बिहार विधानसभा में गूंजी मैथिली ठाकुर की दहाड़, लालू को धृतराष्ट्र और तेजस्वी को दुर्योधन बताया, देखें VIDEO

मैथिली ठाकुर ने अपने भाषण में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "जब मैं उस समय (2005 से पहले) को याद करती हूं, तो मुझे महाभारत के धृतराष्ट्र का हस्तिनापुर याद आता है. राजा अनुभवी थे, लेकिन वे अंधे थे और देखना भी नहीं चाहते थे.

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  • बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने विपक्ष पर लालू यादव के शासनकाल की तुलना धृतराष्ट्र युग से की
  • मैथिली ने कहा कि 2005 से पहले बिहार में शाम के बाद बाहर निकलना असुरक्षित था, जो आज सुशासन की वजह से बदल गया
  • मुख्यमंत्री नीतीश की साइकिल योजना को मैथिली ने बिहार की बेटियों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया
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पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बीजेपी की सबसे युवा विधायक और मशहूर कलाकार मैथिली ठाकुर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. मैथिली ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल की तुलना महाभारत के 'धृतराष्ट्र युग' से कर दी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

"पुत्र मोह में अंधे थे धृतराष्ट्र" – लालू पर सीधा हमला

मैथिली ठाकुर ने अपने भाषण में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "जब मैं उस समय (2005 से पहले) को याद करती हूं, तो मुझे महाभारत के धृतराष्ट्र का हस्तिनापुर याद आता है. राजा अनुभवी थे, लेकिन वे अंधे थे और देखना भी नहीं चाहते थे. उन्हें हस्तिनापुर की नहीं, बल्कि अपने 'दुर्योधन' की चिंता थी." उन्होंने तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना उनकी तुलना दुर्योधन से करते हुए कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को जनता की चीखें सुनाई नहीं देती थीं क्योंकि उन्होंने अपनी आंखों और कानों पर पट्टी बांध रखी थी.  

जंगलराज बनाम सुशासन: "रात 3 बजे भी सुरक्षित है बिहार की बेटी"

अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए मैथिली ने बताया कि कैसे 2005 से पहले बिहार में शाम 5-6 बजे के बाद घर से निकलना मुमकिन नहीं था. "लोग कहते थे कि 5 बजे के बाद गाड़ी से मत निकलना, खतरा है. आज मैं एक कलाकार और विधायक के नाते रात के 3 बजे दरभंगा से चलकर सुरक्षित पटना अपने घर पहुँचती हूं. यह बदलाव नीतीश कुमार के सुशासन की देन है."

शिक्षा और साइकिल योजना की तारीफ

मैथिली ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'साइकिल योजना' को गेम-चेंजर बताया. उन्होंने कहा कि इन साइकिलों के पहियों ने केवल सड़क नहीं नापी, बल्कि लाखों बेटियों के भविष्य को नई उड़ान दी. उन्होंने श्लोक 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' (अंधकार से प्रकाश की ओर) के जरिए बिहार के सफर को परिभाषित किया. मैथिली ने कहा कि पीएम मोदी की प्रेरणा और सीएम नीतीश के समर्पण से बिहार शिक्षा की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि भले ही जनता वह दौर भूल जाए, लेकिन इतिहास उस अंधकारमय युग को कभी माफ नहीं करेगा. उन्होंने अपने क्षेत्र 'अलीनगर' की जनता का आभार जताया और स्कूलों में बढ़ते नामांकन को देखते हुए और अधिक कमरों (भवन) के निर्माण की मांग की.

विपक्ष में खलबली

जब मैथिली ठाकुर भाषण दे रही थीं, तो विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने टोकने की कोशिश की. इस पर मैथिली ने पलटवार करते हुए कहा, "विपक्ष के दिग्गज नेताओं की राजनैतिक उम्र मेरी पूरी उम्र से बड़ी होगी, लेकिन आज जब बिहार की एक बेटी सच बोल रही है, तो आपको इतनी दिक्कत क्यों हो रही है?"

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