मध्य‑पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अरब और इस्लामिक देशों से एकजुट होने की बड़ी अपील की है. ईरान का कहना है कि मुस्लिम और खाड़ी देशों को मिलकर एक साझा सैन्य और सुरक्षा गठबंधन बनाना चाहिए. इस प्रस्ताव के साथ ही ईरान ने साफ तौर पर अमेरिका और इजरायल से दूरी बनाए रखने की बात कही है. ईरान की ओर से यह बयान ब्रिगेडियर जनरल इब्राहीम जल्फगारी की तरफ से सामने आया है. जल्फगारी लगातार ईरान का पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर रख रहे हैं और अब उन्होंने अरब व इस्लामिक देशों से साझा रणनीति अपनाने का आह्वान किया है.
"खाड़ी देशों से कोई दुश्मनी नहीं" – ईरान
न्यूज़रूम से सीधे जुड़े संवाददाता राजीव रंजन के मुताबिक, ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि खाड़ी देशों के साथ उसकी कोई दुश्मनी नहीं है. ईरान का कहना है कि वह केवल उन्हीं अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, जहां से उस पर हमले किए जा रहे हैं. ईरानी पक्ष यह भी दोहरा रहा है कि जिन जगहों पर नागरिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, उसके लिए वह पहले ही खाड़ी देशों से माफी मांग चुका है. ईरान का दावा है कि उसके हमले पूरी तरह सैन्य ठिकानों तक सीमित हैं.
अमेरिका‑इजरायल को अलग रखने की रणनीति
ईरान का साफ संदेश है कि अगर क्षेत्रीय देश अमेरिका और इजरायल को अलग रखते हुए आपसी सहयोग बढ़ाएं, तो सुरक्षा से लेकर अन्य रणनीतिक मुद्दों पर मिलकर काम किया जा सकता है. ईरान पड़ोसी देशों के साथ एक नए क्षेत्रीय एलायंस की संभावनाएं तलाशने में जुटा है. राजीव रंजन के मुताबिक, ईरान इसे एक बड़े कदम के तौर पर देख रहा है. उसका मानना है कि खाड़ी और मुस्लिम देशों का साथ मिलना मौजूदा जंग में शक्ति संतुलन बदल सकता है.
क्या ईरान की अपील को मिलेगा समर्थन?
हालांकि बड़ा सवाल यही है कि मौजूदा हालात में क्या अरब और इस्लामिक देश ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे. जिन देशों की धरती पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, उनके लिए यह फैसला आसान नहीं होगा. जिस तरह से जंग की जद में लगातार नए देश आते जा रहे हैं, उससे हालात और ज्यादा भयावह होने की आशंका भी जताई जा रही है. ऐसे में ईरान की यह अपील क्षेत्रीय राजनीति में एक नए मोड़ के तौर पर देखी जा रही है.