रोहतास जिले से शुक्रवार (22 मई) को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है. जिला मुख्यालय सासाराम स्थित सदर अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance) की टीम ने अचानक छापेमारी कर एक लिपिक (Clerk) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई के बाद पूरे सीएस कार्यालय और अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. अचानक हुई निगरानी विभाग की कार्रवाई से कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया और कई लोग दफ्तर छोड़कर इधर-उधर होते नजर आए.
ट्रांसफर कराने के नाम पर मांगी जा रही थी घूस
मामले को लेकर निगरानी डीएसपी विकास कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गिरफ्तार लिपिक की पहचान सतीश कुमार के रूप में हुई है. वह सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत था और संझौली प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात प्रखंड लेखा प्रबंधक सुनीता कुमारी से ट्रांसफर कराने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था.
बताया गया कि सुनीता कुमारी लंबे समय से ट्रांसफर से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रही थीं. इसी दौरान लिपिक सतीश कुमार ने फाइल आगे बढ़ाने और ट्रांसफर कराने के नाम पर मोटी रकम की मांग की. रिश्वत मांगने से परेशान होकर सुनीता कुमारी ने निगरानी विभाग से इसकी शिकायत की.
शिकायत के बाद निगरानी ने बिछाया जाल
निगरानी विभाग ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले का सत्यापन कराया. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी. शुक्रवार को निगरानी विभाग की टीम पहले से ही सिविल सर्जन कार्यालय के आसपास तैनात थी और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थी.
20000 रुपये लेते ही निगरानी टीम ने दबोचा
जैसे ही सुनीता कुमारी ने तय रकम के अनुसार लिपिक सतीश कुमार को बीस हजार रुपये दिए, वैसे ही निगरानी की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया. टीम ने तत्काल आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी. कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों के चेहरे पर भी घबराहट साफ दिखाई दी.
सीएस कार्यालय में पहले भी हो चुकी हैं कई कार्रवाइयां
जानकारी के अनुसार रोहतास जिले का सिविल सर्जन कार्यालय पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है. सूत्रों की मानें तो इस कार्यालय में अब तक लगभग आठ बार निगरानी विभाग या अन्य एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है. इसके बावजूद रिश्वतखोरी और मनमानी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है.
एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आम लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में कई कार्य बिना पैसे के नहीं हो पाते और कर्मचारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है.
लंबे समय से लगते रहे थे आरोप
बताया जाता है कि गिरफ्तार लिपिक सतीश कुमार के खिलाफ पहले भी भ्रष्टाचार और मनमानी के कई आरोप लग चुके थे. हालांकि हर बार वह विभागीय स्तर पर कार्रवाई से बच निकलता था. चर्चा है कि उच्च अधिकारियों तक पहुंच होने के कारण उसके खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे थे.
फिलहाल निगरानी विभाग की टीम आरोपी को अपने साथ पटना ले गई है, जहां उससे आगे की पूछताछ की जाएगी. साथ ही उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के बीच भी डर और बेचैनी का माहौल बना हुआ है.
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