नई दिल्ली. शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए बयान पर मचे विवाद के बीच योगगुरु स्वामी रामदेव ने खुद को किसी एक पक्ष से जोड़ने से स्पष्ट इनकार किया है. NDTV को दिए इंटरव्यू में स्वामी रामदेव ने कहा कि वे न किसी व्यक्ति के साथ हैं और न ही किसी के विरोध में, बल्कि “सनातन, देश और सत्य” के साथ खड़े हैं.
स्वामी रामदेव ने कहा कि दो ताकतवर व्यक्तियों या संस्थाओं के बीच चल रहे विवाद में कूदकर अपनी फजीहत कराना बुद्धिमानी नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो शक्तिशाली नेताओं के टकराव पर सवाल पूछे जाते हैं, तो भारत में हो रहे अंदरूनी विवादों पर एकतरफा बयान देने का दबाव क्यों बनाया जाता है.
“योगी तो बीजेपी का निर्णय है, इसमें मेरा क्या रोल”
यूपी में योगी के नेतृत्व पर पूछे गए सवालों पर रामदेव ने कहा कि योगी का मुख्यमंत्री बनना बीजेपी और जनता का फैसला है. इसमें उनका कोई निजी समर्थन या विरोध नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि वे किसी को खुश या नाराज़ करने की राजनीति नहीं करते.
शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला
स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़ा बयान दिया. उनका कहना था कि जो लोग अपने बच्चों को गुरुकुल या भारतीय शिक्षा बोर्ड की बजाय पश्चिमी ढांचे वाली शिक्षा में पढ़ा रहे हैं, वे मानसिक गुलामी की स्थिति में हैं.
उन्होंने दावा किया कि संस्कारविहीन शिक्षा प्रणाली नशा, अपराध और बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है. रामदेव के अनुसार, भारतीय शिक्षा मॉडल अपनाने से आतंकवाद, नशाखोरी और नैतिक पतन जैसी समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है.
मुसलमानों को लेकर बयान
इंटरव्यू में स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत के अधिकांश मुसलमान “भारत माता की संतान” हैं और उनका मुगलों से सीधे जुड़ाव बताना ऐतिहासिक रूप से गलत है. उन्होंने समाज को जाति और वर्ग में बांटकर राजनीति करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए.
योगी बनाम अखिलेश की सियासत?
योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक चुनौती कहां से है- अखिलेश यादव से या अपनी पार्टी के भीतर से- इस सवाल पर रामदेव ने कहा कि योगी किसी से खतरा महसूस नहीं करते. उनका कहना था कि BJP और RSS जैसी संस्थाएं किसी एक बयान या स्टूडियो चर्चा से नहीं चलतीं. रामदेव ने यह भी कहा कि राजनीति में अक्सर नेताओं को खुद नहीं पता होता कि भविष्य में उनके साथ क्या होने वाला है, इसलिए संत होने के नाते वे किसी राजनीतिक टैग में नहीं फंसना चाहते.
राहुल गांधी वाले बयान पर सफाई
विदेश नीति और “बालक” शब्द को लेकर उठे विवाद पर स्वामी रामदेव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी विशेष नेता का नाम नहीं लिया था. उनका कहना था कि संत परंपरा में “बालकवत भाव” निर्दोषता का प्रतीक है, न कि अपमान.
कोर्ट, विज्ञापन और चिकित्सा दावों पर जवाब
सुप्रीम कोर्ट द्वारा योग और आयुर्वेद से जुड़े विज्ञापनों पर की गई टिप्पणी को लेकर रामदेव ने कहा कि उनके खिलाफ यह एक साजिश है. उन्होंने दावा किया कि उनकी चिकित्सा पद्धतियों के पक्ष में उनके पास प्रमाण हैं और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं.
रामदेव ने एलोपैथी पर अपने पुराने बयानों का भी बचाव करते हुए कहा कि विचारों का टकराव स्वाभाविक है और इसमें असहज होने की जरूरत नहीं.
“मैं सबके साथ हूं, और किसी के साथ नहीं”
इंटरव्यू के अंत में स्वामी रामदेव ने कहा कि वे योग, सनातन और राष्ट्र के साथ हैं, किसी व्यक्ति या पार्टी के पक्ष‑विपक्ष में नहीं. उनका कहना था कि साधु की भूमिका मित्र‑शत्रु से ऊपर होती है और जनता उन्हें चाहे जिस टैग से देखे, वे अपना मार्ग नहीं बदलेंगे.