Gaza Eid celebration: खंडहर गाजा में कैसे मन रही है बकरीद, 1 किलो मांस तक नहीं खरीद पा रहे मुस्लिम

एक वक्त था जब गाजा में बकरीद खुशियों, नए कपड़ों और 'मामूल' व 'काक' जैसी मिठाइयों का त्योहार हुआ करती थी. बच्चे खुशी से झूमते थे और हर तरफ रौनक होती थी. लेकिन आज हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं. इस वीडियो में हम आपको दिखा रहे हैं कि कैसे जंग, बेतहाशा महंगाई और तबाही ने गाजा से बकरीद की खुशियां छीन ली हैं.

आज गाजा के बाजार तो सजे हैं, लेकिन लोग सिर्फ चीजों को देख सकते हैं, खरीद नहीं सकते. लाखों लोग अभी भी टेंटों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं और माता-पिता अपने बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने में भी खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं.

हालांकि अक्टूबर 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता से सीजफायर का ऐलान हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इजरायली हवाई हमले थमे नहीं हैं. इसी बीच 59 साल के अबू अब्दुल्लाह अल-मोसादर की कहानी सामने आती है. उन्होंने और उनके भाई ने मिलकर कुर्बानी के लिए सिर्फ एक भेड़ खरीदने के लिए 13,000 शेकेल (करीब 4.4 लाख रुपए) जुटाए हैं. अबू का कहना है कि यह सीजफायर एक बहुत बड़ा झूठ है, लेकिन वो ये सब सिर्फ अपने बच्चों के चेहरों पर थोड़ी सी खुशी लाने के लिए कर रहे हैं. गाजा में इस वक्त इतनी बड़ी रकम खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है.

इस मुश्किल घड़ी में गाजा के लोगों के जज्बे और संघर्ष पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि वहां के बच्चों को कभी उनका पुराना बचपन वापस मिल पाएगा? कमेंट सेक्शन में अपने विचार हमारे साथ जरूर शेयर करें.

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