बिहार में राजस्व विभाग के 5 अफसरों के इस्तीफे मंजूर, हड़ताल के बीच सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?

Bihar Revenue Department resignations: यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब राज्यभर के अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं और अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप पड़ा हुआ है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • बिहार सरकार ने पांच राजस्व अधिकारियों के इस्तीफे को उनकी आवेदन तिथि से प्रभावी मानते हुए मंजूरी दे दी है
  • इस्तीफे में वैशाली, रोहतास और सारण जिलों के तीन महिला और दो पुरुष अधिकारी शामिल हैं
  • अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे राजस्व सेवाएं और जमीन से जुड़े काम ठप पड़े हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में इन दिनों हलचल तेज है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार राजस्व सेवा के पांच अधिकारियों के त्यागपत्र को मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब राज्यभर के अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं और अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप पड़ा हुआ है. सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पांच अधिकारियों के इस्तीफे को उनकी आवेदन तिथि से ही प्रभावी मान लिया गया है. इन अधिकारियों में तीन महिला और दो पुरुष अधिकारी शामिल हैं. संबंधित जिलाधिकारियों की अनुशंसा और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह निर्णय लिया गया.


किन अधिकारियों के इस्तीफे हुए मंजूर

जिन अधिकारियों के त्यागपत्र स्वीकार किए गए हैं, उनमें वैशाली जिले के गोरौल अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी अंशु कुमार का इस्तीफा 19 दिसंबर 2025 से प्रभावी माना गया है. वहीं, रोहतास जिले के बिक्रमगंज में कार्यरत राजस्व अधिकारी राजन कुमार का इस्तीफा 26 जून 2025 से प्रभावी किया गया है.

महिला अधिकारियों में सारण जिले के परसा की राजस्व अधिकारी शिवांगी पांडेय का त्यागपत्र 7 मई 2025 से प्रभावी माना गया है. इसके अलावा रोहतास जिले के राजपुर की तत्कालीन अंचलाधिकारी अंकिता वर्मा का इस्तीफा 27 अगस्त 2024 से प्रभावी किया गया है. वहीं वैशाली जिले के हाजीपुर सदर में तैनात राजस्व अधिकारी स्मृति कुमारी का त्यागपत्र 20 अगस्त 2025 से प्रभावी माना गया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से इन सभी इस्तीफों को स्वीकार करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही ये अधिकारी अब सरकारी सेवा से आधिकारिक रूप से अलग हो गए हैं.

हड़ताल के बीच आया फैसला

इस फैसले का समय काफी अहम माना जा रहा है. दरअसल, बिहार में सोमवार से अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं. उनकी हड़ताल के कारण जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम जैसे दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, आय और जाति प्रमाणपत्र, जमीन मापी और अन्य राजस्व संबंधी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं.

सरकार हड़ताल को खत्म कराने के लिए लगातार सख्त रुख दिखा रही है. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने पहले ही चेतावनी दी थी कि काम पर नहीं लौटने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. ऐसे में पांच अधिकारियों के पुराने इस्तीफे को मंजूरी देना सरकार के सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

सरकार का संदेश भ्रम में न रहें कर्मचारी

विजय सिन्हा ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार पहले भी थी और आगे भी रहेगी, इसलिए किसी तरह के भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए विपक्षी दलों पर भी इशारों में निशाना साधा. सिन्हा ने कहा कि कुछ लोग अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार जनता के हित में शुरू किए गए काम को हर हाल में पूरा करेगी.

Advertisement

काम करने वालों को डराने की कोशिश सरकार

डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि जो अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं, उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है. सरकार ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी. उन्होंने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से कहा कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएं. सिन्हा ने यह भी कहा कि राजस्व विभाग पहले से ही कई समस्याओं से घिरा रहा है और इसे सुधारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि काम करने वालों को परेशान करने की राजनीति अब नहीं चलेगी.

क्या है इसका राजनीतिक और प्रशासनिक मतलब?

विशेषज्ञों का मानना है कि हड़ताल के बीच पांच अधिकारियों के इस्तीफे को स्वीकार करना सरकार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अगर कोई अधिकारी सेवा छोड़ना चाहता है या काम नहीं करना चाहता, तो सरकार उसके बिना भी व्यवस्था चलाने के लिए तैयार है.

Advertisement

दूसरी तरफ हड़ताल कर रहे अधिकारी और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अब भी अड़े हुए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या टकराव और बढ़ता है. फिलहाल इतना साफ है कि बिहार के राजस्व विभाग में जारी यह विवाद प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा मुद्दा बन चुका है. आने वाले समय में इसका असर राज्य की जमीन और राजस्व व्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
 

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: दोनों तरफ से ताबड़तोड़ा हमले... बहुत खतरनाक मोड़ पर पहुंचा युद्ध! अब आगे क्या होगा?