दूरदर्शन की रामायण का वो एपिसोड जिसने रामानंद सागर को पहुंचा दिया कोर्ट, 10 साल चला केस, प्रसारण से पहले मचा था बवाल

1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामायण सीरियल का क्रेज इतना था कि इसे देखने के लिए सड़कें और बाजार तक खाली हो जाते थे. लेकिन इसके एक एपिसोड की वजह से रामानंद सागर के खिलाफ केस दर्ज हो गया था.

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दूरदर्शन की रामायण का वो एपिसोड जिसने रामानंद सागर को पहुंचा दिया कोर्ट
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रामानंद सागर की रामायण एक सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक शो है, जिसकी बराबरी आज तक ना ही कोई शो कर पाया ना ही कोई भी फिल्म. रामानंद सागर को उनकी फिल्मों से ज्यादा रामायण सीरियल के लिए याद किया जाता है. 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामायण सीरियल का क्रेज इतना था कि इसे देखने के लिए सड़कें और बाजार तक खाली हो जाते थे. लेकिन इसके एक एपिसोड की वजह से रामानंद सागर के खिलाफ केस दर्ज हो गया था.

रामचरितमानस पर आधारित रामायण

रामायण के फॉलोअप शो लव-कुश की वजह से उन्हें कानूनी झंझट का सामना करना पड़ा था. लव-कुश की कहानी दिखाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया. रामानंद सागर तुलसीदास की रामचरितमानस पर आधारित रामायण बना रहे थे. इसमें लव-कुश की कथा नहीं है. इसलिए वह शो का अंत रामचरितमानस के अनुसार ही करना चाहते थे. लेकिन रामायण खत्म होने के बाद उन पर दबाव बढ़ने लगा कि लव-कुश की कहानी भी दिखाई जाए.

रामानंद सागर इस कहानी को नहीं दिखाना चाहते थे. वह मानने को तैयार नहीं थे कि भगवान राम अपनी गर्भवती पत्नी सीता को एक धोबी की बात पर वनवास भेज सकते हैं. sagarworld.com में प्रेम सागर के ब्लॉग के अनुसार, वह इस प्रसंग को राम की मर्यादा के खिलाफ मानते थे.

वाल्मीकि समाज सरकार पर दबाव बनाया

फिर भी वाल्मीकि समाज सरकार पर दबाव बना रहा था. वह चाहते थे कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार पूरी कहानी दिखाई जाए. यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय से भी कॉल आया. अंत में दूरदर्शन ने रामानंद सागर को अनुमति दी कि वे किसी विश्वसनीय सोर्स से कहानी लें.

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रामानंद सागर ने शोध शुरू किया. उन्होंने राधेश्याम द्वारा रचित एक संस्करण पाया. इसमें माता सीता अपने पति की मर्यादा और सम्मान के लिए खुद अयोध्या छोड़ने का फैसला करती हैं. राम उन्हें वनवास नहीं भेजते. फिर रामानंद सागर ने ‘सीता वनवास' वाला एपिसोड इसी आधार पर शूट किया.

रामानंद सागर पर केस

एपिसोड दूरदर्शन पहुंच चुका था. प्रसारण से ठीक एक घंटे पहले धीरेंद्र ब्रह्मचारी पहुंचे और एपिसोड रोकने का आदेश दिया. लेकिन रामानंद सागर खुद स्टूडियो में मौजूद थे. उन्होंने बात नहीं मानी और एपिसोड प्रसारित करवाया.

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प्रसारण के बाद देशभर में नाराजगी फैल गई. लोगों ने आरोप लगाया कि रामानंद सागर ने रामायण के साथ छेड़छाड़ की है. इसी आरोप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया. यह मुकदमा करीब दस साल तक चला.

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