ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका! फाइटर जेट और एंटी मिसाइल सिस्टम तैनात, इजरायल भी अलर्ट

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए पश्चिम एशिया में एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और फाइटर जेट्स की तैनाती तेज कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी-मिसाइल सिस्टम भी बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि इजरायल भी हालात पर नजर रखते हुए अलर्ट मोड में है.

ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका! फाइटर जेट और एंटी मिसाइल सिस्टम तैनात, इजरायल भी अलर्ट

पश्चिम एशिया में फिर से बड़े सैन्य टकराव की आशंका तेज हो गई है. अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा शुरू कर दिया है. इसी बीच इजरायल भी अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को अलर्ट मोड पर रखने की खबरें आ रही हैं. यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, मौतों के आंकड़ों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सवालों पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव चरम पर पहुंंचा हुआ है.

‘बोर्ड ऑफ पीस' लॉन्च… और 24 घंटे में फिर सैन्य कार्रवाई की बात

गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस' नाम की एक पहल शुरू की, जिसे एक ऐसी “अंतरराष्ट्रीय संस्था” बताया गया जो “स्थिरता बढ़ाने” और संघर्ष से प्रभावित इलाकों में “स्थायी शांति” सुनिश्चित करने का मकसद रखती है. मगर इसके 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य बल इस्तेमाल करने की बात करने लगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर बार-बार सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं.

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उन्होंने यह दावा भी किया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान को “हजारों लोगों” को फांसी देने की योजना रद्द करनी पड़ी. ट्रंप ने गुरुवार को फिर कहा कि उनकी धमकियों के बाद ईरान ने करीब 840 फांसी रोक दीं. हालांकि बाद में उन्होंने अपना लहजा कुछ नरम कर लिया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ट्रंप का यही अंदाज है जिसमें दबाव/धमकी और “टैक्टिकल ऑफ-रैंप” साथ-साथ चलते हैं ताकि सामने वाला रियायत देने को मजबूर हो.

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USS Abraham Lincoln स्ट्राइक ग्रुप तैनाती की तैयारी

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक USS Abraham Lincoln की अगुवाई वाला एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर आने वाले दिनों में अरब सागर या फारस की खाड़ी के इलाके में दाखिल हो सकता है. इसे वॉशिंगटन की तरफ से तेहरान पर दबाव बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी वजह ईरान में प्रदर्शनों पर “कड़ी कार्रवाई” बताई जा रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस स्ट्राइक ग्रुप की अंतिम पुष्टि की गई लोकेशन तीन दिन पुरानी है. पहले यह साउथ चाइना सी में था, लेकिन ट्रंप के इसे पश्चिम की ओर मोड़ने के बाद यह इंडियन ओसियन क्षेत्र में दिखा. इसके बाद यह ओपन-सोर्स AIS (Automatic Identification System) फीड पर सार्वजनिक रूप से ट्रैक होना बंद हो गया. इस समूह में एक अटैक सबमरीन भी शामिल बताई गई है.

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F-15E Strike Eagle पहले से पश्चिम एशिया में

अमेरिकी F-15E Strike Eagle फाइटर जेट्स पहले ही पश्चिम एशिया में तैनात हैं. ये उसी स्क्वाड्रन से हैं जिसे अप्रैल 2024 में इजरायल पर ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में तैनात किया गया था. US Central Command (CENTCOM) ने मंगलवार को X पर एक वीडियो/पोस्ट भी साझा किया, जिसमें एक विमान किसी अज्ञात बेस पर उतरता दिखाई दे रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक यह तैनाती एक बड़े री-डिप्लॉयमेंट का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें KC-135 एरियल रिफ्यूलर (हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर) भी शिफ्ट किए जा रहे हैं ताकि फाइटर जेट्स को मिड-एयर रिफ्यूलिंग किया जा सकें और उनका स्ट्राइक रेंज बढ़ जाए.

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THAAD और Patriot जैसे एंटी-मिसाइल सिस्टम भी बढ़ाए जा रहे

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में एडिशनल एंटी-मिसाइल सिस्टम, खास तौर से THAAD और Patriot को भी तैनात किया जा रहा है. इसे खास तौर पर अमेरिकी सहयोगियों, जैसे इजरायल और कतर, में मजबूत किया जाना बताया गया.

प्रदर्शनों पर हिंसा और मौतें: आंकड़ों को लेकर विरोधाभास

यह पूरा सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन और हिंसा की खबरें आ रही हैं. एक रिपोर्ट में (अल जज़ीरा द्वारा ईरानी सरकारी मीडिया नेटवर्क के हवाले से) कहा गया कि 3,117 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल शामिल बताए गए. वहीं मानवाधिकार समूहों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, संभवतः 20,000 से ऊपर.

ट्रंप ने इन मौतों को लेकर ईरान पर कड़ा रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी फिर से दोहराई है. उन्होंने पहले यह भी कहा था कि ईरान “धरती से मिट जाएगा.”

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ईरान की प्रतिक्रिया: ‘ट्रिगर पर उंगली' और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

ईरान ने भी सख्त संदेश दिए हैं, उसने कहा कि उसकी “उंगली ट्रिगर पर” है और ट्रंप को धमकी भी दी. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया और इसे कायराना करार दिया. उन्होंने यह भी कहा कि यह “12-दिवसीय युद्ध” में हार का बदला है. यह संकेत जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों की ओर था.

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क्यों बढ़ रहा तनाव: 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का ‘लापता' होना

रिपोर्ट में एक और बड़ा कारण बताया गया है, ईरान के पास मौजूद 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (जिसे 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त बताया गया) का जून 2025 में अमेरिकी “बंकर बस्टर” हमलों के बाद लापता होना है. ट्रंप कह चुके हैं कि अगर तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू किया तो अमेरिका कार्रवाई करेगा. उनका बयान था कि अगर वे कोशिश करेंगे… तो उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ेगा, लेकिन हम वहां भी उन्हें निशाना बनाएंगे.

