत किशोर ने तो अभी से ही तमिलनाडु का भी ठेका ले रखा है, वह पार्टी नहीं चला रहे बल्कि प्रचार का ठेका लेकर घूम रहे हैं."

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उन्होंने आगे कहा, "सबको मालूम है कि यह भाजपा की बी-टीम के तौर पर काम कर रहे हैं और जेडीयू वाले लोग भी उनसे इस समय नाराज हैं. अभी तक जनता की पार्टी बनती थी, लेकिन पहली बार कोई पार्टी अपनी कंपनी चला रही है."

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