सिर्फ़ क़ानून बना देना ही हल या समाज की भी है कोई ज़िम्मेदारी?

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  • प्रकाशित: अगस्त 20, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में एक डॉक्‍टर के साथ रेप और मर्डर की घटना के बाद, डॉक्‍टरों और मेडिकल स्‍टाफ की सुरक्षा तथा सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए एक नेशनल प्रोटोकॉल डेवलेप करने के लिए मंगलवार को 14 सदस्यीय टास्‍कफोर्स का गठन किया है. यह कार्यबल तीन सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट और दो महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा. पर बड़ा सवाल यह है की देश में परिस्थितियां महिलाओं और बच्चियों को लेकर कब सुधरेंगी? निर्भया के बाद बारह साल बीत गए लेकिन लगता नहीं की कुछ बदला है, इसीलिए हम कह रहे है की बच्चियों नहीं बेटों के सुधारने का समय आ गया है । देखें हमारी खास चर्चा आभा सिंह (वकील और सामाजिक कार्यकर्ता) और डॉक्टर शालिनी अग्रवाल (वरिष्ठ डॉक्टर ) के साथ.

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