इस व्यापक समझौते/फ्रेमवर्क के तहत ईरान को IAEA (International Atomic Energy Agency) को यह रिपोर्ट करना है कि जून में जिन साइट्स पर हमला हुआ, वहां परमाणु सामग्री का क्या हुआ. इसमें Fordow फैसिलिटी से जुड़े उस स्टॉकपाइल का सवाल भी शामिल है जिसके बारे में माना जाता था कि वह वहीं मौजूद था. रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के सात महीने बाद भी IAEA निरीक्षण नहीं हुआ, जबकि IAEA का अपना गाइडेंस इसे मासिक आधार पर करने की सलाह देता है.

अमेरिकी कार्रवाई कैसी हो सकती है?

संभावित अमेरिकी कार्रवाई के स्वरूप को लेकर भी रिपोर्ट में कई परतों में बात की गई है-

  1. F-35 स्टील्थ फाइटर्स और B-2 बॉम्बर्स जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल, ठीक वैसे ही जैसे जून में परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान हुआ था. हालांकि फिलहाल इनके क्षेत्र में तैनात होने की पुष्टि नहीं बताई गई.
  2. सैन्य एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अक्सर सीमित “दंडात्मक” (punitive) स्ट्राइक से शुरुआत करता है, जो एक तरह का चेतावनी संदेश होता है और इसके साथ कूटनीतिक “निकास मार्ग” भी छोड़ा जाता है.
  3. अगली परतों में दुश्मन की स्ट्राइक क्षमता को कम करने के लिए मिसाइल, ड्रोन, लॉन्च इन्फ्रास्ट्रक्चर और कमांड नेटवर्क को निशाना बनाया जा सकता है.
  4. इसके बाद परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले की संभावना, हालांकि यह बड़ा और संवेदनशील कदम होगा क्योंकि इससे ईरान की जवाबी कार्रवाई का जोखिम बढ़ता है.
  5. सबसे ऊपरी स्तर रेजीम चेंज माना गया है, लेकिन इसे  असंभव बताया गया क्योंकि यह अमेरिका को वर्षों/दशकों तक महंगे युद्ध में झोंक सकता है.
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हमले के संकेत क्या होंगे?

रिपोर्ट के मुताबिक संभावित स्ट्राइक के “सिग्नल” आमतौर पर ये होते हैं:-

  • कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की मूवमेंट — USS Lincoln का आगे बढ़ना “रेड फ्लैग” माना जा रहा है.
  • एरियल रिफ्यूलर्स की तैनाती — KC-135 का शिफ्ट होना संकेत माना गया.
  • स्ट्राइक-capable एयरक्राफ्ट की तैनाती — जैसे F-15E; और कैरियर पर F-35C/F/A-18 जैसे प्लेटफॉर्म.
  • क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ समन्वय — ओवरफ्लाइट अनुमति, संभावित युद्धक्षेत्र से नागरिक उड़ानों को हटाना, आदि.

ईरान के विकल्प: सीमित जवाब, ‘प्रॉक्सी' और होर्मुज स्ट्रेट

ईरान के सामने कई विकल्प बताए गए हैं:

  1. सीमित और नियंत्रित जवाबी कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों/एसेट्स के खिलाफ, लेकिन यह जोखिम भरा है क्योंकि इससे सैन्य टकराव बढ़ सकता है.
  2. उदाहरण के तौर पर 23 जून 2025 को कतर के Al Udeid Air Base पर हमले का जिक्र है, जिसे अमेरिकी हमलों के एक दिन बाद “सीमित और संकेतित प्रतिक्रिया” के रूप में देखा गया.
  3. एक तरीका “Axis of Resistance” के जरिए दबाव बनाना भी है. जैसे हिज़्बुल्लाह, इराकी नेटवर्क, हूती. ताकि जिम्मेदारी/एट्रिब्यूशन धुंधला रहे और तनाव को जरूरत के हिसाब से बढ़ाया-घटाया जा सके.
  4. सबसे असरदार लीवर भू-आर्थिक (geoeconomic) बताया गया है. Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति. रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरे. ईरान कानूनी तौर पर इसे “कंट्रोल” नहीं करता, लेकिन पहले भी उसने यहां जोखिम बढ़ाकर और ट्रैफिक बाधित करके दबाव बनाया है.
  5. इसे बंद करना जरूरी नहीं—छिटपुट उत्पीड़न, जब्ती या हमलों से भी बीमा लागत, फ्रेट रेट और war-risk प्रीमियम बढ़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों के जरिए वॉशिंगटन पर राजनीतिक दबाव बन सकता है.

इजरायल की भूमिका: ‘सेकेंडरी टारगेट' और एयर डिफेंस अलर्ट

अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इजरायल एक अहम खिलाड़ी बन सकता है. चाहे वह सीधे शामिल हो या नहीं. वजह यह कि ईरान की नजर में इजरायल एक “स्वीकार्य सेकेंडरी टारगेट” हो सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल का मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम Iron Dome और Arrow क्षेत्र में नुकसान सीमित करने और अमेरिका को प्रतिक्रिया का समय देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है.

हालांकि इजरायल अगर अमेरिकी हमले में सीधे शामिल होता है तो उसके लिए जोखिम बढ़ेंगे, क्योंकि वह पहले से गाज़ा में संघर्ष में उलझा है. अमेरिका के साथ मिलकर हमला करने से बहु-फ्रंट युद्ध का खतरा बढ़ सकता है, जिसे वह अमेरिकी समर्थन के बावजूद संभालने में मुश्किल महसूस कर सकता है.