मजदूर की बेटियां बनीं फायर अफसर और इंजीनियर, नीतू और नौसी ने ऐसे बदल दी अपनी किस्मत

बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की दो बेटियां नीतू कुमारी और नौसी शाहीन आज उन सैकड़ों छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखती हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • नवादा जिले की छात्रा नीतू कुमारी और नौसी शाहीन ने गरीबी और सामाजिक दबावों को पार कर सफलता हासिल की
  • नीतू , मजदूर पिता की बेटी, मैट्रिक और इंटर में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होकर अग्निक के पद पर नियुक्त हुईं
  • नौसी शाहीन ने जूडो-कराटे और संगीत में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा एएमयू से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पूरी की
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नवादा (रजौली):

कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और सपनों में जान हो, तो गरीबी और अभाव के रास्ते कभी रुकावट नहीं बन सकते. बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की दो छात्राओं, नीतू कुमारी और नौसी शाहीन ने इस बात को सच कर दिखाया है. सीमित संसाधनों और सामाजिक दबाव के बीच पली-बढ़ी इन बेटियों ने आज अपनी सफलता से न केवल अपने परिवार का सिर ऊंचा किया है, बल्कि जिले की सैकड़ों छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. हाल ही में विद्यालय परिसर में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया. विद्यालय के संचालक सत्येंद्र कुमार पांडेय और वार्डेन रेखा कुमारी ने दोनों बेटियों को अंगवस्त्र और फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया. जब सफलता का जश्न मनाते हुए मिठाइयां बांटी गईं, तो पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा. 

1. नीतू कुमारी: मजदूर की बेटी से 'अग्निक' बनने तक का सफर
रजौली के महादेव मोड़ निवासी कारू राजवंशी (मजदूर) की बेटी नीतू कुमारी ने साल 2011 में इस विद्यालय में कदम रखा था. आर्थिक तंगी के कारण परिवार की ओर से शादी का भारी दबाव था. नीतू ने दबाव के आगे झुकने के बजाय पढ़ाई को चुना. 2017 में मैट्रिक और 2019 में इंटर प्रथम श्रेणी से पास करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. आज नीतू अग्निक (Fireman) के पद पर चयनित होकर बेतिया जिले में अपनी सेवाएं दे रही हैं.

2. नौसी शाहीन: जर्मनी तक का सफर और अब दिल्ली में इंजीनियर
महसई मोहल्ला निवासी शमशेर आलम की पुत्री नौसी शाहीन की कहानी भी किसी मिसाल से कम नहीं है. 2010 में विद्यालय में नामांकित नौसी पढ़ाई के साथ-साथ जूडो-कराटे और संगीत में भी अव्वल रहीं. आठवीं की टॉपर रहीं नौसी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. उनका चयन एक जर्मन कंपनी में भी हुआ था. वर्तमान में वे दिल्ली में एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं. बचपन में शादी के दबाव को दरकिनार कर उन्होंने साबित किया कि लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं.

"बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना ही हमारा लक्ष्य"
समारोह के दौरान वार्डन रेखा कुमारी ने भावुक होते हुए कहा, "हमारा उद्देश्य बेटियों को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है. नीतू और नौसी की सफलता पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है." इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य बालकृष्ण प्रसाद यादव, शिक्षिका आशा रानी, सीमा कुमारी, रेणु कुमारी, लेखापाल संतोष कुमार और विद्यालय के अन्य कर्मियों सहित सैकड़ों छात्राओं ने इन सफल बेटियों का हौसला बढ़ाया.

Advertisement
Featured Video Of The Day
West Bengal Elections 2026: बंगाल में किसके साथ महिला वोटर? Women Reservation Bill 2026