- बिहार सरकार ने तय किया है कि बेतिया राज के हर संपत्ति की पहचान होगी.
- उसका रिकॉर्ड बनेगा और साफ नियमों के तहत फैसला होगा कि कौन असली हकदार है.
- बिहार सरकार ने नई नियमावली में पूरी प्रक्रिया तय कर दी है.
बिहार सरकार अब बेतिया राज की संपत्तियों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया है कि इन संपत्तियों के सही प्रबंधन, सुरक्षा और उपयोग के लिए नई नियमावली 2026 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. सीधे शब्दों में समझें तो सरकार चाहती है कि बेतिया राज की जितनी भी जमीन-जायदाद है, चाहे बिहार में हो या बाहर, उसे एक साफ कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने नियंत्रण में लेकर जनहित में इस्तेमाल किया जाए.
बेतिया राज के पास कितनी जमीन है?
अब बात करते हैं सबसे अहम सवाल की. आखिर बेतिया राज के पास कितनी जमीन है? सरकारी सर्वे के मुताबिक अलग-अलग जिलों में जमीन इस तरह फैली हुई है:
पश्चिम चम्पारण – 16,671.91 एकड़
पूर्वी चम्पारण – 7,640.91 एकड़
सारण – 109.96 एकड़
गोपालगंज – 35.58 एकड़
पटना – 11.49 एकड़
सिवान – 7.29 एकड़
कुल जमीन: 24,477.14 एकड़
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इसे आसान भाषा में समझें तो यह करीब 8 लाख कट्ठे या लगभग 40 हजार बीघे के बराबर होता है. वहीं अगर इसे वर्ग किलोमीटर में बदलें, तो यह करीब 100 वर्ग किलोमीटर होगा. यानी ये जमीन किसी छोटे शहर जितनी बड़ी है.
आखिर सरकार क्यों लाई नई नियमावली?
बेतिया राज की संपत्तियां सालों से अलग-अलग लोगों के कब्जे में हैं- कुछ के पास कागज हैं, कुछ के पास नहीं. इससे विवाद और गड़बड़ी होती रही है.
अब सरकार ने तय किया है कि हर संपत्ति की पहचान होगी, उसका रिकॉर्ड बनेगा और साफ नियमों के तहत फैसला होगा कि कौन असली हकदार है.
चलिए समझते हैं कि क्या होगा नया सिस्टम? बिहार सरकार ने नई नियमावली में पूरी प्रक्रिया तय कर दी है. इसके तहत सरकार पहले सभी संपत्तियों की लिस्ट जारी करेगी. इसमें आपत्ति दर्ज करने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा. आपत्तियों की जिला स्तर पर अधिकारी सुनवाई करेंगे. इन अधिकारियों के पास कोर्ट जैसी ताकत होगी. उन्हें 90 दिनों के अंदर किसी भी आपत्ति का निपटारा करना होगा.
जमीन पर कब्जा कैसे लिया जाएगा?
अगर कोई आपत्ति नहीं आती या खारिज हो जाती है तो जिलाधिकारी (समाहर्ता) सीधे जमीन का कब्जा ले लेंगे. इसके बाद जमीन को चार कैटेगरी में बांटेगी. ऐतिहासिक और विरासत संपत्तियां, सरकारी उपयोग वाली जमीन, वैध पट्टे पर रहने वाले लोग और बिना कागज के कब्जा करने वाले लोग.
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पुराने कब्जाधारियों को राहत
इसके साथ ही सरकार ने एक बड़ी राहत वाला फैसला भी किया है. इसके तहत अगर कोई 40 साल से (1 जनवरी 1986 से पहले) जमीन पर रह रहा है और उसके पास कुछ वैध कागज हैं, तो वह तय रकम देकर उस जमीन का पूरा मालिक बन सकता है.
हालांकि जिन लोगों ने बेतिया राज के जमीन पर 1986 के बाद कब्जा किया है उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. जरूरत पड़ी तो उनका निर्माण भी सरकार अपने कब्जे में ले सकती है.
वहीं जिनके पास कोई कागज नहीं है और न ही लंबा कब्जा उन्हें अवैध कब्जाधारी माना जाएगा और बेदखली (हटाने) की कार्रवाई होगी.
ऐतिहासिक संपत्तियों का क्या होगा?
बेतिया राज की कई इमारतें और जगहें ऐतिहासिक हैं. सरकार ने कहा है कि इन्हें बचाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. पुरातत्व विभाग जैसे संस्थानों से सहयोग लिया जाएगा ताकि उनकी पहचान की जा सके और विरासत सुरक्षित रहे.
कुल मिलाकर क्या बदलने वाला है?
इस नई नियमावली से जमीन से जुड़े पुराने विवाद कम होंगे, सही लोगों को हक मिलेगा, अवैध कब्जे हटेंगे और सरकार इन जमीनों का इस्तेमाल जनता के काम में कर सकेगी.













