Iran-US Ceasefire: ईरान के सामने अमेरिका का सरेंडर! ट्रंप पीछे क्यों हटे?

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  • प्रकाशित: अप्रैल 08, 2026

सीजफायर के ऐलान के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका की सुरक्षा गारंटी अब कमजोर पड़ रही है. खाड़ी देशों को पहली बार यह एहसास हुआ है कि उनके तेल रिफाइनरी और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर भी सुरक्षित नहीं हैं. दुबई, यूएई और सऊदी अरब जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम पर सवाल खड़े किए.

THAAD और Patriot जैसे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम हमलों को पूरी तरह रोकने में नाकाम रहे. हमलों के चलते कई खाड़ी देशों में हवाई सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं, जिससे हालात की गंभीरता सामने आई. अब खाड़ी देश अमेरिका के बजाय अपनी स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था या वैकल्पिक रणनीति पर विचार कर रहे हैं. सीजफायर के बाद ईरान‑अमेरिका वार्ता पर सहमति बनी है, जिसमें ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर ग़लीबाफ नेतृत्व करेंगे.

अमेरिका की तरफ से बातचीत की अगुआई वाइस प्रेसिडेंट जेडी वांस करेंगे. ईरान ने अमेरिका के सामने 10 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु सुरक्षा, प्रतिबंध हटाने और आर्थिक नुकसान की भरपाई शामिल है. बातचीत शुरू होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन नतीजा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन क्या होगा, यह अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है.

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