कार्बाइड गन से बचके..पटाखा नहीं ये 'रोशनी चोर' है, बिहार के कई घरों में मचा दिया कोहराम!

बिहार में भी कार्बाइड गन ने कोहराम मचा रखा है. बिहारशरीफ में एक ही घर के कई लोग घायल हुए हैं जबकि एक आंख की रोशनी चली गई.

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बिहार में कार्बाइड गन का आतंक
बिहारशरीफ:

दीवाली की रात को दिखने वाली झिलमिलाती खुशियां इस बार बेहद दर्दनाक मोड़ पर रुक गईं. देशी जुगाड़ से बनी कार्बाइड-गन से पटाखा फोड़ने की एक ही घटना में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. इनमें से एक मरीज ने अपनी एक आंख की रोशनी तक गंवा दी है. सभी घायलों को खंदकपर स्थित 'कुमार नेत्रालय' अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना यह है कि कैल्शियम कार्बाइड, प्लास्टिक पाइप और गैस लाइटर के प्रयोग से बना यह ‘पटाखा गन' दिखने में भले ही एक खिलौने जैसा हो लेकिन इसके भीतर छिपा अति विस्फोटक खतरनाक मिश्रण चेहरे-आंखों को भारी चोट पहुंचाने वाला है. जब कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है, तब एसिटिलीन गैस बनती है जो भयंकर विस्फोट करती है. विस्फोट के समय प्लास्टिक पाइप के टूटे टुकड़े छर्रे की तरह शरीर में घुसते हैं और विशेष रूप से आंखों एवं चेहरे को गहरी चोट पहुंचाते हैं. डॉ. नीतीश कुमार के अनुसार, “कई बच्चों की रेटिना फटने से उनकी आंखों की रोशनी चली गई है और कई के चेहरे और आंखों के आस-पास झुलस गए हैं. 

• पटाखा फोड़ने के चक्कर में कुल पांच लोग घायल हुए हैं.
• एक व्यक्ति ने एक आंख की दृष्टि पूरी तरह खो दी है.
• घायलों को 'कुमार नेत्रालय, खंदकपर' में भर्ती किया गया है.
• ये घातक पटाखा-गन वास्तव में खेती-बाड़ी में बंदरों और जंगली पक्षियों को भगाने के लिए प्रयुक्त मशीन की नकल हैं, जिन्हें बच्चों-युवाओं ने ‘धमाका' के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
• सोशल मीडिया पर इन कार्बाइड गनों के “चैलेंज-वीडियो" वायरल हो रहे हैं जिससे लग रहा है यह सिर्फ पटाखा नहीं बल्कि एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है. 

डॉक्टर के अनुसार, इस प्रकार की गन से कई प्रकार की चोटें लग सकती हैं
-विस्फोट से निकलने वाले छर्रों द्वारा आंख का कॉर्निया, रेटिना और खुद आंख का ग्लोब तक प्रभावित होता है.
-रासायनिक चोट,कैल्शियम-कार्बाइड की प्रतिक्रिया में निकलने वाली गैस और जलने से आंख और उसके आस-पास की त्वचा और रेटिना बुरी तरह क्षतिग्रस्त होती है.
-थर्मल चोट-विस्फोट से उत्पन्न ताप और चिंगारी से चेहरे-आंखों में तीव्र जलन होती है.

चिकित्सक यह चेतावनी देते हैं कि ऐसी घटना में तत्काल नेत्र-विशेषज्ञ की जांच बेहद जरूरी है। आँखों पर किसी भी प्रकार का दबाव न डालें. उन्हें हल्के, साफ कपड़े से ढंके और तुरंत अस्पताल ले जाएं. इस वर्ष की दिवाली में रंग-उत्सव के बीच यह हादसा एक चेतावनी बनकर सामने आया है. छोटी-सी जान-मनोरंजन वाली कोशिश ने पांच परिवारों को दर्द दिया है. एक की आंख की रोशनी चली गई, जीवन एक पल में बदल गया.

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