होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तबा के सलाहकार ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज क्षेत्र में दखल दिया तो अमेरिकी जहाज डुबो दिए जाएंगे. इस बयान में डोनाल्ड ट्रंप को भी सीधे निशाने पर लिया गया है. ईरान का आरोप है कि अमेरिका द्वारा की गई नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह गैरकानूनी है और सवाल उठाया गया है कि क्या अमेरिका इस इलाके की पुलिस बनने का अधिकार रखता है.
ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो ओमान की खाड़ी, फारस की खाड़ी और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को रोका जा सकता है. वहीं दूसरी ओर अमेरिका ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड IRGC पर बड़ा आर्थिक एक्शन लेने की तैयारी में है. अमेरिका IRGC से जुड़े फंड्स को फ्रीज कराने के लिए गल्फ देशों के साथ बातचीत कर रहा है, जिससे ईरान को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता अधर में लटकी हुई है. ट्रंप प्रशासन किसी छोटी डील के बजाय बड़ी और निर्णायक डील चाहता है, जबकि ईरान ने कई सख्त शर्तें रख दी हैं. होर्मुज पर पूरा नियंत्रण, यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की मांग, पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेना की वापसी, युद्ध नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमलों की गारंटी जैसे मुद्दे सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं.
40 दिन की जंग के बाद फिलहाल 14 दिन का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन दोनों पक्ष पूरी तैयारी के साथ मोर्चे पर डटे हुए हैं. सवाल यही है कि क्या बातचीत से कोई बीच का रास्ता निकलेगा या एक बार फिर होर्मुज दुनिया को बड़े युद्ध की ओर धकेल देगा.
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