कुरुक्षेत्र के इस मंदिर में हुआ था श्री कृष्ण का मुंडन, यहां है घोड़े चढ़ाने की परंपरा

कुरुक्षेत्र के श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में महाभारत काल से चली आ रही घोड़ा चढ़ाने की परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है. नवरात्रों में यहां हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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अधिकांश भक्त यहां लकड़ी के घोड़े भी अर्पित करते हैं.

Bhadrakali Shaktipeeth: कुरुक्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर अपनी आस्था, इतिहास और परंपराओं के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है. माना जाता है कि यहां माता सती के दाएं पैर का टखना गिरा था, इसलिए ये देश के प्रमुख 52 शक्तिपीठों (Shaktipeeth Kaun Kaun Se Hain) में शामिल है. यहां आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ-साथ विशेष रूप से घोड़े चढ़ाने की परंपरा निभाते हैं. मिट्टी, चांदी, सोने और लकड़ी के घोड़े (Lakadi Ke Ghode Kahan Arpit Kiye Jate Hain) यहां अर्पित किए जाते हैं. कहा जाता है कि महाभारत काल से चली आ रही ये परंपरा आज भी उतने ही विश्वास के साथ निभाई जाती है. अधिकांश भक्त यहां लकड़ी के घोड़े भी अर्पित करते हैं.

मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता (Historical Significance)

ये मंदिर सावित्री शक्ति पीठ भद्रकाली के नाम से विख्यात है. मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने यहीं आराधना की थी और विजय की कामना की थी. युद्ध के बाद उन्होंने अपने घोड़े माता को अर्पित किए. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी श्रद्धालु घोड़े चढ़ाते हैं. प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी यहीं हुआ था, और युद्ध के बाद कृष्ण ने भी सबसे सुंदर घोड़ों की जोड़ी यहां समर्पित की थी.

घोड़ा चढ़ाने की परंपरा (Tradition of Offering Horses)

इस मंदिर की एक खास परंपरा है घोड़े चढ़ाने की. पहले यहां असली घोड़े अर्पित किए जाते थे. लेकिन समय के साथ ये स्वरूप बदल गया. अब श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार सोने, चांदी, लकड़ी, मिट्टी और चीनी-मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं. मिट्टी के घोड़ों की कीमत आमतौर पर 15 से 20 रुपए होती है. फिर भी इनके पीछे आस्था उतनी ही मजबूत मानी जाती है. कुछ वर्ष पहले एक भक्त ने असली घोड़े भी चढ़ाए थे. जो इस परंपरा की गहराई को दर्शाता है.

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विशिष्ट हस्तियों की आस्था (Devotion of Prominent Personalities)

इस मंदिर की ख्याति केवल आम श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने यहां चांदी के घोड़े चढ़ाए थे. जो आज भी मंदिर में सुरक्षित रखे हैं. देश और प्रदेश के कई मुख्यमंत्री, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पत्नी भी यहां आकर घोड़े चढ़ा चुकी हैं.

नवरात्रों में विशेष पूजा और भीड़ (Navratri Celebrations and Devotee Rush)

नवरात्रों के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और माता के दरबार में भक्तों का तांता लगा रहता है. हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से यहां पहुंचकर मनोकामनाओं के लिए घोड़े अर्पित करते हैं. ये परंपरा मंदिर की पहचान और आस्था दोनों को जीवंत बनाए रखती है.

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