Bihar Politics: सियासी रसूख की जंग या 'लक Factor', समझिए आखिर क्यों 10 सर्कुलर रोड खाली नहीं करना चाहती राबड़ी देवी

बिहार में '10 सर्कुलर रोड' सरकारी बंगले को लेकर लालू परिवार और राज्य सरकार में ठन गई है. प्रशासन ने नेता प्रातिपक्ष राबड़ी देवी को 15 दिनों में बंगला खाली करने का अल्टीमेटम दिया है. जानिए क्यों इस बंगले को लालू परिवार खाली नहीं करना चाहता है.

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10, सर्कुलर रोड
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Rabri Devi Bungalow Dispute: बिहार की सियासत में सरकारी आवासों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनैतिक ड्रामे में तब्दील हो चुका है. राज्य की राजनीति का 'पावर सेंटर' माना जाने वाला पटना का '10, सर्कुलर रोड' का सरकारी बंगला इन दिनों सुर्खियों में है. बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग (BCD) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के बीच तलवारें खिंच गई हैं.

बंगले के लिए आर पार की जंग का ऐलान

30 मई 2026 को पटना लौटते ही राबड़ी देवी ने सीधे तौर पर आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए कहा कि वे खुद से यह आवास खाली नहीं करेंगी.ये आवास बिहार सरकार के पशुपालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया जा चुका है.  बात अब पुलिस बुलाने तक पहुंच गई है.

चलिए समझते है इन बिदुओं के जरिए समझते है कि एक दशक तक इस बंगले में रहने के बाद सियासी रसूख कम होता या किसी लक फेक्टर के चलते  नेता प्रतिपक्ष रबड़ी देवी ने बंगला खाली करने से क्यों मना किया.

 मुख्यमंत्री आवास से 10, सर्कुलर रोड तक

पटना के सबसे सुरक्षित और पॉश वीआईपी जोन में स्थित यह बंगला राजभवन और मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) के बेहद करीब है. साल 2005 तक, जब बिहार में लालू-राबड़ी की सरकार थी, तब यह पूरा परिवार '1, अणे मार्ग'में रहता था. नवंबर 2005 में सत्ता परिवर्तन के बाद नीतीश कुमार के हाथों में आई कमान और लालू परिवार को वहां से हटना पड़ा.

​राबड़ी देवी को आवंटन (2006)

साल 2006 में पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते यह बंगला आधिकारिक रूप से राबड़ी देवी को आवंटित किया गया था. तब से लेकर पिछले दो दशकों (20साल) से यह लालू परिवार का मुख्य ठिकाना बना हुआ है.सरकारी रिकॉर्ड्स की मानें तो 2005 से पहले यह सेंट्रल पूल का हिस्सा था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राबड़ी देवी से पहले इसमें उनके भाई साधु यादव रहा करते थे.

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राबड़ी देवी से पहले का इतिहास:

 सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 से पहले यह बंगला भवन निर्माण विभाग के सेंट्रल पूल का हिस्सा था, जो समय-समय पर कद्दावर मंत्रियों या अधिकारियों को मिलता था। हालांकि, पुराने राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राबड़ी देवी को आवंटित होने से पहले इस आवास में उनके भाई साधु यादव रहा करते थे.

पूरी रणनीति इसी परिसर के भीतर होती थी तैयार
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बिहार की राजनीति का 'कैंप ऑफिस'

​पिछले 20 वर्षों में '10, सर्कुलर रोड' केवल एक रिहायशी मकान नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की राजनीति की कई बड़ी पट कथाओं का गवाह बना है. साल 2015 में जेडीयू और आरजेडी के ऐतिहासिक महागठबंधन की पूरी रणनीति इसी परिसर के भीतर तैयार हुई थी. वही जेल और अस्वस्थता के दौर के बाद लालू प्रसाद यादव जब भी पटना में रहे, इसी बंगले में राज्य भर से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए उनका दरबार सजता रहा. भले ही तेजस्वी यादव को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर अलग सरकारी आवास '1, पोलो रोड' अलॉट है, लेकिन आरजेडी की तमाम निर्णायक और बड़ी बैठकें इसी 10, सर्कुलर रोड पर ही आयोजित होती हैं.

​लालू परिवार के लिए कितना 'लकी' है यह बंगला?

​लालू प्रसाद यादव और उनके समर्थकों के बीच इस बंगले को बेहद भाग्यशाली माना जाता है. इसके पीछे कई बड़ी राजनीतिक और पारिवारिक वजहें हैं.

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सत्ता में वापसी और बड़े पद

​इसी बंगले में रहते हुए लालू परिवार ने बिहार की राजनीति में कई बार अपनी खोई हुई ताकत वापस पाई. साल 2015 के चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और तेजस्वी यादव पहली बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बने. ​साल 2018 में जब बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की शादी तय हुई, तो जेल में बंद लालू प्रसाद यादव को पैरोल और फिर 6 हफ्ते की जमानत मिली. इसी दौरान राबड़ी देवी को दोबारा नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिला था, जिसे परिवार के लिए बेहद शुभ माना गया.

बच्चों की शादियां
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बच्चों की शादियां और गृह प्रवेश

तेज प्रताप यादव की बारात यहीं से निकली. सबसे छोटी बेटी राज लक्ष्मी की शादी की रस्में यहीं हुईं और दिसंबर 2021 में तेजस्वी यादव अपनी पत्नी राजश्री को लेकर पहली बार इसी घर में आए, जहां बहू का भव्य गृह प्रवेश हुआ था.

क्यों खड़ा हुआ वर्तमान विवाद?

मई 2026 में इस बंगले को खाली कराने के पीछे कानूनी और प्रशासनिक नीतियां हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के 2019 के उस फैसले के तहत की जा रही है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिए जाने के नियम को रद्द कर दिया गया था.

​इसके अलावा, साल 2024 में राजनीतिक समीकरण बदलने पर इस बंगले को उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित किया गया था और यह भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा को आवंटित हुआ था, लेकिन लालू परिवार द्वारा इसे खाली न किए जाने के कारण वे यहां शिफ्ट नहीं हो सके थे.

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राबड़ी देवी  नेता प्रतिपक्ष
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तीन आधिकारिक नोटिस

इसके बाद लालू परिवार को लगातार तीन अधिकारिक नोटिस भी भेजे गए. जिसके तहत 25 नवंबर 2025 को ​पहला आदेश , जिसमें नई आवासीय नीति के तहत राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष (विधान परिषद) के रूप में 39, हार्डिंग रोड पर नया बंगला अलॉट किया गया और पुराना आवास खाली करने को कहा गया. जिसपर कोई हलचल न होते देख मई 2026 के मध्य में ​दूसरा नोटिस, पुराना आवास खाली न होने पर भवन निर्माण विभाग के जरिए जारी किया गया था. इसके बाद अब 29 मई 2026 को ​तीसरा और अंतिम नोटिस  भेजा गया है. जिसमें बंगले को एनडीए सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम  के नाम आवंटित कर दिया गया है. 

 15 दिनों का अल्टीमेटम

फिलहाल, प्रशासन द्वारा लालू परिवार को बंगला खाली करने के लिए 15 दिनों का अंतिम समय (अल्टीमेटम) दिया गया है, जिससे बंगले के बाहर राजनीतिक सरगर्मी और सुरक्षा बल की तैनाती बढ़ गई है.

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